
कहानी बदलाव की
ईंट निर्माण से बदली गिरजा प्रजापति की किस्मत
उमरिया जिले के करकेली विकासखण्ड के ग्राम घुलघुली की रहने वाली गिरजा प्रजापति की जीवन यात्रा यह साबित करती है कि अगर मेहनत के साथ सही मार्गदर्शन और अवसर मिल जाए, तो परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, बदली जा सकती हैं।
गिरजा प्रजापति जो 12वीं तक शिक्षित हैं पहले एक साधारण गृहिणी थीं। परिवार की कुल मासिक आय मात्र 9,000 रुपये थी जिससे घर का खर्च चलाना भी चुनौतीपूर्ण था। सीमित संसाधनों के कारण उनके सपने अक्सर परिस्थितियों के बोझ तले दब जाते थे। आर्थिक तंगी के साथ-साथ आत्मनिर्भर न होने का भावनात्मक दबाव भी उन्हें भीतर ही भीतर कमजोर करता था।
वर्ष 2021 में गिरजा ने ‘जय मां ज्वाला स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा देने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल वित्तीय सहयोग मिला,बल्कि आत्मविश्वास,निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक पहचान भी मिली। आज गिरजा न केवल इस समूह की सचिव हैं बल्कि ‘आजीविका ग्राम संगठन एवं ‘प्रगति संकुल स्तरीय संघ’ से भी सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। वे अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।समूह के माध्यम से गिरजा को विभिन्न वित्तीय सहायता प्राप्त हुई।उन्हें आरएफ (रिवॉल्विंग फंड) से 1,000 रुपये,सीआईएफ (कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड) से 5,000 रुपये सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) से 70,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इन संसाधनों का उपयोग करते हुए गिरजा ने ईंट निर्माण का कार्य शुरू किया। शुरुआत में यह कार्य छोटा था, लेकिन उनकी मेहनत, लगन और समूह के सहयोग से यह धीरे-धीरे एक स्थायी आय का स्रोत बन गया।
आज गिरजा स्वयं लगभग 6,500 रुपये प्रति माह अर्जित कर रही हैं और उनके परिवार की कुल मासिक आय 9,000 रुपये से बढ़कर लगभग 20,000 रुपये हो गई है।
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