
मानसून में देरी की संभावना, कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दी जरूरी सलाह
डिंडौरी जिले में मानसून के देरी से पहुंचने की संभावना को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र डिंडौरी के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए खेती की तैयारी समय रहते सुनिश्चित करें, ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे बुवाई के लिए उत्तम गुणवत्ता के बीज एवं अन्य आवश्यक कृषि आदान सामग्री पहले से उपलब्ध रखें। साथ ही कम से कम 100 मिमी (तीन से चार इंच) वर्षा होने के बाद ही बुवाई शुरू करें।
बीजों को रोगों से बचाने के लिए फफूंदनाशक दवाओं से उपचारित करने की सलाह दी गई है। इसके लिए कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यू.पी. 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज अथवा कार्बॉक्सिन 37.5 प्रतिशत $ थायरम 37.5 प्रतिशत डब्ल्यू.एस. 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करने को कहा गया है।
विशेषज्ञों ने कहा है कि फसलों की बुवाई कतारों में करना अधिक लाभकारी रहेगा तथा बुवाई के समय बीज के साथ रासायनिक उर्वरकों को मिलाकर उपयोग न करें। यदि मानसून 30 जून 2026 तक पहुंच जाता है, तो किसानों को धान की किस्में जेआर-206, जेआर-81 और एमटीयू-1010, सोयाबीन की किस्में जेएस-95-60, जेएस-97-52 एवं एनआरसी-37, मक्का की किस्में जेएम-421 और जेएम-218 तथा कोदो की किस्में जेके-439 एवं जेके-48 की बुवाई करने की सलाह दी गई है।
वहीं 15 जुलाई 2026 के बाद बुवाई की स्थिति बनने पर किसानों को धान की आईआर-64, जेआर-201, दंतेश्वरी, कोदो की जेके-439, जेके-41, जेके-137, मक्का की जेएम-218, जेएम-12 तथा कुटकी की डिंडौरी-1, जीके-8, सीओ-2 और पीआरसी-3 प्रजातियों की बुवाई करने की सलाह दी गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से मौसम आधारित खेती अपनाने और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार कार्य करने की अपील की है, ताकि कम वर्षा की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके।
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