
*इन्दौरी मालवी आलू को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने के बाद निर्यात को मिला बढ़ावा*
इंदौर, 22 जून 2026
इंदौर संभाग सहित इन्दौर जिले में रबी मौसम में सर्वाधिक क्षेत्रफल में बोई जाने वाली और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में चयनित उद्यानिकी फसल इन्दौरी मालवी आलू को अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान मिल गई है। भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त होने से इन्दौरी मालवी आलू को अब निर्यात के क्षेत्र में बढ़ावा मिला है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से प्रदेश स्तर पर सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर विशिष्ट उत्पादों को चिन्हित कर उन्हें जीआई टैग दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करने के निर्देश दिये गये। इसी क्रम में शासन-प्रशासन के विशेष प्रयासों के चलते यह परिणाम हमारे सामने आया है। वर्तमान में जिले में लगभग 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आलू का उत्पादन किया जा रहा है, इसकी खेती से लगभग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 30 से 35 हजार किसान जुडे़ हुए है, जीआई टैग मिलने के बाद से आलू फसल के उत्पादन क्षेत्र में वृद्धि और निर्यात को बढ़ावा मिलने से बेहतर मूल्य मिलने से किसानों की आय बढ़ने की संभावना बढे़गी।
उप संचालक उद्यान श्री त्रिलोकचंद्र वास्कले द्वारा बताया गया कि इन्दौर जिले की विशिष्ट जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और किसानों की उन्नत तकनीकी खेती से आलू उत्पाद को खास पहचान दिलाई है। इन्दौरी मालवी आलू में कम चीनी और स्टार्च के कारण इनके चिप्स और फ्रेंच प्राईस तलने पर काले और लाल नहीं होता है। शर्करा की मात्रा कम होने से आलू चिप्स को तलने पर चिप्स का रंग सफेद बना रहता है। साथ ही स्वाद में एक विशिष्ट पहचाने के कारण देशभर में पहचान रखती है। अपने अनोखे स्वाद और पहचान के कारण कई कम्पनियां जैसे आईटीसी, महिन्द्रा, पेप्सिको, इस्कॉन बालाजी, मकेन्श, हायफन सीड्स इत्यादि सीधे तौर पर कृषकों से जुड़कर प्रसंस्करण योग्य आलू फसल के बीज प्राप्त करवाकर कृषकों से उचित मूल्य पर उत्पाद क्रय करते है। इन्दौर जिले के मालवी आलू की विशिष्टता के कारण ही कई बड़ी औद्योगिकी कम्पनियां खाद्य प्रसंस्करण इकाईयां जैसे- बालाजी, यलो डायमंड, पारले, हल्दीराम एवं लेयस आदि द्वारा आलू आधारित चिप्स, वेफर्स, फ्रेंच फाईस आदि उत्पाद तैयार किए जा रहे है। स्थानीय स्तर पर विकासखंड महू के ग्राम कोदरिया एवं आसापास के क्षेत्र में आलू से आधारित लगभग 250 से 300 सीजनल प्रसंस्करण इकाईयां संचालित की जाती है, जिसमें आलू चिप्स, स्टार्च, वेफर्स, पाउडर, फ्रेंच फाईस आदि बनाने का कार्य किया जाता है।
इन्दौरी मालवी आलू अपने बेहतरीन गुणवत्ता स्वाद और विशेषकर शुगर फ्री प्रजातियों के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है, यह मध्यप्रदेश की "एक जिला-एक उत्पाद" योजना का प्रमुख हिस्सा है, इसके अलावा इन्दौरी आलू का इस्तेमाल शहर के मशहूर स्ट्रीट फूड्स में दिल खोलकर किया जाता है, इससे बनने वाले लोकप्रिय व्यंजन आलू चाट और पोहा, आलू बडा, आलू कचौडी, खोपरा पेटीस महत्वपूर्ण है, आलू पोषक तत्वों का बेहतरीन स्रोत है इसे दुनिया की दूसरी रोटी कहा जाता है, इसमें कार्बोहाईडेट (स्टार्च के रूप में) मुख्य ऊर्जा प्रदान करते है, इसके अलावा आलू विटामिन C और B6 का एक अच्छा भंडार है जो इम्यूनिटी और नर्वस सिस्टम के लिए फायदेमंद है इसमें पोटेशियम और फाइबर्स भी पाये जाते है इसके अतिरिक्त अन्य खनिज मैंगनीज, फास्फोरस, मैग्नीाशियम और आयरन की भी थोड़ी मात्रा पाई जाती है। जीआई टैग मिलने से इन्दौर आलू की ब्राण्ड वैल्यू बढे़गी और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इनकी मांग बढ़ने की संभावना है, इसमें किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा और निर्यात के नए अवसर भी खुलेंगे। इन्दौर की विशिष्ट जलवायु उपजाऊ मिट्टी और अत्याधुनिक खेती पद्धतियों से आलू को खास पहचान दिलाई है, जिसे अब जीआई टैग के रूप में मान्यता मिल गई है।
यह उपलब्धि जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में जनप्रतिनिधियों, किसानों, वैज्ञानिकों और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
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