
कालपी में एक ही रात दो पक्षों के गंभीर आरोप, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल!
आखिर सच क्या है?
जांच पर टिकी सबकी निगाहें
कालपी (जालौन) कालपी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मैनूपुर में 3 जुलाई की रात हुई घटना अब केवल दो पक्षों के विवाद तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पुलिस की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
एक ओर जहां एक पक्ष ने घर में घुसकर मारपीट और अवैध तमंचे से फायरिंग करने का आरोप लगाते हुए छह लोगों के खिलाफ तहरीर दी है, वहीं दूसरे पक्ष ने क्षेत्राधिकारी कालपी को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनके साथ भी मारपीट, पथराव और फायरिंग जैसी घटना हुई, लेकिन कालपी कोतवाली पुलिस ने उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की।
दोनों पक्षों की शिकायतों ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना दिया है।
गांव में लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर उस रात मैनूपुर में हुआ क्या था? आखिर सच कौन बोल रहा है?
इसका जवाब अब केवल निष्पक्ष पुलिस जांच से ही सामने आ सकता है।
पहले पक्ष का आरोप—घर में घुसकर मारपीट और फायरिंग
देवनारायण पुत्र जगतनारायण ने कोतवाली कालपी में दी गई तहरीर में आरोप लगाया कि उनका पुत्र अभिषेक दीक्षित रात करीब नौ बजे घर लौट रहा था।
इसी दौरान प्रमोद दीक्षित, अतुल उर्फ मोंटू, दरवेश, राममोहन, ओमप्रकाश और रोहित उर्फ अक्कू ने उसे रोककर मारपीट की।
आरोप है कि जान बचाकर घर पहुंचे अभिषेक का पीछा करते हुए आरोपी घर के अंदर घुस गए और वहां भी मारपीट की।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ देर बाद अतुल उर्फ मोंटू कथित रूप से अवैध तमंचा लेकर लौटा और घर की ओर कई राउंड फायरिंग कर दहशत फैलाई।
दूसरे पक्ष का पलटवार—हम पर हमला हुआ, पुलिस ने नहीं सुनी
उधर, प्रमोद कुमार दीक्षित ने क्षेत्राधिकारी कालपी को दिए प्रार्थना-पत्र में दावा किया कि रात करीब 10 बजे उनके घर के बाहर गोली चलने जैसी आवाज आई। आरोप है कि सरस उर्फ जयराम दीक्षित ने उनके हाथ पर लाठी से हमला किया और अभिषेक उर्फ छोटू ने पथराव किया।
उनका कहना है कि 112 पर सूचना देने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें और उनके बेटे को कई घंटे तक कोतवाली में बैठाए रखा गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि न मेडिकल कराया गया और न ही उनकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया।
कालपी कोतवाली की कार्यशैली पर उठे सवाल
दोनों पक्षों के आरोपों के बीच अब पुलिस की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है। यदि दोनों पक्ष अलग-अलग गंभीर आरोप लगा रहे हैं, तो निष्पक्ष जांच और साक्ष्य संकलन बेहद जरूरी हो जाता है।
स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा है कि यदि किसी शिकायतकर्ता को कोतवाली से संतोषजनक कार्रवाई नहीं मिलती और उसे क्षेत्राधिकारी कार्यालय तक जाना पड़ता है, तो यह चिंता का विषय है।
लोग पूछ रहे हैं ये बड़े सवाल...
आखिर 3 जुलाई की रात मैनूपुर में वास्तव में हुआ क्या था?
यदि फायरिंग की सूचना थी तो मौके से साक्ष्य क्यों नहीं जुटाए गए?
घायल होने का दावा करने वाले लोगों का तत्काल मेडिकल क्यों नहीं कराया गया?
दोनों पक्षों की शिकायतों पर समान रूप से कार्रवाई हुई या नहीं?
शिकायतकर्ताओं को घंटों थाने में बैठाने की नौबत क्यों आई?
यदि किसी शिकायत में तथ्य नहीं थे तो उसका विधिवत निस्तारण क्यों नहीं किया गया?
क्या वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करेंगे?
क्या कालपी कोतवाली की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा होगी?
अब सबकी निगाहें जांच पर
पूरा मामला अब पुलिस जांच के अधीन है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ऐसे में निष्पक्ष जांच, साक्ष्यों का परीक्षण और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय लोगों की निगाहें अब क्षेत्राधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं।
नोट: यह समाचार दोनों पक्षों द्वारा दिए गए प्रार्थना-पत्रों में लगाए गए आरोपों पर आधारित है।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई होगी।
संबंधित पुलिस अधिकारियों एवं दूसरे पक्ष का आधिकारिक बयान प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
आपकी क्या राय है?
क्या ऐसे मामलों में दोनों पक्षों की शिकायत पर तुरंत निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई होनी चाहिए?
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।
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Kalpi, Jalaun | Jul 4, 2026