
बिहार सरकार ने राज्य के अनुदानित मदरसों की कार्यप्रणाली और शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए व्यापक जांच का फैसला किया है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलाधिकारियों (DM) और जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को निर्देश दिया है कि वे गैर-सरकारी मान्यता प्राप्त एवं वेतनानुदान प्राप्त मदरसों का भौतिक सत्यापन कराएं।
शिक्षा विभाग के सचिव Vinod Singh Gunjiyal द्वारा जारी निर्देश के अनुसार जांच में निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
मदरसों में शिक्षण कार्य नियमित रूप से हो रहा है या नहीं।
शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति का सत्यापन।
छात्र-छात्राओं की वास्तविक संख्या और उपस्थिति।
भवन, कक्षाओं, शौचालय, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति।
सरकार से मिलने वाले अनुदान और संसाधनों के उपयोग की समीक्षा।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं का आकलन।
सरकार का उद्देश्य
शिक्षा विभाग का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसी संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाले मदरसों में छात्रों को बेहतर शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
संभावित प्रभाव
मदरसों में उपस्थिति और शैक्षणिक गतिविधियों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
अनुदान प्राप्त संस्थानों की जवाबदेही बढ़ेगी।
शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए नीति-निर्माण में मदद मिल सकती है।
यदि कहीं अनियमितताएं मिलती हैं तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
बिहार में मान्यता प्राप्त और अनुदानित मदरसे राज्य की शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं। सरकार का यह कदम शिक्षा संस्थानों की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Chapra, Saran | Jun 2, 2026