
रेवाड़ी में रोजाना 25–30 डॉग बाइट के मामले, क्या नगर परिषद आम लोगों की जान जाने का इंतजार कर रही है? — अमित ग्रोवर
रेवाड़ी। रेवाड़ी शहर में आवारा कुत्तों और आवारा पशुओं की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। समाजसेवी अमित ग्रोवर ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहर में हालात ऐसे हो गए हैं कि ऐसा लगता है जैसे आम आदमी की सुरक्षा के बजाय उसकी जान जाने का इंतजार किया जा रहा है।
अमित ग्रोवर ने कहा कि सरकारी अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 25 से 30 डॉग बाइट के मामले रेवाड़ी शहर से ही सामने आ रहे हैं। यह केवल शहर का आंकड़ा है, जबकि पूरे जिले में कुत्तों के काटने के मामलों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और नगर परिषद को इसे सामान्य समस्या समझने की बजाय गंभीर जनसुरक्षा का विषय मानना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों के साथ-साथ गाय और बैल जैसे आवारा पशुओं के कारण भी सड़क दुर्घटनाओं और जान-माल के नुकसान का खतरा लगातार बना हुआ है। हाल के मामलों में आवारा पशुओं से संबंधित घटनाओं में सात लोगों की मौत होने की बात सामने आई है, ऐसे में प्रशासन को तत्काल प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
35 लाख रुपये के कैटल फ्री बजट पर भी उठे सवाल
अमित ग्रोवर ने कहा कि नगर परिषद के पास आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए लगभग 35 लाख रुपये का वार्षिक कैटल फ्री बजट बताया जाता है। ऐसे में जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि इस बजट में से कितना पैसा वास्तव में खर्च हुआ, किस मद में खर्च हुआ और उसका जमीनी स्तर पर क्या परिणाम निकला।
उन्होंने मांग की कि नगर परिषद इस बजट का पूरा आय-व्यय विवरण सार्वजनिक करे, ताकि जनता को पता चल सके कि आवारा पशुओं की समस्या पर कितना पैसा खर्च किया गया और उससे कितने पशुओं को सुरक्षित तरीके से हटाया गया।
“लोगों की जान से खिलवाड़ बंद हो”
अमित ग्रोवर ने कहा कि प्रशासन का पहला दायित्व है कि आम नागरिक सुरक्षित माहौल में अपने घर से बाहर निकल सके, अपना काम-धंधा कर सके और बिना किसी डर के सड़क पर चल सके। लेकिन यदि रोजाना दर्जनों लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं और आवारा पशुओं के कारण जानलेवा दुर्घटनाएं हो रही हैं, तो यह प्रशासन और नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने नगर परिषद और जिला प्रशासन से मांग की कि:
1. रेवाड़ी शहर में आवारा कुत्तों की समस्या पर तत्काल विशेष अभियान चलाया जाए।
2. डॉग बाइट के रोजाना आने वाले मामलों का वार्डवार रिकॉर्ड तैयार किया जाए।
3. आवारा गाय-बैलों को सुरक्षित तरीके से हटाने और उनके प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था की जाए।
4. 35 लाख रुपये के कैटल फ्री बजट का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए।
5. शहर के संवेदनशील स्थानों और बाजारों में विशेष निगरानी एवं कार्रवाई की जाए।
6. सरकारी अस्पताल में आने वाले डॉग बाइट मामलों का नियमित आंकड़ा सार्वजनिक किया जाए।
अमित ग्रोवर ने कहा कि जनता को आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई चाहिए। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि की जिम्मेदारी किसकी होगी, इसका जवाब प्रशासन और नगर परिषद को देना पड़ेगा।
Rewari, Rewari | Aug 21, 2026