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Rewari News

@vyasmediagroup
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बावल में इस बार नहीं होगा कोई 'बवाल'... क्योंकि अहीरवाल के शेर राव नरबीर सिंह ने खुद संभाल ली है कमान!

पिछली बार 30 जून को जब बावल में माननीय मुख्यमंत्री जी का कार्यक्रम हुआ था, तब 'प्रोटोकॉल' का रोना रोकर कुछ तथाकथित ठेकेदारों ने खूब 'बवाल' (राजनैतिक ड्रामा) काटने की कोशिश की थी। कार्यक्रम से दूरी बनाकर और अहीरवाल के विकास के साथ जो भद्दा मजाक उस दिन किया गया था, उसे दक्षिण हरियाणा की जनता अभी भूली नहीं है।
इस बार भी उन राजनीतिक षड्यंत्रकारियों ने पर्दे के पीछे से पूरी साजिश रची। पिछले दो दिनों से अफवाहें फैलाई गईं कि कार्यक्रम रद्द हो गया है, सरपंचों को रोकने की पूरी कोशिश की गई ताकि आज बावल में फिर से कोई नया 'बवाल' खड़ा किया जा सके।
लेकिन साजिश रचने वालों की एक न चली!
जानते हैं क्यों? क्योंकि इस बार विकास के इस मोर्चे की कमान खुद कैबिनेट मंत्री आदरणीय राव नरबीर सिंह जी ने अपने हाथों में ले ली है!
जब अहीरवाल का शेर खुद मैदान में उतरा हो, तो गीदड़ भभकियां काम नहीं आतीं। आज माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी के सारथी बनकर राव नरबीर जी बावल की धरती पर आ रहे हैं।
सुबह नांगल चौधरी में 'लॉजिस्टिक्स हब' (IMLH) से मालगाड़ी को हरी झंडी दिखाकर रोजगार के नए रास्ते खोलने के बाद, दोनों दिग्गज नेता बावल की अनाज मंडी में आज एक विशाल और ऐतिहासिक जनसभा को संबोधित करेंगे। और इसके तुरंत बाद, वे मुख्यमंत्री जी के साथ ही विशेष प्रवास पर मुंबई के लिए उड़ान भरेंगे!
जब कमान मजबूत और वफादार हाथों में हो, तो विरोधियों की हर साजिश फुस्स हो जाती है। आज बावल में कोई 'बवाल' नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ 'विकास' का डंका बजेगा! जो लोग घर बैठकर अफवाहें उड़ा रहे थे, वो आज बावल अनाज मंडी में उमड़ता जनसैलाब देखकर अपनी आंखें मलते रह जाएंगे।
आइए, आज भारी संख्या में बावल पहुंचें और अपने नेताओं का जोरदार स्वागत करें!
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भाजपा में बढ़ती गुटबाजी: क्या अनुशासन की पहचान वाली पार्टी भी कांग्रेस के पुराने रास्ते पर?

बावल की 30 जून रैली से लेकर बड़े नेताओं के मंचों तक उभरे मतभेदों ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा

‘व्यक्ति से बड़ा संगठन’ की विचारधारा के सामने खड़ा हो रहा व्यक्तिगत खेमेबाजी का सवाल

मुख्यमंत्री, प्रदेश नेतृत्व और राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में अनुशासन पर उठने लगे गंभीर सवाल

कल होने वाली बावल रैली पर टिकी राजनीतिक नजरें, क्या पार्टी एकजुटता का दे पाएगी संदेश?

रेवाड़ी। हरियाणा सहित देश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी को लंबे समय तक एक ऐसे राजनीतिक दल के रूप में जाना जाता रहा है, जिसकी सबसे बड़ी पहचान मजबूत संगठन और कठोर अनुशासन रही है। पार्टी के भीतर मतभेद होते थे, विचारों में अंतर भी होता था, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर संगठनात्मक मर्यादा को चुनौती देना अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता था। भाजपा की राजनीतिक ताकत का सबसे बड़ा आधार यही रहा कि व्यक्ति से बड़ा संगठन और संगठन से बड़ा विचार माना गया।

मगर अब बदलते राजनीतिक घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या भाजपा भी धीरे-धीरे उसी रास्ते की ओर बढ़ रही है, जिस पर कभी कांग्रेस चली थी? क्या बढ़ती व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं, नेताओं के अलग-अलग शक्ति केंद्र और सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाली खींचतान भविष्य में भाजपा की संगठनात्मक मजबूती को प्रभावित कर सकती है?

इन सवालों का जवाब केवल राष्ट्रीय राजनीति में नहीं, बल्कि हरियाणा के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों में भी तलाशा जा रहा है। विशेष रूप से 30 जून को बावल में आयोजित ‘खेत बचाओ’ रैली के बाद और अब कल होने वाली बावल रैली को लेकर राजनीतिक हलकों की निगाहें और अधिक गहराई से इस पूरे घटनाक्रम पर टिक गई हैं।

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कांग्रेस की कमजोरी से भाजपा को क्या सबक लेना चाहिए?

कांग्रेस लंबे समय तक देश और कई राज्यों की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक ताकत रही। उसका विशाल संगठन, अनुभवी नेतृत्व और व्यापक जनाधार उसकी बड़ी ताकत थे। लेकिन समय के साथ पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी, नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई, क्षेत्रीय शक्ति केंद्रों का उभरना और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं ने संगठन को कमजोर किया।

कई बार पार्टी की सामूहिक रणनीति से ज्यादा अलग-अलग नेताओं की अपनी राजनीतिक लाइनें चर्चा में रहीं। परिणाम यह हुआ कि संगठनात्मक अनुशासन कमजोर पड़ा और मतभेद सार्वजनिक होते चले गए।

आज भाजपा के सामने भी एक अलग लेकिन कुछ हद तक मिलती-जुलती चुनौती दिखाई देने लगी है। भाजपा में पिछले वर्षों के दौरान कांग्रेस सहित अन्य दलों से बड़ी संख्या में नेता शामिल हुए। इनमें कई प्रभावशाली और जनाधार वाले चेहरे भी रहे, जिन्होंने पार्टी के विस्तार और चुनावी मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या दूसरे दलों से आए नेताओं के साथ उनकी पुरानी राजनीतिक कार्यशैली और गुटीय संस्कृति भी भाजपा के भीतर प्रवेश कर रही है? यदि ऐसा है तो यह भाजपा के पारंपरिक संगठनात्मक संस्कारों के लिए चुनौती बन सकता है।

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भाजपा की सबसे बड़ी ताकत रही है अनुशासन

भाजपा में सामान्य कार्यकर्ता से लेकर बड़े नेता तक पार्टी नेतृत्व के निर्णय को सर्वोपरि मानने की परंपरा रही है। मतभेदों को संगठन के भीतर रखना और अंतिम निर्णय के बाद सामूहिक रूप से पार्टी लाइन के साथ खड़ा होना उसकी राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा रहा है।

इसी अनुशासन के कारण भाजपा ने कई राज्यों में मजबूत संगठन खड़ा किया। पार्टी के कार्यकर्ता को यह संदेश दिया जाता रहा कि कोई भी नेता संगठन से ऊपर नहीं है।

लेकिन अब यदि बड़े नेताओं के बीच मतभेद सार्वजनिक मंचों, कार्यक्रमों, बयानों और शक्ति प्रदर्शन के रूप में दिखाई देने लगें तो उसका सीधा असर नीचे तक जाता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष या राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे शीर्ष नेतृत्व के सामने ही अनुशासन की मर्यादा टूटती दिखाई दे तो सामान्य कार्यकर्ताओं को क्या संदेश जाएगा?

कार्यकर्ता संगठन से सीखता है। यदि ऊपर के स्तर पर अलग-अलग राजनीतिक लाइनें खींची जाएंगी, तो नीचे भी कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं और खेमों के आधार पर बंट सकते हैं। यही किसी भी बड़े राजनीतिक संगठन के लिए सबसे चिंताजनक स्थिति होती है।

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30 जून की बावल रैली बनी बड़ा उदाहरण

भाजपा में अंदरूनी खींचतान को लेकर चर्चाओं का सबसे प्रमुख उदाहरण 30 जून को बावल के चौधरी चरण सिंह कृषि महाविद्यालय में आयोजित ‘खेत बचाओ’ रैली को माना जा रहा है।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान जैसे बड़े नेता मौजूद थे। इतना बड़ा सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रम होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर पार्टी के कई प्रमुख चेहरों की गैरमौजूदगी प्रदेशभर में चर्चा का विषय बनी।

स्थानीय सांसद, विधायक और संगठन से जुड़े कुछ प्रमुख पदाधिकारियों की कार्यक्रम से दूरी को राजनीतिक हलकों में केवल सामान्य अनुपस्थिति के रूप में नहीं देखा गया। इसके पीछे असंतोष, अंदरूनी खींचतान और शक्ति संतुलन की राजनीति को लेकर भी चर्चाएं होती रहीं।

सवाल यह है कि जब पार्टी के सर्वोच्च स्तर के नेता किसी कार्यक्रम में मौजूद हों, तब स्थानीय स्तर के प्रभावशाली नेताओं की अनुपस्थिति क्या केवल संयोग मानी जाए या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश भी हो सकता है?

राजनीति में अक्सर मौजूदगी से ज्यादा गैरमौजूदगी संदेश देती है। यही कारण है कि 30 जून की रैली के बाद भाजपा की अंदरूनी राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।

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कार्रवाई नहीं हुई तो क्या गया गलत संदेश?

इस पूरे घटनाक्रम का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि कार्यक्रम के बाद सार्वजनिक रूप से ऐसी कोई बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई या कड़ा संदेश दिखाई नहीं दिया, जिससे यह स्पष्ट हो कि पार्टी अनुशासन के मामले में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी।

यहीं से एक बड़ा सवाल उठता है—

यदि पार्टी के बड़े कार्यक्रम में अनुशासन और सामूहिकता की भावना को चुनौती मिलने के बाद भी कोई स्पष्ट कार्रवाई न हो, तो भविष्य में अनुशासन कैसे कायम रहेगा?

राजनीति और संगठन में कार्रवाई केवल किसी व्यक्ति को दंडित करने के लिए नहीं होती, बल्कि उसका संदेश पूरे संगठन तक जाता है। यदि संगठन समय रहते यह संदेश देने में सफल रहे कि नेता चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, पार्टी और संगठन से ऊपर कोई नहीं है, तो अनुशासन मजबूत होता है।

लेकिन यदि यह धारणा बनने लगे कि प्रभावशाली नेताओं के लिए अलग नियम हैं और सामान्य कार्यकर्ताओं के लिए अलग, तो संगठनात्मक असंतुलन पैदा हो सकता है।

भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती भी यही है कि वह अपने पुराने संगठनात्मक संस्कारों को कितना मजबूत रख पाती है।

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मतभेद और गुटबाजी में बड़ा अंतर

लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है। किसी भी राजनीतिक दल में सभी नेता हर मुद्दे पर एक जैसी राय नहीं रख सकते। विचारों में अंतर होना संगठन की कमजोरी नहीं, बल्कि स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा भी हो सकता है।

लेकिन स्थिति तब गंभीर होती है जब—

मतभेद व्यक्तिगत वर्चस्व की लड़ाई बन जाएं।

नेता संगठन की सामूहिक रणनीति से अलग अपनी राजनीतिक लाइन खींचने लगें।

कार्यकर्ता पार्टी के बजाय अलग-अलग नेताओं के खेमों में बंटने लगें।

सार्वजनिक मंच शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बन जाएं।

कार्यक्रमों में उपस्थिति और अनुपस्थिति राजनीतिक संदेश देने के लिए इस्तेमाल होने लगे।

अनुशासन तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में संगठन कमजोर दिखाई दे।

यहीं से मतभेद गुटबाजी में बदलते हैं।

और इतिहास गवाह है कि किसी भी राजनीतिक दल को बाहरी विरोधी दल से जितना नुकसान नहीं होता, कई बार उससे कहीं अधिक नुकसान उसके भीतर की लड़ाई से होता है।

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कांग्रेस से आए नेताओं पर उठ रहे सवाल

भाजपा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कांग्रेस और अन्य दलों से बड़ी संख्या में नेताओं का प्रवेश हुआ है। इनमें कई ऐसे चेहरे शामिल हैं जिनका अपने क्षेत्रों में मजबूत राजनीतिक प्रभाव रहा है।
रेवाड़ी बार चुनाव में पहली बार 6 पदों पर मुकाबला:30% पद महिलाओं के लिए रिजर्व, 11 सितंबर को मतदान; चुनावी शेड्यूल घोषित

रेवाड़ी बार के 11 सितंबर को होने वाले चुनाव का शेड्यूल घोषित कर दिया गया है। 1 व 2 सितंबर को उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। नामांकन के बाद 2 को शाम को जांच की जाएगी। 3 सितंबर को वापस लिए जा सकेंगे। करीब 2200 अधिवक्ता चुनाव में मतदान करेंगे। 11 सितंबर को 8 से 4 बजे तक मतदान होगा। मतदान के बाद उसी दिन परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

मतदान करने के लिए अपना बार एसोसिएशन या बार कौंसिल पंजाब एवं हरियाणा का जारी किया पहचान पत्र के साथ लेकर आना अनिवार्य होगा। 30% पद महिलाओं अधिवक्ताओं के लिए रिजर्व होंगे। चुनाव अधिकारी सतीश डागर,अश्विनी कुमार तिवारी, चौधरी चरण सिंह, शमशेर सिंह यादव,चंदन यादव, नरेश कुमार यादव तथा रमेश कुमार यादव ने बैठक कर कार्यक्रम की घोषणा की।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश एवं बार कौंसिल पंजाब एवं हरियाणा के निर्देशानुसार अब पदाधिकारी की संख्या में दो महिला पदाधिकारी शामिल हो गई है। कोई भी प्रत्याशी वोट लेने के लिए कार्यालय चला कर वोट की अपील के लिए सामूहिक मीटिंग तथा एकत्रीकरण नहीं करेगा। ना ही कोर्ट परिसर में या चेंबर परिसर में किसी प्रकार की प्रचार सामग्री लगाने की अनुमति होगी।

ग्रीन प्रचार अभियान के तहत प्रत्याशी अपना वोट मांगेंगे। यदि प्रत्याशी ऐसा नहीं करते हैं, तो शिकायत मिलने पर उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रत्याशियों की फीस निर्धारण के साथ ही कुछ नियम भी जारी किए गए हैं।

इस बार 5 की जगह 6 पदों का चुनाव

पहली बार 5 की जगह 6 पदों के लिए चुनाव होगा। प्रधान के अलावा उप प्रधान (सामान्य), उप प्रधान (महिला), सचिव, सह सचिव (महिला) तथा कोषाध्यक्ष के लिए मतदान होगा। जिसमें जिला बार एसोसिएशन के करीब 2200 अधिवक्ता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
रेवाड़ी में आईजीयू के पास तीन युवकों पर जानलेवा हमला, दो की मौत

 इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर के पास छात्रों के दो गुटों के बीच चल रही पुरानी रंजिश खूनी संघर्ष में बदल गई। गांव गोकलपुर के पास तीन युवकों पर लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से जानलेवा हमला कर दिया गया। हमले में दो युवको की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।

मृतक की पहचान रेवाड़ी के गांव मांढैया निवासी 26 वर्षीय जतिन व निंगानीयावास निवासी हिमेश के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि हमले के बाद जतिन ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था तथा हिमेश ने कुछ देर बाद। जतिन कंपनी में नौकरी करता था और दोस्तो के बुलाने पर झगड़े में पहुंचा था। 

गांव बुढाना निवासी यशपाल को भी गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार, छात्रों के दो गुटों के बीच लंबे समय से रंजिश चली आ रही थी। इसी रंजिश के चलते वारदात को अंजाम दिए जाने की बात सामने आ रही है। घटना के दौरान हवाई फायर किए जाने की सूचना भी प्राथमिक तौर पर मिली है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हमलावरों की पहचान व गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

फिलहाल वारदात के पीछे की पूरी वजह और हमलावरों की संख्या को लेकर पुलिस जांच जारी है।
रेवाड़ी में डेढ़ माह बाद ठेकेदार सहित 3 गिरफ्तार:हंस नगर में गैस के कारण हुआ था ब्लास्ट; पिता-पुत्री की हो चुकी मौत

मॉडल टाउन थाना की सेक्टर-3 चौकी ने बेटी तन्नु की मौत के बाद आईजीएल के खिलाफ केस दर्ज किया था। दो दिन बाद पति सतबीर चौहान मामले की जांच सेक्टर-3 चौकी इंचार्ज राकेश कुमार के पास थे। जिन्हें बाद में एसएचओ सदर लगा दिया। सदर थाना में पोस्टिंग के बाद भी मामले की जांच उन्हीं के पास रही।

लोकल कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सदर एसएचओ ने ठेकेदार (प्रोजेक्ट मैनेजर) राहुल, सुपरवाइजर रणजीत सिंह व एक अन्य संदीप को गिरफ्तार कर लिया।
रेवाड़ी में रोजाना 25–30 डॉग बाइट के मामले, क्या नगर परिषद आम लोगों की जान जाने का इंतजार कर रही है? — अमित ग्रोवर

रेवाड़ी। रेवाड़ी शहर में आवारा कुत्तों और आवारा पशुओं की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। समाजसेवी अमित ग्रोवर ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहर में हालात ऐसे हो गए हैं कि ऐसा लगता है जैसे आम आदमी की सुरक्षा के बजाय उसकी जान जाने का इंतजार किया जा रहा है।

अमित ग्रोवर ने कहा कि सरकारी अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 25 से 30 डॉग बाइट के मामले रेवाड़ी शहर से ही सामने आ रहे हैं। यह केवल शहर का आंकड़ा है, जबकि पूरे जिले में कुत्तों के काटने के मामलों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और नगर परिषद को इसे सामान्य समस्या समझने की बजाय गंभीर जनसुरक्षा का विषय मानना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों के साथ-साथ गाय और बैल जैसे आवारा पशुओं के कारण भी सड़क दुर्घटनाओं और जान-माल के नुकसान का खतरा लगातार बना हुआ है। हाल के मामलों में आवारा पशुओं से संबंधित घटनाओं में सात लोगों की मौत होने की बात सामने आई है, ऐसे में प्रशासन को तत्काल प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

35 लाख रुपये के कैटल फ्री बजट पर भी उठे सवाल

अमित ग्रोवर ने कहा कि नगर परिषद के पास आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए लगभग 35 लाख रुपये का वार्षिक कैटल फ्री बजट बताया जाता है। ऐसे में जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि इस बजट में से कितना पैसा वास्तव में खर्च हुआ, किस मद में खर्च हुआ और उसका जमीनी स्तर पर क्या परिणाम निकला।

उन्होंने मांग की कि नगर परिषद इस बजट का पूरा आय-व्यय विवरण सार्वजनिक करे, ताकि जनता को पता चल सके कि आवारा पशुओं की समस्या पर कितना पैसा खर्च किया गया और उससे कितने पशुओं को सुरक्षित तरीके से हटाया गया।

“लोगों की जान से खिलवाड़ बंद हो”

अमित ग्रोवर ने कहा कि प्रशासन का पहला दायित्व है कि आम नागरिक सुरक्षित माहौल में अपने घर से बाहर निकल सके, अपना काम-धंधा कर सके और बिना किसी डर के सड़क पर चल सके। लेकिन यदि रोजाना दर्जनों लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं और आवारा पशुओं के कारण जानलेवा दुर्घटनाएं हो रही हैं, तो यह प्रशासन और नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने नगर परिषद और जिला प्रशासन से मांग की कि:

1. रेवाड़ी शहर में आवारा कुत्तों की समस्या पर तत्काल विशेष अभियान चलाया जाए।
2. डॉग बाइट के रोजाना आने वाले मामलों का वार्डवार रिकॉर्ड तैयार किया जाए।
3. आवारा गाय-बैलों को सुरक्षित तरीके से हटाने और उनके प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था की जाए।
4. 35 लाख रुपये के कैटल फ्री बजट का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए।
5. शहर के संवेदनशील स्थानों और बाजारों में विशेष निगरानी एवं कार्रवाई की जाए।
6. सरकारी अस्पताल में आने वाले डॉग बाइट मामलों का नियमित आंकड़ा सार्वजनिक किया जाए।

अमित ग्रोवर ने कहा कि जनता को आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई चाहिए। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि की जिम्मेदारी किसकी होगी, इसका जवाब प्रशासन और नगर परिषद को देना पड़ेगा।
रेवाड़ी प्रशासन की चेतावनी के बावजूद पशुपालकों की दादागिरी:कर्मचारियों से जबरन छुड़ा ले जा रहे पशु; 2 मौताें के बाद भी बेखौफ

रेवाड़ी में बेसहारा पशुओं की समस्या पर प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद स्थिति काबू में आती नहीं दिख रही है। पांच दिन में पशुओं के हमले से दो लोगों की मौत और प्रशासन की चेतावनी के बाद भी कुछ पशुपालक बेखौफ नजर आ रहे हैं।

पशु पकड़ने वाली टीम के कर्मचारियों के सामने से ही वैन का दरवाजा खोलकर पशुओं को छुड़ाकर ले जाने के मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं में महिलाएं भी पशु छुड़ाने में शामिल नजर आईं। पिछले दो दिनों में ऐसे 2 मामले सामने आ चुके हैं।

बुधवार को कर्मचारियों ने अभियान चलाकर करीब 12 पशु पकड़े। इनमें से एक गाय को पशुपालक वैन में चढ़ने के बाद छुड़ाकर ले गए। वीरवार को भी पशुपालकों ने कर्मचारियों को धमकाकर वैन से दूर किया और उसका दरवाजा खोलकर पशुओं को उतार लिया।

कर्मचारियों के सामने दिखी दादागिरी

पशु छुड़ाने के दौरान कुछ पशुपालक बेखौफ नजर आए। वे वैन के पास पहुंचे और कर्मचारियों की मौजूदगी में रस्सियां खोलकर पशुओं को अपने साथ ले गए। इस दौरान कर्मचारी उन्हें रोकने में असहाय नजर आए। लगातार ऐसी घटनाओं के चलते पशु पकड़ने वाले कर्मचारियों में भी डर और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

4 दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं

ठेकेदार देवेंद्र की शिकायत पर शहर थाना पुलिस ने 17 अगस्त को गुजरवाड़ा निवासी इंद्र गुर्जर, मलखान गुर्जर और फरसा गुर्जर के खिलाफ केस दर्ज किया था। हालांकि, चार दिन बीतने के बाद भी तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। वहीं कैप्टन जगराम यादव की मौत के मामले में भी 15 दिन बाद तक केस दर्ज नहीं होने का आरोप है।
रेवाड़ी में उपभोक्ता आयोग ने इंस्टीटयूट पर लगाया जुर्माना:छात्र को गलत जानकारी देकर दिया एडमिशन, ब्याज समेत फीस वापस करनी होगी

रेवाड़ी में उपभोक्ता आयोग ने छात्र को भ्रमित करने वाले इंस्टीट्यूट पर 15 हजार रुपए जुर्माना लगाया है। आयोग ने छात्र की फीस 9 प्रतिशत ब्याज सहित वापस करने के भी आदेश दिए हैं। इस फैसले से भ्रमित कर बच्चों को अपने संस्थानों में दाखिला करने वालों के लिए बड़ी नसीहत मानी जा रही है।

रेवाड़ी की एम्प्लाइज कॉलोनी निवासी छात्र दीपक यादव ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी। जिसमें बताया कि उसने 2025-26 में शहर के डॉट इंस्टिट्यूट में दाखिला करवाया। दाखिले के समय इंस्टीट्यूट ने वादा किया कि उसके पास आईआईटीएन पास टीचर्स हैं और बेहतरीन शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं।

एडमिशन लेने के बाद पाया कि उनके पास वादे के अनुसार आईआईटीएन टीचर्स मौजूद नहीं थे। इंस्टिट्यूट के कमरे भी बच्चों की शिक्षा के लिए उपयुक्त नहीं थे। आग लगने और किसी प्राकृतिक आपदा के समय बचाव के लिए उपकरण व सुविधा भी नहीं थी।

मांगने पर भी वापस नहीं की फीस

शिकायत में बताया कि इंस्टीट्यूट में शिक्षा के नियमों की अनदेखी मिली। शिकायतकर्ता ने अपने बेटे को 10 से 15 दिन के बाद ही अपना नाम वापस ले लिया और फीस वापसी मांगी। कई बार मांगने के बाद भी जब फीस वापस नहीं की गई तो जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत पत्र दायर किया।

जिला उपभोक्ता आयोग के सदस्य राजेंद्र प्रसाद एवं श्रीनिवास ने अपने संयुक्त निर्णय में पाया कि शिकायतकर्ता की शिकायत संस्थान को नोटिस भेजा, लेकिन वह आयोग के समक्ष पेश नहीं हुआ। जिस पर आयोग ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए शिकायतकर्ता की जमा कराई गई ₹60 हजार फीस 9 फीसदी ब्याज सहित वापस करने के आदेश दिए हैं।

इसके साथ ही आयोग ने मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए ₹15 हजार का जुर्माना अलग से लगाया है। यह जुर्माना राशि 30 दिन के भीतर अदा करनी होगी।
रेवाड़ी प्रॉपर्टी डीलर मर्डर केस, पुलिस पर लगे आरोप:आईजी से मिलने पहुंचे परिजन, बोले- गिरफ्तारी से पहले नूंह भेजा गया मामला, सीएम से मिलेंगे

रेवाड़ी में प्रॉपर्टी डीलर पवन हत्याकांड मामले में मृतक के परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि हत्या आरोपियों के दबाव में पूरा सिस्टम काम कर रहा है और केस को रेवाड़ी से नूंह ट्रांसफर करने में बड़ा खेल हुआ है।

जानकारी के अनुसार, लगभग दो महीने पहले रेवाड़ी के कर्नल राम सिंह चौक स्थित एक प्रॉपर्टी डीलर के कार्यालय में नारनौल निवासी पवन की गोली मारकर हत्या कर कर दी गई थी। रेवाड़ी पुलिस ने एलिगेंट सिटी निवासी सज्जन सिंह, प्रॉपर्टी डीलर रामकिशन और महेश सहित तीन लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। सज्जन सिंह के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है।

परिजन बोले- रेवाड़ी से नूंह ट्रांसफर किया गया केस

बुधवार को आईजी आफिस पहुंचे मृतक के भाई रोहित ने बताया कि पवन प्रॉपर्टी का काम करता था और आरोपियों के साथ उसका 2-3 करोड़ रुपए का लेन-देन था। उन्होंने कहा कि आरोपियों ने 23 जून को पवन को उनके कार्यालय में गोली मारी थी, जिसके बाद 26 जून को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

मृतक पवन के भाई रोहित और परिवार के अन्य सदस्य साउथ रेंज के आईजी से मिलने पहुंचे। रोहित ने आरोप लगाया कि जब रेवाड़ी पुलिस की कार्रवाई से परिवार संतुष्ट था और आरोपी की गिरफ्तारी के करीब पहुंच चुकी थी, तभी केस को रेवाड़ी से नूंह ट्रांसफर कर दिया गया।

केस ट्रांसफर करने में बड़ा खेल करने का आरोप

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि आरोपी राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं, इसलिए केस ट्रांसफर में बड़ा खेल हुआ है। रोहित ने लेन-देन की आशंका से भी इनकार नहीं किया। परिवार ने आईजी कार्यालय पहुंचकर आरोपियों के दबाव में सिस्टम के काम करने और केस ट्रांसफर की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।

परिवार का कहना है कि अब उन्हें न्याय की उम्मीद खत्म हो गई है और एकमात्र सहारा मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने बताया कि आने वाली 23 अगस्त को रेवाड़ी के बावल आ रहे मुख्यमंत्री से मिलकर वे पूरे मामले का खुलासा करेंगे।

इस मामले में आईजी साउथ रेंज रेवाड़ी से उनके दफ्तर में मिलने गए तो कोई जवाब नहीं मिला।
5 दिन में 2 मौतों के बाद पुलिस का एक्शन:3 पशुपालकों के खिलाफ केस दर्ज; रविवार को भी छुड़वाए थे 4 पशु

रविवार को दोबारा अभियान शुरू होने पर पशुपालकों ने कर्मचारियों से 4 पशुओं को मुक्त करवा लिया था। जिससे प्रशासन की सख्ती पर भी सवाल उठने शुरू हो गए थे।

मारपीट करने और बाधा डालने का आरोप

डीएसपी ने मामले बताया कि गांव धवाना निवासी देवेंद्र ने पुलिस को शिकायत दी। जिसमें बताया कि उसने नगर परिषद से शहर में आवारा पशुओं को पकड़ने का वर्क ऑर्डर (ठेका) लिया हुआ है। पशुराम कॉलोनी में उनका सुनारिया ग्रुप के नाम से कार्यालय है। उन्होंने बताया कि महेश यादव अपनी टीम व स्टाफ के साथ मोहल्ला गुर्जरवाड़ा में आवारा पशुओं को पकड़ने गए थे। जब टीम ने वहां आवारा घूम रही गायों को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू की, तो स्थानीय निवासी इन्द्र गुर्जर, मलखान गुर्जर और फरसा गुर्जर (सभी निवासी मोहल्ला गुज्जरवाड़ा) ने प्रशासनिक कार्य में बाधा डालते हुए उनकी टीम के साथ गाली-गलौज की और मारपीट तथा हाथापाई पर उतारू हो गए।

आरोपी जबरदस्ती पकड़ी गई गायों की रस्सियां खोलकर छुड़ा ले जाते है और विरोध करने पर टीम के सदस्यों को जान से मारने की धमकियां देते है।
रेवाड़ी  देश की आजादी के 79 वर्ष बाद भी शहर के लोगों को समस्याओं से पूरी तरह आजादी नहीं मिल पाई है, शहर में टूटी सड़कें,जलभराव, बेसहारा पशु, पार्किंग आवारा कुत्तों  के हमले की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं   बार-बार की शिकायतों और लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है
दैनिक भास्कर में आज की सुर्खियां
रेवाड़ी में ATM तोड़ने पहुंची 2 युवतियां, VIDEO:बाइक पर आईं, एक बूथ में घुसी, दूसरी ने दिया पहरा; CCTV में कैद हुईं

रेवाड़ी जिले के धारूहेड़ा में दो लड़कियों के एटीएम तोड़ने का मामला सामने आया है। जिसका सीसीटीवी भी सामने आया है। जिसमें एक लड़की किसी नुकली चीज से एटीएम मशीन के साथ छेड़छाड़ कर रही है और दूसरी पहरा दे रही है। मशीन से छेड़छाड़ कर करीब 37 मिनट बाद दोबारा आती है और पैसे निकालने का प्रयास करती है। जिसमें वे सफल नहीं हो पाती। दोनों बाइक पर सवार होकर भी आती दिखाई दे रही हैं।

घटना 10 अगस्त को बस स्टैंड के पास लगे हिताची मनी सपॉट एटीएम की है। एटीएम की देखरेख करने वाली एजेंसी ने सीसीटीवी के साथ इसकी शिकायत धारूहेड़ा सेक्टर-6 थाना पुलिस को दे दी है।
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अवैध कॉलोनी में चार एकड़ में बने निर्माण को गिराया

रेवाड़ी। जिला नगर योजनाकार कार्यालय की ओर से मंगलवार को नियंत्रित क्षेत्र और शहरी क्षेत्र में विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई। कोनसीवास में करीब चार एकड़ भूमि पर बिना अनुमति विकसित की जा रही अवैध कॉलोनी में तीन डीपीसी, चार परिक्रमा चारदीवारी, एक निर्माण और कच्चे रास्तों के नेटवर्क को ध्वस्त किया गया।

इसके अलावा बिना अनुमति विकसित किए जा रहे एक अन्य अवैध निर्माण पर भी कार्रवाई की गई। जिला प्रशासन की ओर से नियुक्त ड्यूटी मजिस्ट्रेट की निगरानी में कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

जिला नगर योजनाकार नरेंद्र नैन ने आमजन से अपील की है कि नियंत्रित या शहरी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण न करें। उन्होंने कहा कि प्लॉट खरीदने से पहले संबंधित कॉलोनी की वैधता के बारे में जिला नगर योजनाकार कार्यालय से जानकारी अवश्य लें, ताकि विभागीय कार्रवाई और आर्थिक नुकसान से बचा जा सके

उन्होंने बताया कि अवैध कॉलोनी काटने वाले प्रॉपर्टी डीलर लोगों को झूठे सब्जबाग दिखाकर खाली जमीन पर प्लॉट बेच देते हैं। बाद में जब वहां अवैध निर्माण शुरू होता है तो प्रशासन की कार्रवाई होती है और प्लॉट खरीदने वाले खुद को ठगा महसूस करते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी अवैध कॉलोनी में प्लॉट न खरीदें। प्लॉट खरीदने से पहले कार्यालय में कार्यदिवस के दौरान कॉलोनी की वैधता की जांच की जा सकती है।
रेवाड़ी में चोरों ने 3 दुकानों के ताले तोड़े:CSC सेंटर से 60 हजार कैश चोरी; गोकलगढ़ में भी वारदात

रेवाड़ी में सोमवार की रात चोरों ने लिसाना और गोकलगढ़ में दुकानों को निशाना बनाया। लिसाना स्थित सीएससी सेंटर से चोर करीब 60 हजार रुपए नकद और सामान चोरी कर ले गए। वहीं, गोकलगढ़ में भी दो दुकानों के ताले तोड़े गए, हालांकि वहां से चोरी होने की सूचना नहीं है। शिकायत के बाद सदर थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

गांव नयागांव निवासी मोनू राठी ने बताया कि उसने लिसाना में किराए पर दुकान लेकर सीएससी सेंटर शुरू किया हुआ है। सोमवार शाम को वह दुकान बंद करके घर चला गया था। मंगलवार सुबह दुकान पर पहुंचा तो मुख्य ताले टूटे मिले। अंदर सामान बिखरा पड़ा था।

जांच करने पर सीएससी सेंटर से करीब 60 हजार रुपए नकद और कुछ कीमती सामान गायब मिला। मोनू ने बताया कि दुकान में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, लेकिन वे काम नहीं कर रहे थे।

गोकलगढ़ में दो दुकानों के ताले टूटे

गोकलगढ़ में भी चोरों ने दो दुकानों के ताले तोड़े। हालांकि, पुलिस के अनुसार आरोपी यहां चोरी करने में सफल नहीं हो सके। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की।

अज्ञात चोरों पर केस दर्ज

सदर थाना प्रभारी राकेश कुमार ने बताया कि लिसाना के सीएससी सेंटर में चोरी हुई है, जबकि गोकलगढ़ में दुकानों के ताले टूटे मिले हैं। शिकायत के आधार पर अज्ञात चोरों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान का प्रयास कर रही है।
रेवाड़ी में गाय की टक्कर से रिटायर्ड कैप्टन की मौत-:भिड़ते हुए 2 गाय स्कूटी के ऊपर चढ़ी; पार्षद के भाई ने भी जान गंवाई,नगर परिषद का 2 हजार गोवंश पकड़ने का दावा,करीब 37 लाख रुपए खर्च करने के बाद भी सड़क से बाजार और गलियों से चौक चौरोहो तक हर जगह गोवंश के झुंड देखे जा सकते हैं
रेवाड़ी में गाय की टक्कर से रिटायर्ड कैप्टन की मौत-:भिड़ते हुए 2 गाय स्कूटी के ऊपर चढ़ी; पार्षद के भाई ने भी जान गंवाई,नगर परिषद का 2 हजार गोवंश पकड़ने का दावा,करीब 37 लाख रुपए खर्च करने के बाद भी सड़क से बाजार और गलियों से चौक चौरोहो तक हर जगह गोवंश के झुंड देखे जा सकते हैं

रेवाड़ी के सेक्टर-4 में गाय की चपेट में आने से रिटायर्ड कैप्टन की मौत हो गई। रिटायर्ड कैप्टन बाजार से सब्जी लेने के बाद स्कूटी से घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में गाय ने उसे टक्कर मार दी।

वहीं, आज सुबह गाय के हमले में पार्षद के भाई की भी मौत हो गई। वो सुबह सैर के लिए घर से निकले थे।

सब्जी लेकर घर लौटते समय हादसा

रिटायर्ड कैप्टन जगराम यादव की पत्नी नायराणी देवी ने बताया कि वह अपने पति और पोते के साथ सेक्टर-4 में रह रहे है। 5 अगस्त की शाम मेरे पति रिटायर कैप्टन जगराम यादव (80) स्कूटी पर सब्जी लेने गए थे। सब्जी लेकर वापस आते समय धक्का बस्ती में एक गाय ने स्कूटी को टक्कर मार दी।

उन्होंने बताया कि उनके एक बेटे की कुछ साल पहले मौत हो गई थी। पोता अब हमारे पास रह रहा है। दूसरा बेटा बाहर काम करता है और परिवार के साथ बाहर रहता है।

गाय के हमले में पार्षद के भाई की भी मौत

रेवाड़ी में मंगलवार को माता चौक के पास गाय के हमले से बुजुर्ग दुकानदार की मौत हो गई। माता चौक निवासी प्रताप सिंह यादव (75) सुबह सैर के लिए घुमने जा रहे थे। इसी दौरान माता चौक के पास गाय ने हमला कर दिया। आसपास के लोगों ने हमले से बचाकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

नगर पार्षद निहाल सिंह प्रताप सिंह के चचेरे भाई हैं।
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नगर परिषद रेवाड़ी की सफाई व्यवस्था और ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं,
ऑनलाइन शिकायत या सिर्फ ऑनलाइन दिखावा....?

डेढ़ माह बाद भी नाला साफ नहीं, स्वच्छता ऐप पर शिकायत अभी तक “On the Job” — नगर परिषद की ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था पर सवाल*

रेवाड़ी। नगर परिषद रेवाड़ी की सफाई व्यवस्था और ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अमित ग्रोवर द्वारा स्वच्छता ऐप पर 23 जून 2026 को नाला साफ नहीं होने और ओवरफ्लो होने की शिकायत दर्ज करवाई गई थी।
शिकायत के साथ मौके की तस्वीर और लोकेशन भी अपलोड की गई थी। शिकायत का ID: W0186150C34381226 है। शिकायत में संबंधित अधिकारी के रूप में जेई विजय पाल का नाम भी दर्ज है।
लेकिन शिकायत दर्ज हुए लगभग डेढ़ माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत अभी भी “On the Job” दिखाई दे रही है। वहीं मौके की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर शिकायत का वास्तविक समाधान कब हुआ या कब होगा।
ऑनलाइन शिकायत या सिर्फ ऑनलाइन दिखावा?
स्वच्छता ऐप पर शिकायत दर्ज करवाने का उद्देश्य यही है कि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान हो। लेकिन जब एक शिकायत डेढ़ माह तक “On the Job” दिखाई देती रहे, तो नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अमित ग्रोवर, सामाजिक कार्यकर्ता, ने कहा कि यदि नगर परिषद की ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था में शिकायत दर्ज होने के बाद केवल स्टेटस ही चलता रहे और जमीन पर समस्या बनी रहे, तो ऐसी व्यवस्था का आम नागरिक को क्या लाभ?
उन्होंने कहा कि “ऑनलाइन शिकायत का मतलब केवल ऑनलाइन स्टेटस बदलना नहीं, बल्कि जमीन पर समस्या का वास्तविक समाधान करना है।”
नगर परिषद से जवाब की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता अमित ग्रोवर ने नगर परिषद से मांग की है कि—
23 जून को दर्ज शिकायत का अब तक समाधान क्यों नहीं हुआ?
शिकायत अभी तक “On the Job” क्यों दिखाई जा रही है?
संबंधित जेई और अधिकारियों ने मौके पर क्या कार्रवाई की?
यदि शिकायत का समाधान हो चुका है तो उसकी मौके की प्रमाणित तस्वीर और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
यदि समाधान नहीं हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ जवाबदेही तय कर तत्काल नाला साफ करवाया जाए।
“हवाई दावों से नहीं, जमीन पर काम से साफ होगा रेवाड़ी”
अमित ग्रोवर, सामाजिक कार्यकर्ता, ने कहा कि नगर परिषद की ऑनलाइन व्यवस्था के दावों की असली परीक्षा ऐप पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले काम से होगी।
“फोटो ऑनलाइन, लोकेशन ऑनलाइन, शिकायत ऑनलाइन और स्टेटस भी ऑनलाइन—लेकिन अगर नाला जमीन पर गंदा ही पड़ा रहे तो यह ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था केवल दिखावा बनकर रह जाएगी।”
उन्होंने नगर परिषद प्रशासन से मांग की कि स्वच्छता ऐप पर दर्ज शिकायतों का केवल ऑनलाइन निस्तारण दिखाने के बजाय मौके पर वास्तविक समाधान सुनिश्चित किया जाए।
रेवाड़ी के ब्रास मार्केट में ढाई करोड़ की लागत से बनी सड़क दो महीने में ही खराब हो गई, जिससे भ्रष्टाचार उजागर हुआ। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने ठेकेदार से रिकवरी और उसे ब्लैकलिस्ट करने के आदेश दिए हैं, जबकि अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई......?

सवाल यह भी है कि स्थानीय स्तर पर जिस लैब से जांच कराई गई वह सरकारी मान्यता प्राप्त है, उसके बावजूद लैब में गुणवत्ता कैसे ठीक दिखा दी गई.....?
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