
क्या सिस्टम से बड़ा हो गया एक थानेदार?
जब एक IAS अधिकारी को ही अपनी ही हुकूमत में मांगनी पड़ी अपनी ही जिंदगी की भीख! District Magistrate/District Election Officer, Jalaun DM Jalaun Dio Jalaun BL Verma Jalaun Police Arun Tiwari Arto Orai Jalaun Chief Minister Office Uttar Pradesh PMO India President of India Ghanshyam Anuragi
ना कानून का डर बचा, ना ही औदे का लिहाज रहा,
यह कैसा अंधेरगर्दी से भरा आज का राज रहा!
जो कल तक ज़िले का इकबाल बुलंद किया करते थे,
आज उन्हीं के लिए न्याय का दरवाजा बंद रहा!
खाकी के गुरूर ने हद से आगे कदम बढ़ाया है,
जब एक IAS को ही राजभवन ने बचाया है!
उरई से लेकर लखनऊ तक हड़कंप:
IAS रिंकू सिंह राही का वो खत, जिसने यूपी की अफसरशाही और पुलिस महकमे के नकाब उतार दिए!
इसे कानून का राज कहें या खाकी का खुला अहंकार?
जालौन के संयुक्त मजिस्ट्रेट और चर्चित IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सीधे महामहिम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर जो सनसनीखेज खुलासे किए हैं, उसने पूरे उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है!
एक ऐसा अफसर, जिसने अपनी पूरी नौकरी ईमानदारी की बलि चढ़ाकर बिताई, आज वही अफसर अपनी और अपने परिवार की सलामती के लिए गिड़गिड़ाने पर मजबूर है।
मामले के सबसे कड़वे सच:
1️⃣ 2009 के गोलियों के जख्म फिर से हरे:
वर्ष 2009 में मुजफ्फरनगर में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर IAS रिंकू सिंह राही पर गोलियां बरसाई गई थीं।
उसी जानलेवा हमले की काली परछाईं आज भी उनका पीछा कर रही है।
पर्याप्त सुरक्षा न मिलने की वजह से देश का इतना बड़ा प्रशासनिक अफसर आज अपने ही घर में नजरबंद जैसी ज़िंदगी जीने को मजबूर है।
2️⃣ थानेदार का दुस्साहस:
IAS की शिकायत कचरे के डिब्बे में!
सिस्टम का सबसे घिनौना चेहरा तब सामने आया जब उरई कोतवाली प्रभारी आनंद कुमार सिंह ने खुद एक IAS अफसर (संयुक्त मजिस्ट्रेट) की तहरीर (FIR की अर्ज़ी) लेने से ही इनकार कर दिया!
जरा सोचिए, जिस उरई थाने के ऊपर पूरा ज़िला भरोसा करता है, उस थाने का इंचार्ज अपने ही ज़िले के मजिस्ट्रेट की बात सुनने को तैयार नहीं है!
3️⃣ राजभवन का सीधा हस्तक्षेप — DGP को कड़ा फरमान:
मामले का संज्ञान लेते हुए राज्यपाल के विशेष सचिव श्रीप्रकाश गुप्ता ने बिना देर किए यूपी के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र जारी किया है।
आदेश दिए गए हैं कि:
IAS रिंकू सिंह राही को तत्काल प्रभाव से सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
उरई कोतवाल आनंद कुमार सिंह के खिलाफ कड़ी जांच और दंडात्मक कार्रवाई हो।
सवाल:
साहब! जब लाल बत्ती ही रो रही है, तो जनता कहाँ जाए?
अरे साहब!
यह सिर्फ एक आईएएस अधिकारी की सुरक्षा का मामला नहीं है, यह उस भरोसे का कत्ल है जो देश की आम जनता कानून-व्यवस्था पर करती है।
अगर एक IAS की एप्लीकेशन कोतवाल फाड़कर फेंक देता है, तो उस गरीब किसान या मजदूर का क्या होता होगा जो फरियाद लेकर थाने की चौखट पर जाता है?
क्या यूपी पुलिस में कुछ अफसरों को कानून से ऊपर होने का लाइसेंस मिल गया है?
क्या इस देश में ईमानदारी से काम करने वाले अफसरों का यही हश्र होगा कि उन्हें हर कदम पर अपनी जान की भीख मांगनी पड़े?
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Jalaun, Jalaun | Oct 5, 2026