
2700 रुपये की दवा 27 हजार में! सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की कीमतों पर जताई गंभीर चिंता
नई दिल्ली। दवाओं की कीमतों में निर्माता और मरीज के बीच भारी अंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक कैंसर की जरूरी दवा का उदाहरण देते हुए कीमतों में दस गुना अंतर पर सवाल उठाए।
₹2,700 की दवा की MRP ₹27,000
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बताया गया कि संबंधित दवा की PTR यानी Price to Retailer करीब ₹2,700 है, जबकि उसी दवा की MRP ₹27,000 निर्धारित है। यानी दुकानदार को दवा जिस कीमत पर मिलती है और मरीज से अधिकतम खुदरा मूल्य के तौर पर जितनी रकम ली जा सकती है, उसके बीच करीब दस गुना अंतर है।
मरीज से इतनी अधिक कीमत क्यों?
कोर्ट ने इस भारी मूल्य अंतर पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब दवा इतनी कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही है तो मरीज से इतनी अधिक रकम क्यों वसूली जानी चाहिए। अदालत ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर चिंता जताई।
अधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की कीमतों के निर्धारण और निगरानी से जुड़े अधिकारियों एवं प्राधिकरणों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि जब दवाओं की कीमतों में इतना बड़ा अंतर सामने आ रहा है, तो जिम्मेदार प्राधिकरण इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं।
कैंसर मरीजों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में मरीजों को लंबे समय तक महंगी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दवा की वास्तविक कीमत और MRP के बीच बड़ा अंतर मरीज और उसके परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डाल सकता है।
दवा कीमतों की व्यवस्था पर बहस तेज
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद दवाओं की कीमत तय करने की व्यवस्था, MRP और PTR के बीच अंतर तथा मरीजों को उचित कीमत पर आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर बहस तेज होने की संभावना है। मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही पर भी नजर रहेगी।
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