
मानवता और वैष्णवता की शिक्षा देती है श्रीमद् भागवत कथा : आचार्य मृदुल कृष्ण जी महाराज
खरसिया। नगर के अजीत सिंह नगर, कन्या भवन के पास गर्ग परिवार (बहु झोलरी वाले) द्वारा आयोजित विशाल श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा प्रारंभ से पूर्व एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में माताओं-बहनों ने हर्षोल्लास के साथ भाग लेकर धर्ममय वातावरण बना दिया।
प्रथम दिवस की कथा का शुभारंभ करते हुए कथा व्यास परम श्रद्धेय आचार्य गोस्वामी श्री मृदुल कृष्ण जी महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का प्रत्येक प्रसंग हमें मानवता की शिक्षा देता है। हमारा जीवन किस मार्ग पर चले कि उसे अपने लक्ष्य की प्राप्ति हो, इसका बोध भागवत से ही होता है।
आचार्य श्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा मानव को केवल मानवता ही नहीं, बल्कि मानवता के साथ-साथ वैष्णवता और भगवत्ता की शिक्षा देकर उसका सच्चा पात्र भी बनाती है।
महापुराण के महात्म्य का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि महात्म्य के प्रारंभ में ही श्री सूत जी महाराज ने श्री शुकदेव जी की वंदना करते हुए लिखा है कि शुकदेव जी ने जन्म लेते ही घर से वन की राह पकड़ ली और भगवान की आराधना में ऐसे लीन हो गए कि उन्हें भागवत और भगवान दोनों प्राप्त हो गए।
उन्होंने कहा कि शौनकादि 88 हजार ऋषियों ने सूत जी से प्रार्थना की थी कि आप हमें ऐसी कथा सुनाएं जो मानव के हृदय के अंधकार को करोड़ों सूर्यों के समान दूर कर सके। क्योंकि मानव के हृदय में इतना अंधकार है जितना कहीं नहीं है। इस पर सूत जी ने कहा कि आपका प्रश्न संसार के कल्याण के लिए है, मैं आपको ऐसी कथा सुनाऊंगा जिससे संसार से निवृत्ति और परमात्मा में प्रवृत्ति होगी, और यही मानव जीवन का परम लक्ष्य है।
कथा के दौरान "बूटी हरी के नाम की सबको पिला के पी" भजन पर पूरा पंडाल झूम उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।