
तकनीक कितनी उन्नत हो, इससे अधिक महत्वपूर्ण है उसकी दिशा
मंगलवार को एमएलएसयू में अभियांत्रिकी, नवाचार और राष्ट्र निर्माण’ विषय पर होगा राष्ट्रीय मंथन
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उदयपुर, 14 सितम्बर। तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष विज्ञान, जैव-प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्र राष्ट्रों की विकास-यात्रा को नई दिशा दे रहे हैं, ऐसे समय में अभियंता की भूमिका केवल तकनीकी समाधान विकसित करने तक सीमित नहीं रह सकती। इसी व्यापक चिंतन को केंद्र में रखते हुए राष्ट्रीय अभियंता दिवस के अवसर पर मंगलवार, 15 सितंबर को मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में अभियांत्रिकी, नवाचार और राष्ट्र निर्माण विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित होगी।
संगोष्ठी का आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय एवं विज्ञान भारती, चित्तौड़ प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। कार्यक्रम राष्ट्रीय अभियंता दिवस के साथ महान अभियंता, राष्ट्र निर्माता एवं भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती को समर्पित होगा। भारत में प्रत्येक वर्ष 15 सितंबर को महान अभियंता, राष्ट्र निर्माता एवं भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के उपलक्ष्य में अभियंता दिवस मनाया जाता है। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के अतिथि गृह स्थित बप्पा रावल सभागार में प्रातः 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक होगा।
तकनीक नहीं, तकनीक की दिशा होगी विमर्श का केंद्र
संगोष्ठी में तेजी से विकसित होती तकनीक को भारत की सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय आवश्यकताओं से जोडने पर मंथन किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य अभियांत्रिकी को केवल तकनीकी दक्षता के दायरे से बाहर निकालकर नवाचार, स्वदेशी तकनीकी क्षमता, युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने के लिए एक सार्थक संवाद का मंच उपलब्ध कराना है।
राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ होंगे शामिल
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में निदेशक, नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन-भारत (एनआईएफ), गांधीनगर एवं राष्ट्रीय सचिव, विज्ञान भारती डॉ. अरविंद सी. रानाडे अपने विचार रखेंगे। वे नवाचार, स्वदेशी विज्ञान, जमीनी स्तर पर विकसित तकनीकी समाधानों तथा राष्ट्र निर्माण में वैज्ञानिक और अभियान्त्रिकी दृष्टिकोण की भूमिका पर अपने विचार रखेंगे। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सचिव, विज्ञान भारती प्रवीण रामदास भी प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यक्रम संरक्षक मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश डागा करेंगे। संगोष्ठी के संयोजक निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय प्रो. हनुमान प्रसाद हैं एवं प्राचार्य, राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, अजमेर एवं अध्यक्ष, विज्ञान भारती, चित्तौड़ प्रांत डॉ. गोविन्द नारायण पारीक हैं।
संगोष्ठी के अंतर्गत ‘राष्ट्र निर्माण में लोक विज्ञान की भूमिका’ विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता एवं प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। पोस्टर प्रतियोगिता प्रातः 10 बजे से 11 बजे तक होगी। प्रतियोगिता में श्रेष्ठ तीन पोस्टरों का चयन किया जाएगा तथा विजेताओं को समापन समारोह के दौरान पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
कार्यक्रम में पंजीयन एवं दीप प्रज्वलन के बाद स्वागत उद्बोधन, स्वदेशी विज्ञान आंदोलन एवं राष्ट्र निर्माण पर विचार-विमर्श, मुख्य अतिथि का उद्बोधन तथा जिज्ञासा समाधान सत्र आयोजित होगा। जिज्ञासा समाधान सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों और युवा शोधार्थियों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर भी मिलेगा।
विश्वेश्वरैया की विरासत से आज के भारत तक
सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जीवन इस बात का उदाहरण है कि अभियांत्रिकी को यदि दूरदृष्टि और राष्ट्रहित से जोड़ा जाए तो वह केवल संरचनाएँ नहीं, बल्कि समाज और संस्थाओं का भविष्य भी निर्मित कर सकती है। इसी विचार को आज के संदर्भ में आगे बढ़ाते हुए संगोष्ठी में यह विमर्श प्रमुख रहेगा कि “अभियंता केवल समस्याओं का तकनीकी समाधान खोजने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं को आकार देने वाला राष्ट्र-निर्माता भी है।”
कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. अमित कुमार गुप्ता संग सह-आयोजन सचिव के रूप में डॉ. लोकेश कुमार अग्रवाल, डॉ. मोहन सिंह राठौड़ एवं मंजू चौधरी कार्य कर रहे हैं। संगोष्ठी की सलाहकार समिति में डॉ. एम. एल. कालरा, डॉ. रामेश्वर आमेटा, डॉ. अविनाश पंवार, डॉ. घनश्याम पुरोहित, डॉ. हरीश, डॉ. जितेंद्र सिंह राठौड़, डॉ. कुलदीप शर्मा, डॉ. कमल सिंह राठौड़, डॉ. गिरधर पाल सिंह, डॉ. मोहित गोखरू, डॉ. राहुल गर्ग, डॉ. विमल सारस्वत, डॉ. जया अरोड़ा, डॉ. विजय कोली, डॉ. देवेंद्र जैन, डॉ. तृप्ता जैन, डॉ. लेखराज, डॉ. गिरिमा नागदा एवं डॉ. देवेंद्र कुमार शामिल हैं। आयोजन समिति में डॉ. प्रफुल्ल कोठारी, डॉ. हिम्मानी पालीवाल, डॉ. जयपाल सिंह राठौड़, डॉ. विमला डांगी एवं डॉ. पुनीत शर्मा सहित विश्वविद्यालय के शोधार्थी एवं विद्यार्थी सहयोग कर रहे हैं।
Girwa, Udaipur | Sep 14, 2026