
देवेंद्र प्रताप सिंह की पोस्ट से यूपी की सियासत में हलचल, बोले- अन्याय और अपमान के खिलाफ दें वोट
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव से चार दिन पहले भाजपा एमएलसी की शिक्षकों से भावुक अपील, मंच से उतारे जाने की घटना से जोड़कर देखी जा रही पोस्ट
गोरखपुर, गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव से पहले भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी हलचल तेज कर दी है। 23 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले उन्होंने शिक्षकों से “अन्याय और अपमान के खिलाफ” वोट करने की अपील की है। उनकी इस पोस्ट को 12 अक्टूबर को गोरखपुर में आयोजित शिक्षक सम्मेलन के दौरान मंच से उतारे जाने की घटना से जोड़कर देखा जा रहा है।
देवेंद्र प्रताप सिंह ने 19 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे शिक्षकों के नाम हाथ से लिखा एक पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया। इसमें उन्होंने शिक्षक समुदाय और प्रतियोगी युवाओं को अपना परिवार बताते हुए न्याय के लिए उनके संघर्ष का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने लिखा कि जिन शिक्षकों को उनके संघर्ष पर विश्वास है और जो उनके प्रति स्नेह व सम्मान रखते हैं, वे 23 अक्टूबर को अन्याय और अपमान के खिलाफ सशक्त जनादेश दें।
गौरतलब है कि 12 अक्टूबर को गोरखपुर के दिग्विजयनाथ पार्क में आयोजित शिक्षक सम्मेलन के दौरान देवेंद्र प्रताप सिंह मंच पर जा रहे थे, तभी भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय द्वारा उन्हें मंच से उतारे जाने की घटना सामने आई थी। इस घटनाक्रम को देवेंद्र प्रताप सिंह के अपमान से जोड़कर देखा गया। अब चुनाव से ठीक पहले उनकी भावुक अपील ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
उधर, भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर डॉ. संजय त्रिपाठी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया था। बाद में समाजवादी पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी बना लिया। सपा समर्थक देवेंद्र प्रताप सिंह की पोस्ट को अपने पक्ष में माहौल बनाने वाला बता रहे हैं। हालांकि, पोस्ट में उन्होंने किसी प्रत्याशी का नाम लेकर समर्थन या विरोध नहीं किया है।
छात्र राजनीति से विधान परिषद तक का सफर
गोरखपुर के भौवापार गांव निवासी देवेंद्र प्रताप सिंह ने छात्रनेता के रूप में राजनीति की शुरुआत की थी। वर्ष 1998 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें गोरखपुर-फैजाबाद खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया और वे पहली बार विधान परिषद पहुंचे। वर्ष 2004 में भाजपा के डॉ. वाईडी सिंह ने उन्हें चुनाव में पराजित किया। वर्ष 2010 में देवेंद्र प्रताप सिंह ने सपा के टिकट पर वापसी करते हुए जीत दर्ज की।
अखिलेश यादव सरकार के दौरान युवाओं और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने के बाद उन्होंने सपा छोड़ दी और वर्ष 2015 में भाजपा में शामिल हो गए। वर्ष 2017 में भाजपा के टिकट पर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीता। वर्ष 2023 में भी भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर विधान परिषद पहुंचे।
अब शिक्षक एमएलसी चुनाव से ठीक पहले उनकी पोस्ट ने राजनीतिक समीकरणों और चुनावी माहौल को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।