
गया में एक ही दिन में 8 जटिल हृदय ऑपरेशन, शुभकामना हार्ट हॉस्पिटल ने बनाया नया कीर्तिमान
गया: गया के अग्रणी हृदय संस्थान शुभकामना हार्ट हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर में रविवार को एक ही दिन में 8 बैलून माइट्रल वॉल्वोटोमी (BMV) सफलतापूर्वक कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया। इन जटिल हृदय प्रक्रियाओं का नेतृत्व वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अमन सिन्हा एवं उनकी विशेषज्ञ टीम ने किया।
बीएमवी (Balloon Mitral Valvotomy) एक अत्याधुनिक प्रक्रिया है, जिसका उपयोग माइट्रल स्टेनोसिस नामक हृदय रोग के उपचार में किया जाता है। यह बीमारी मुख्यतः रूमेटिक हार्ट डिजीज के कारण होती है, जिसमें हृदय का माइट्रल वाल्व धीरे-धीरे संकरा हो जाता है और रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न होने लगती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी विशेष रूप से महिलाओं में अधिक पाई जाती है। 25 से 30 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते अधिकांश मरीजों में चलने-फिरने या शारीरिक परिश्रम के दौरान सांस फूलना प्रारंभ हो जाता है। समय के साथ यह समस्या बढ़कर आराम की अवस्था में भी सांस लेने में कठिनाई, लेटने पर घुटन, फेफड़ों में पानी भरना तथा शरीर में सूजन जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। उपचार न मिलने पर यह रोग अंततः हृदय विफलता (Heart Failure) का रूप ले सकता है।
डॉ. अमन सिन्हा ने बताया कि कई बार यह बीमारी वर्षों तक पहचान में नहीं आती और मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब हृदय काफी प्रभावित हो चुका होता है। रोग की पुष्टि इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography) द्वारा की जाती है।
बीएमवी प्रक्रिया के दौरान जांघ (Groin) की रक्तवाहिनी के माध्यम से एक विशेष बैलून कैथेटर हृदय तक पहुंचाया जाता है। नियंत्रित एवं सुरक्षित तकनीक से हृदय के एक कक्ष के बीच मार्ग बनाकर बैलून को संकरे माइट्रल वाल्व के पार ले जाया जाता है। इसके बाद विशेष दबाव तकनीक द्वारा बैलून को फुलाया जाता है, जिससे संकरा वाल्व फैल जाता है और रक्त प्रवाह सामान्य हो जाता है।
विशेष बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया में मरीज के शरीर पर कोई बड़ा चीरा नहीं लगाया गया। केवल एक छोटे से छिद्र (पंक्चर) के माध्यम से संपूर्ण ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
ऐसे आठ मरीजों का एक ही दिन में सफल इलाज हुआ, और शुभकामना हार्ट हॉस्पिटल पूरे बिहार का पहला अस्पताल है (निजी या सरकारी) जहाँ एक दिन में आठ माइट्रल वाल्व का सर्जरी किया गया है।
इसी दौरान अस्पताल में एक 30 वर्षीय महिला मरीज का एएसडी (ASD) डिवाइस क्लोजर भी सफलतापूर्वक किया गया। इस आधुनिक तकनीक द्वारा हृदय में जन्मजात छेद को बिना ओपन हार्ट सर्जरी के विशेष डिवाइस की सहायता से बंद किया जाता है।
डॉ. अमन सिन्हा ने बताया कि बीएमवी, एएसडी डिवाइस क्लोजर, रोटेशनल एथेरेक्टॉमी तथा ऑर्बिटल डिबल्किंग जैसी उन्नत हृदय प्रक्रियाएं देश के चुनिंदा केंद्रों पर ही उपलब्ध हैं। गया का शुभकामना हार्ट हॉस्पिटल अब उन संस्थानों में शामिल हो गया है जहां ऐसी अत्याधुनिक हृदय सर्जरी एवं इंटरवेंशनल प्रक्रियाएं बड़े स्तर पर की जा रही हैं। इन तकनीकों से कई मरीजों में बाईपास अथवा ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता भी कम हो जाती है।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि ये सभी उपचार सामान्यतः अत्यधिक महंगे होते हैं, लेकिन शुभकामना हार्ट हॉस्पिटल में इन्हें आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किया गया, जिसके कारण किसी भी मरीज को अपनी जेब से कोई खर्च नहीं करना पड़ा।
गया एवं आसपास के क्षेत्रों के लिए यह उपलब्धि आधुनिक हृदय चिकित्सा सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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