
पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: नाबालिग से दरिंदगी के दोषी रोशन खां को 20 वर्ष का कठोर कारावास, 4 लाख का प्रतिकर
विशिष्ट लोक अभियोजक कमलेश भादू की प्रभावी पैरवी से सजा; कोर्ट ने लगाया ₹10,000 जुर्माना, सह-आरोपी बहन मफरूर घोषित
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रावतसर/हनुमानगढ़:
नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में विशिष्ट न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) ने कड़ा रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी रोशन खां पुत्र नूर मोहम्मद को धारा 3/4(2) पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार देकर 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने दोषी पर ₹10,000 का अर्थदंड लगाया है, जिसे अदा न करने पर उसे 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए ₹4 लाख का प्रतिकर (कंपनसेशन) दिलाने का भी आदेश पारित किया।
विशिष्ट लोक अभियोजक ने 12 गवाहों और 25 दस्तावेजों से साबित किया जुर्म
मामले की जानकारी देते हुए विशिष्ट लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) कमलेश भादू ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से मामले में ठोस व प्रभावी पैरवी की गई। अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ अपराध को अकाट्य साबित करने के लिए अदालत के समक्ष 12 गवाह और 25 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। वहीं, बचाव पक्ष ने अपने बचाव में 1 गवाह व 7 दस्तावेज पेश किए, लेकिन अभियोजन द्वारा पेश किए गए पुख्ता साक्ष्यों के आगे बचाव पक्ष की दलीलें टिक नहीं सकीं और अदालत ने अभियुक्त को दोषी माना।
सह-आरोपी बहन ट्रायल के दौरान घोषित हुई मफरूर
प्रकरण के अनुसार 17 मई 2022 को अभियुक्ता रहमत बानो पीड़िता को बहला-फुसलाकर अपने घर ले गई थी, जहां उसके भाई रोशन खां ने नाबालिग के साथ जबरन दुष्कर्म किया। पीड़िता के पिता की रिपोर्ट पर रावतसर थाने में मुकदमा नंबर 248 दर्ज कर अनुसंधान शुरू हुआ था। विशिष्ट लोक अभियोजक भादू ने बताया कि ट्रायल के दौरान सह-अभियुक्ता रहमत बानो अदालत से मफरूर (फरार) घोषित हो गई, जिसके बाद न्यायालय ने रोशन खां को दोषी ठहराते हुए यह सख्त फैसला सुनाया।
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