आश्वासन के पांच दिन बाद फिर जमीन के लिए सत्याग्रह, रोते हुए पानी में उतरा किसान का बेटा, पिता बोले कि अबकी बार बेटा शहीद हो जाना लेकिन मांगे पूरी होने पर ही लौटना,
रीवा गुढ़ तहसील के ग्राम बेला निवासी किसान परिवार का संघर्ष अब फिर से जारी, 48 घंटे के अनशन के बाद प्रशासन ने दिया था कार्रवाई का भरोसा; मांगें पूरी नहीं होने पर फिर शुरू हुआ विरोध
तलाश न्यूज रीवा
रीवा जिले के गुढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम बेला में अपनी कृषि भूमि और उचित मुआवजे की मांग को लेकर किसान परिवार का संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। करीब पांच दिन पहले 48 घंटे तक पानी में आधा डूबकर सत्याग्रह करने वाले किसान पुत्र ने प्रशासन के आश्वासन के बाद अनशन समाप्त किया था। लेकिन पांच दिन बीतने के बाद भी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए वह एक बार फिर पानी में उतरकर सत्याग्रह करने को मजबूर हुआ है।
किसान परिवार का आरोप है कि उनकी कृषि भूमि पर हाईटेंशन लाइन और टावर लगाए जा रहे हैं। परिवार लंबे समय से जमीन के उचित मुआवजे और अपनी मांगों के निराकरण की मांग कर रहा है। जब उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो किसान पुत्र ने पहले पानी में आधा डूबकर करीब 48 घंटे तक सत्याग्रह किया था।
देर रात रीवा कलेक्टर पहुंचे थे अनशन स्थल
पहले आंदोलन की जानकारी मिलने के बाद रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, गुढ़ एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी देर रात करीब 11 बजे अनशन स्थल पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने किसान पुत्र से पूरे मामले की जानकारी लेकर उसकी मांगें सुनी थीं।
प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया था कि जो मांगें नियमानुसार उचित पाई जाएंगी, उनके निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद किसान पुत्र ने अपना अनशन समाप्त कर दिया था। लंबे समय तक अनशन पर रहने के कारण उसका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया था।
पांच दिन बाद फिर पानी में उतरा किसान पुत्र
किसान परिवार का कहना है कि प्रशासन के आश्वासन के पांच दिन बाद भी उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद किसान पुत्र एक बार फिर पानी में उतर गया। इस दौरान वह भावुक होकर रोता नजर आया और अपनी जमीन बचाने की गुहार लगाता रहा।
किसान परिवार का कहना है कि जब आश्वासन के बाद भी जमीन पर कोई ठोस समाधान नहीं हुआ तो उनके सामने फिर आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
पिता का भावुक बयान—मांगे पूरी हों, तभी लौटना
किसान पुत्र के पिता देशराज मिश्रा का बयान भी बेहद भावुक करने वाला है। उनका कहना है कि परिवार अपनी जमीन और हक के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। उन्होंने अपने बेटे से कहा कि मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखो।
परिवार की पीड़ा यह है कि एक किसान को अपनी जमीन बचाने के लिए बार-बार सत्याग्रह और आंदोलन का सहारा लेना पड़ रहा है। परिवार का कहना है कि वह प्रशासन से किसी विशेष कृपा की मांग नहीं कर रहा, बल्कि अपनी जमीन के संबंध में नियमानुसार उचित मुआवजे और न्याय की मांग कर रहा है।
हाईटेंशन लाइन और टावर को लेकर विवाद
किसान परिवार का आरोप है कि उनकी कृषि भूमि पर अडानी कंपनी की ओर से हाईटेंशन लाइन और टावर लगाए जा रहे हैं, लेकिन जमीन का उचित मुआवजा तय किए बिना काम कराया जा रहा है। इसी के विरोध में किसान परिवार ने आंदोलन शुरू किया है।
किसान पुत्र का आरोप है कि जब उसने अपने मामले में जवाब और न्याय की मांग की तो उस पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित कंपनी का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
जीतू पटवारी ने भी किसान से की थी बात
पहले आंदोलन के दौरान मामले की जानकारी मिलने पर मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने किसान देशराज मिश्रा से फोन पर बातचीत की थी। उन्होंने किसान की स्थिति और उसकी मांगों की जानकारी ली थी।
कांग्रेस ने सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने, किसान की शिकायत सुनने और जमीन के उचित मुआवजे का निर्धारण कराने की मांग की थी।
आश्वासन बनाम कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
किसान परिवार का संघर्ष अब प्रशासन के आश्वासन और उसके बाद हुई कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहा है। करीब 48 घंटे तक चले पहले सत्याग्रह के बाद अधिकारियों ने नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन पांच दिन बाद किसान परिवार फिर आंदोलन की राह पर है।
यह मामला केवल एक किसान परिवार की जमीन का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि यदि प्रशासनिक आश्वासन के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता, तो आखिर किसान अपनी बात किसके सामने और किस तरीके से रखे?
अब देखना यह है कि किसान परिवार की मांगों पर प्रशासन कब तक ठोस निर्णय लेता है और क्या इस बार आश्वासन के बजाय जमीन पर समाधान दिखाई देता है।
Gopadbanas, Sidhi | Aug 17, 2026