
🔴 जबलपुर | उमरिया PTS के SI का ST सर्टिफिकेट अमान्य, छानबीन समिति ने रद्द किया
8वीं तक के रिकॉर्ड में ईसाई धर्म का उल्लेख मिलने का दावा; गोंड जनजाति से जुड़ाव के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले
जबलपुर/उमरिया। मध्य प्रदेश पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (PTS) उमरिया में पदस्थ सब इंस्पेक्टर अमिताभ प्रताप सिंह का गोंड अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र राज्य उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने अमान्य कर दिया है। समिति ने सरकारी नौकरी में कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र के इस्तेमाल से जुड़े मामले की सुनवाई के बाद यह निर्णय लिया।
समिति के सामने पेश दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर बताया गया कि अमिताभ प्रताप सिंह का पूर्व नाम अमिताभ थियोफिलिस था। जांच में उनके शुरुआती शैक्षणिक रिकॉर्ड में ईसाई धर्म का उल्लेख मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, जाति प्रमाण पत्र और गोंड जनजाति से जुड़ाव के संबंध में प्रस्तुत दस्तावेजों को समिति ने पर्याप्त नहीं माना।
सरकारी रिकॉर्ड में प्रमाण पत्र का रिकॉर्ड नहीं मिला
समिति ने जबलपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट के साथ स्कूल और चर्च के रिकॉर्ड तथा शिकायतकर्ता प्रमिला तिवारी उपाध्याय की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच की।
जांच में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, एसआई ने जबलपुर एसडीएम कार्यालय से जारी जाति प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया था। वहीं, वर्ष 1997-98 के दायरा पंजी में संबंधित प्रकरण क्रमांक 6745/बी-121/1997-98 का रिकॉर्ड सरकारी रजिस्टर में नहीं मिलने की बात कही गई।
इसके अलावा गोरखपुर एसडीएम कार्यालय, जबलपुर से जारी डिजिटल जाति प्रमाण पत्र को भी पहले ही रद्द किए जाने की जानकारी समिति के सामने रखी गई।
विवाह और पारिवारिक रिकॉर्ड भी जांचे गए
गोंड जनजाति से जुड़ाव साबित करने के लिए प्रस्तुत विवाह संबंधी दस्तावेजों को भी समिति ने पर्याप्त नहीं माना।
इटारसी चर्च और सेंट पॉल चर्च, जबलपुर के विवाह अभिलेखों में जाति का उल्लेख नहीं मिलने की बात सामने आई। वहीं, दादा राम सिंह कुंजाम और दादी फुलवा मरकाम के वर्ष 1939 के कथित विवाह प्रमाण पत्र में जारीकर्ता का नाम नहीं होने के कारण उसका पुलिस सत्यापन नहीं हो सका।
समिति के अनुसार, पिता धीरेन्द्र प्रताप सिंह का वर्ष 1989 में निधन होने के बावजूद उनका मृत्यु प्रमाण पत्र वर्ष 2020 में बनवाया गया था। इसे भी जाति प्रमाणन के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना गया।
कलेक्टर-एसपी की जांच रिपोर्ट में क्या कहा गया?
कलेक्टर और एसपी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, रिकॉर्ड में अनावेदक के जन्म से ईसाई धर्म से संबंधित होने की बात सामने आई। रिपोर्ट में उनके गोंड जनजाति की परंपरा, संस्कृति और समुदाय से संबंध के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलने का उल्लेख किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, परिवार या पूर्वजों के वर्ष 1950 में जबलपुर अथवा रांझी तहसील के निवासी होने का भी पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
बच्चों के ST प्रमाण पत्र को लेकर भी शिकायत
शिकायतकर्ता प्रमिला तिवारी उपाध्याय ने समिति के सामने आरोप लगाया कि कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एसआई ने स्वयं सरकारी नौकरी हासिल की और उनके पुत्र सूर्यांश प्रताप सिंह तथा पुत्री कुमारी स्वर्णा सिंह के भी ST प्रमाण पत्र बनवाए गए।
शिकायतकर्ता ने एसआई के खिलाफ तत्कालीन IPC की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग भी की है।
सुनवाई में एसआई की गैरहाजिरी
समिति की 30 जून 2026 और 4 अगस्त 2026 की बैठकों में अमिताभ प्रताप सिंह उपस्थित नहीं हुए। उन्हें उमरिया स्थित निवास, स्पीड पोस्ट और व्हाट्सऐप के माध्यम से सूचना दिए जाने की बात समिति के रिकॉर्ड में दर्ज है।
एसआई की ओर से स्वास्थ्य खराब होने और हृदय में स्टेंट लगाए जाने का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय मांगा गया था। समिति ने माना कि उन्हें अपना पक्ष रखने के पर्याप्त अवसर दिए जा चुके हैं, लेकिन निर्धारित अवधि में जाति संबंधी पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए।
समिति का फैसला
उपलब्ध जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर राज्य उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने अमिताभ प्रताप सिंह का गोंड ST जाति प्रमाण पत्र अमान्य कर दिया है।
अब इस फैसले के बाद उनकी सरकारी सेवा और अन्य संबंधित प्रमाण पत्रों को लेकर आगे की प्रशासनिक अथवा कानूनी कार्रवाई क्या होती है, यह संबंधित विभागों के निर्णय पर निर्भर करेगा।
रिपोर्ट दीपक विश्वकर्मा जबलपुर,
सच तक पत्रिका NEWS — हर खबर सच के साथ।
Follow 📲 Deepak Vishawkarma
Follow 📲 सच तक पत्रिका News
👍 Like | 💬 Comment | 🔄 Share | 🔔 Follow
.
.
#Jabalpur #Umaria #MPNews #PoliceNews #JabalpurPolice #Si #mppolice #viralpost #MadhyaPradesh #SachTakPatrikaNews #DeepakVishwakarma