सवाल जनता से
जब बल्ब की जगह बल्फ हो जाता है, तो लोगों का ध्यान तुरंत उस पर आकर्षित हो जाता है। लेकिन जब कोटेदार राशन में कटौती करता है, गांव की सड़कें खराब होती हैं, सरकारी विद्यालयों की हालत बदहाल होती है या बिजली व्यवस्था चरमराई रहती है, तब इन्हीं समस्याओं पर लोगों का ध्यान क्यों नहीं जाता?
क्या हमें सिर्फ दिखावे की चीजों पर आवाज उठानी चाहिए, या फिर अपनी मूलभूत समस्याओं और अधिकारों के लिए भी आवाज उठानी चाहिए?
ऐसे लोगों के लिए आप क्या कहेंगे? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर बताएं।