देख, तू अभी भी खड़ा है
बहुत कुछ टूटा, बहुत कुछ छूटा,
कुछ अपनों ने भी साथ छोड़ा।
रातें लंबी थीं, दर्द गहरा था,
फिर भी तूने खुद को नहीं तोड़ा।
जब कोई नहीं था सुनने वाला,
तू अपनी ही आवाज़ बना।
जब हर रास्ता बंद लगा,
तू खुद अपना दरवाज़ा बना।
किसी ने हँसी उड़ाई तेरी,
किसी ने तेरी हिम्मत तोली।
तू चुप रहकर चलता रहा,
और वक्त ने खोली तेरी पोली।
आज आईने के सामने आकर,
खुद को गले लगा लेना।
आँखें नम हों तो हो जाने दे,
पर मुस्कुराकर ये कह देना:
"देख, सबके बावजूद तू अभी भी खड़ा है।
हारा नहीं, थका है बस, पर बड़ा है।
जो तुझे गिराने आए थे,
उनसे तेरा हौसला बड़ा है।"
तो सुन, ये ज़ख्म तेरी कमज़ोरी नहीं,
तेरे संघर्ष की निशानी हैं।
हर टूटन के बाद जो उठा,
वही तो असली कहानी है।
Bihar, India | Oct 3, 2026