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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: नैनीताल हाईकोर्ट शिफ्टिंग पर रैफरेंडम का आदेश रद्द, सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन को निर्देश #gkmnews ब्रेकिंग न्यूज़ - सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश वाली पीठ ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से स्थानांतरित करने संबंधी मामले में कहा कि प्रशासन और सरकार उच्च न्यायालय प्रशासन के साथ बैठकर शिफ्टिंग पर निष्कर्ष निकालें। पूर्व के जनमत संग्रह(रैफरेंडम)कराने के आदेश पर रोक लगा दी है। भारत की शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के 4 मई 2024 के आदेश को पूरी तरह से रद्द (सेट असाइड)कर दिया है, जिसमें उच्च न्यायालय को स्थानांतरित करने के लिए एक जनमत संग्रह(रैफरेंडम) कराने की बात कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक स्तर पर इस तरह के जनमत संग्रह के आदेश पारित करना उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी.मोहना की खंडपीठ ने उच्च न्यायालय के रुख पर कड़ी असहमति जताई। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा कि उच्च न्यायालय का न्यायिक पक्ष पर इस तरह के आदेश पारित करने से कोई सरोकार या लेना-देना नहीं होना चाहिए। अदालत का काम जनमत संग्रह कराना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के उस विवादित फैसले को खारिज करते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे और स्थान परिवर्तन से जुड़े मुद्दों को सुलझाने का एक तय प्रशासनिक तरीका होता है। यह आदेश उच्च न्यायालय की तत्कालीन मुख्य न्यायधीश ऋतु बाहरी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने जारी किया था । उच्च न्यायालय ने तब गौलापार में चिन्हित की गई भूमि को उच्च न्यायालय के लिए अनुपयुक्त ठहराया था । सुप्रीम कोर्ट ने इस जटिल मामले का व्यवहारिक समाधान निकालते हुए निर्देश दिया कि अब इस पूरे विवाद को प्रशासनिक स्तर पर सुलझाया जाए। न्यायालय ने कहा कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय को अपने प्रशासनिक पक्ष पर राज्य सरकार के साथ आपसी समन्वय और परामर्श करना चाहिए। उच्च न्यायालय और राज्य सरकार मिलकर बैठें और अदालत परिसर से जुड़े सभी ढांचागत (इन्फ्रास्ट्रक्चरल) मुद्दों और समस्याओं का एक ठोस समाधान तैयार करें। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया गया कि उत्तराखंड सरकार ने पहले ही उच्च न्यायालय के नए भवन निर्माण के लिए जिला हल्द्वानी में एक उपयुक्त भूमि को चिन्हित (इयरमार्क) कर लिया है। इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले में तेजी लाने के आदेश दिए। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि हल्द्वानी में चिन्हित की गई इस जमीन से जुड़ी सभी आवश्यक मंजूरियां और अनापत्ति प्रमाण पत्र (क्लियरेंस)आगामी 6 सप्ताह के भीतर पूरे कर लिए जाएं। यह पूरा मामला तब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था जब उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने नैनीताल उच्च न्यायालय के जनमत संग्रह कराने के फैसले के खिलाफ सीधे देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया था। बार एसोसिएशन की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगाई और अब उसे पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने आदेश दिया कि सभी मंजूरियां मिलने के बाद हल्द्वानी की वह जमीन तुरंत हाईकोर्ट प्रशासन को सौंप दी जाए ताकि नए परिसर का निर्माण कार्य आगे बढ़ सके । #SupremeCourtQuashesHighCourtReferendumOrder #NainitalHighCourtShiftGetsFreshDirection #SCDirectsGovtAndHCToResolveShiftingIssue

Haldwani, Nainital | Jul 15, 2026

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