
70 साल की माँ ने बेटे के सपनों के लिए 18 साल तक संदूक में छिपाकर रखे ₹10 के नोट, चिट्ठी पढ़कर रो पड़ा पूरा गाँव।
हिमाचल के भैरखाल गांव की कमला देवी ने हर हफ्ते थोड़ा-थोड़ा बचाकर जोड़े ₹3,67,400, मौत के बाद कपड़ों के नीचे मिली गड्डियां और एक भावुक चिट्ठी।
कहते हैं माँ का प्यार कभी हिसाब नहीं मांगता। इसका जीता-जागता उदाहरण हिमाचल की तलहटी में बसे छोटे से गांव भैरखाल में देखने को मिला, जहां 70 वर्षीय कमला देवी के निधन के बाद उनके पुराने संदूक से ऐसी चीज़ निकली जिसने पूरे गांव की आँखें नम कर दीं।
कमला देवी का निधन पिछले सप्ताह हो गया था। अंतिम संस्कार के बाद जब परिवार के लोग उनके पुराने कपड़ों और संदूक को संभाल रहे थे, तो कपड़ों के नीचे कई पॉलिथीन में लिपटी हुई ₹10 के नोटों की गड्डियां मिलीं। गिनने पर कुल रकम *₹3,67,400 निकली।
और इन्हीं नोटों के ऊपर रखी थी एक मुड़ी-तुड़ी पुरानी चिट्ठी। चिट्ठी पर कांपते हाथों से लिखा था "ये पैसे मेरे बेटे के सपनों के लिए हैं। जब उसे सबसे ज्यादा जरूरत हो, तब उसे दे देना।"
*त्याग और ममता की मिसाल*
गाँव वालों के मुताबिक कमला देवी ने अपनी पूरी जिंदगी बेहद सादगी में गुजारी। उन्होंने कभी अपने लिए नए कपड़े नहीं खरीदे, न कभी स्वादिष्ट भोजन की इच्छा जताई। पेंशन और घर के छोटे-मोटे काम से जो भी पैसा मिलता, उसमें से हर हफ्ते ₹10-₹20 निकालकर वह संदूक में रख देती थीं। किसी को भनक तक नहीं लगी, यहां तक कि उनके बेटे मोहन सिंह को भी नहीं।
*बेटे का रो-रोकर बुरा हाल*
चिट्ठी पढ़ते ही बेटा मोहन सिंह फूट-फूटकर रो पड़ा। उसने बताया, "मुझे कभी पता ही नहीं चला कि माँ मेरे लिए इतने सालों से त्याग कर रही थीं। मैं सोचता था माँ पैसे कहां खर्च करती हैं। आज समझ आया, वो मेरे भविष्य के लिए जोड़ रही थीं। माँ ने जो किया, मैं कभी चुका नहीं सकता।"
गाँव के प्रधान ने कहा कि कमला देवी का ये त्याग आज के समाज के लिए एक सीख है।
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