
जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जन्मभूमि, कर्मभूमि एवं ज्ञानभूमि का क्षेत्र 'जमुई' अपने भीतर अगाध सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक वैभव समेटे हुए है। इसी पावन धरा का एक हिस्सा है—गुरमाहा, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध होने के बावजूद नक्सलवाद के कारण विकास की दौड़ में थोड़ा पीछे छूट गया था।
लेकिन आज एक नया सवेरा हो चुका है। आप सभी के सहयोग और जिला प्रशासन के अथक प्रयासों से, संपूर्ण भारत की तरह यह क्षेत्र भी अब पूर्णतः नक्सल मुक्त हो चुका है।
अब समय है इस क्षेत्र के समग्र विकास का। 'विकसित भारत 2047' की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है, जब गुरमाहा जैसे सुदूर क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास हो। यह विकास केवल भौतिक सुख-सुविधाओं तक सीमित न रहे, बल्कि यहाँ के नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आंतरिक बुराइयों के परिष्कार से भी जुड़े। इसी पावन उद्देश्य के साथ जिला प्रशासन द्वारा आज गुरमाहा में एक विशेष योग शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य योग के माध्यम से इस क्षेत्र में शांति, विकास और आध्यात्म का अलख जगाना है, ताकि भगवान महावीर की इस पावन धरती से निकले अहिंसा के संदेश को पुनः दुनिया के समक्ष लाया जा सके और साथ ही 'नशामुक्त भारत अभियान' को एक नई गति दी जा सके।
जमुई के इसी पुराने गौरव और आध्यात्मिक वैभव को पुनर्स्थापित करने के लिए इसके व्यापक मीडिया कवरेज की आवश्यकता है।
अतः आप सभी सम्मानित मीडिया कर्मियों से सस्नेह आग्रह है कि इस गरिमामयी योग शिविर में सादर उपस्थित होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएं और इस सकारात्मक बदलाव की आवाज़ बनें।
जिला जन संपर्क पदाधिकारी, जमुई
Jamui, Bihar | Jun 21, 2026