
100–150 करोड़ की सरकारी नजूल भूमि पर कथित कब्जे का मामला: तीन पन्नों की रिपोर्ट ने बढ़ाई हलचल, एसआईटी जांच की सिफारिश और तबादले की टाइमिंग पर उठे सवाल
जालौन जनपद में सरकारी नजूल भूमि से जुड़ा एक संवेदनशील मामला इन दिनों व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है।
तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी रिंकू सिंह राही द्वारा 22 जून 2026 को जिलाधिकारी जालौन को भेजी गई तीन पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट के सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट में कस्बा जालौन की गाटा संख्या 892 स्थित लगभग 100 से 150 करोड़ रुपये मूल्य की शासकीय नजूल भूमि पर कथित अवैध कब्जा, बड़े पैमाने पर खुदाई, निर्माण कार्य तथा कई प्रशासनिक पहलुओं का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों में नजूल/शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है।
तहसील स्तर पर कराई गई जांच, उपलब्ध अभिलेखों तथा स्थलीय निरीक्षण के आधार पर यह उल्लेख किया गया कि लगभग 10 हजार वर्गफीट क्षेत्र में करीब आठ फीट गहरी खुदाई कर निर्माण कार्य कराया जा रहा था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि खुदाई के कारण आसपास की संपत्तियों को संभावित क्षति तथा मिट्टी के कथित अवैध निष्कासन के संकेत मिले।
रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि संबंधित पक्ष ने पुराने बैनामे, सीमित क्षेत्रफल के पट्टे तथा नगर पालिका से स्वीकृत नक्शे का आधार प्रस्तुत किया।
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार उपलब्ध अभिलेख प्रथम दृष्टया वैध स्वामित्व स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए।
साथ ही यह भी कहा गया कि भवन का नक्शा स्वीकृत होना भूमि के स्वामित्व का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसडीएम ने विवादित स्थल पर निर्माण कार्य तत्काल रुकवाने, यथास्थिति बनाए रखने, अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू करने, संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने, निर्माण सामग्री एवं मशीनरी जब्त करने तथा नगर पालिका और राजस्व विभाग के संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की अलग से जांच कराने की सिफारिश की।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रभावशाली व्यक्तियों और राजनीतिक संरक्षण के कारण स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच प्रभावित होने की आशंका हो सकती है।
इसी आधार पर पूरे मामले की जांच जनपद और मंडल स्तर से ऊपर विशेष जांच दल (SIT) या बहु-विभागीय उच्चस्तरीय समिति से कराने का सुझाव दिया गया। यह उल्लेख रिपोर्ट का हिस्सा है; इन टिप्पणियों पर अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच के बाद ही निकलेगा।
घटनाक्रम ने नया मोड़ तब लिया जब रिपोर्ट भेजे जाने के कुछ समय बाद तत्कालीन एसडीएम रिंकू सिंह राही का स्थानांतरण कर दिया गया।
इसके बाद इस घटनाक्रम को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं सामने आईं।
हालांकि, अब तक किसी भी आधिकारिक आदेश या सरकारी बयान में यह नहीं कहा गया है कि स्थानांतरण उक्त रिपोर्ट या किसी विशेष जांच के कारण हुआ। इसलिए दोनों घटनाओं के बीच संबंध स्थापित करना फिलहाल उचित नहीं होगा।
यह मामला केवल एक भूमि विवाद तक सीमित नहीं है।
यदि रिपोर्ट में किए गए उल्लेख सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी संपत्ति की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही, राजस्व अभिलेखों के संरक्षण, नगर निकायों की भूमिका और कानून के समान अनुपालन जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों को भी सामने लाता है।
वहीं यदि जांच में आरोप सही नहीं पाए जाते, तो यह भी स्पष्ट होना आवश्यक होगा ताकि सभी पक्षों की स्थिति पारदर्शी रूप से सामने आ सके।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि रिपोर्ट में की गई सिफारिशों पर क्या कार्रवाई होती है, क्या संबंधित विभाग विस्तृत जांच कराते हैं, क्या जिम्मेदार पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होती है और क्या इस पूरे प्रकरण का अंतिम सच सार्वजनिक रूप से सामने आता है।
आपकी राय क्या है?
क्या करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच आवश्यक है?
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।
#Jalaun #JalaunNews #BreakingNews #SpecialReport #Exclusive #GovernmentLand #NazulLand #LandCase #RevenueDepartment #RevenueNews #IllegalConstruction #LandEncroachment #AdministrativeNews #UPNews #UttarPradesh #Transparency #RuleOfLaw #PublicInterest #Investigation #SIT #GroundReport #Journalism #Kalpi #Orai #HindiNews #LatestNews #NewsUpdate #Governance #Accountability #PublicAdministration
Kalpi, Jalaun | Jul 3, 2026