जर्जर बोलेरो बनी जी का जंजालः बरौनी थाने की गश्ती गाड़ी का बुरा हाल, कभी भी थम सकते हैं पुलिस के पहिए
संवाददाता मुकेश कुमार
बरौनी थाना अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस पेट्रोलिंग को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन बरौनी थाने की सुरक्षा व्यवस्था खुद भगवान भरोसे चल रही है। थाना क्षेत्र में रात-दिन धूल फांकती गश्ती की गाड़ी (बोलेरो) इतनी जर्जर हो चुकी है कि अब इसमें और बैलगाड़ी में कोई खास फर्क नहीं रह गया है।चलते-चलते बंद होना तय, 20 किमी का सफर बना चुनौतीबरौनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिसकर्मियों को रोजाना लगभग 20 किलोमीटर की गश्ती इसी खटारा गाड़ी से करनी पड़ती है। गाड़ी की हालत ऐसी है कि सड़क पर गश्ती के दौरान यह कब और कहां बंद हो जाए, इसका कोई भरोसा नहीं। आए दिन यह गश्ती वाहन हफ्ते में चार-चार दिनों तक बंद पड़ा रहता है और थानापरिसर के उत्तरी गेट के पास खड़ा अपनी बदहाली पर आंसू बहाता दिखता है।
मरम्मत के 10 दिन बाद फिर वही कहानी ऐसा नहीं है कि गाड़ी को ठीक नहीं कराया जाता, लेकिन मरम्मत के महज 10 से 15 दिनों के भीतर ही इसकी स्थिति फिर से जस की तस हो जाती है। बार-बार बनने के बावजूद यह वाहन पुलिस गश्ती के बजाय गैरेज का चक्कर लगाने के लिए ज्यादा मशहूर हो चुका है।मजबूरी में पैदल गश्ती, अपराधियों के हौसले बुलंद होने का डर जहाँ जिले के अन्य थानों में बेहतर और सुचारू वाहन उपलब्ध हैं, वहीं बरौनी थाने के अधिकारियों और जवानों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। गाड़ी के अक्सर खराब रहने के कारण कर्तव्यनिष्ठ पुलिस पदाधिकारी और जवान मजबूरी में पैदल ही गश्ती पर निकल रहे हैं। ऐसे में आपातकालीन स्थिति में तुरंत घटनास्थल पर पहुँचना पुलिस के लिए नामुमकिन साबित हो रहा है, जिससे इलाके में अपराध नियंत्रण पर भी सवालिया६
बुलंद होने का डर
जहाँ जिले के अन्य थानों में बेहतर और सुचारू वाहन उपलब्ध हैं, वहीं बरौनी थाने के अधिकारियों और जवानों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। गाड़ी के अक्सर खराब रहने के कारण कर्तव्यनिष्ठ पुलिस पदाधिकारी और जवान मजबूरी में पैदल ही गश्ती पर निकल रहे हैं। ऐसे में आपातकालीन स्थिति में तुरंत घटनास्थल पर पहुँचना पुलिस के लिए नामुमकिन साबित हो रहा है, जिससे इलाके में अपराध नियंत्रण पर भी सवालिया निशान उठ रहे हैंस्थानीय स्तर पर अब यह मांग उठने लगी है कि बरौनी थाने को जल्द से जल्द एक नया और क्रियाशील वाहन उपलब्ध कराया जाए, ताकि पुलिसकर्मी बिना किसी तकनीकी बाधा के अपनी ड्यूटी निभा सकें और क्षेत्र की जनता खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।