
Drm Malda तीनपहाड़ स्टेशन पर शौचालय बंद; समस्या बताने पर स्टेशन मास्टर रजनीश कुमार के गाली-गलौज के व्यवहार की चर्चा Ashwini Vaishnaw Eastern Railway Headquarter DC Sahibganj Hemant Soren मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना बनी यात्रियों का सहारा
जितेन्द्र सेन
तीनपहाड़। साहिबगंज–बरहरवा रेलखंड में सकरीगली और महाराजपुर के बीच गंगा नदी के तटबंध में कटाव के कारण बुधवार को ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहा। कई ट्रेनों के रद्द होने और परिचालन में बदलाव के कारण तीनपहाड़ रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की परेशानी बढ़ गई। ऐसे समय में स्टेशन का शौचालय बंद रहने से यात्रियों को मूलभूत सुविधा के लिए भी परेशान होना पड़ा। खासकर महिला, बुजुर्ग और बच्चों के साथ यात्रा कर रहे यात्रियों को अधिक कठिनाई हुई। सुबह से ही गोड्डा, महागामा, जसीडीह समेत दूर-दराज के क्षेत्रों से यात्री तीनपहाड़ स्टेशन पहुंचे थे। ट्रेनों के परिचालन की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण कई यात्री घंटों स्टेशन पर जानकारी का इंतजार करते रहे। कोई बरहरवा जाने के लिए पहुंचा था तो कोई फरक्का, मालदा, वर्धमान और रामपुरहाट की ओर जाने की तैयारी में था।
मालदा जाने निकला परिवार, स्टेशन पहुंचकर सामने आई दूसरी परेशानी
गोड्डा जिले के बसंतराय प्रखंड से आकाश कुमार अपने परिवार के साथ मालदा जाने के लिए तीनपहाड़ पहुंचे थे। परिवार में उनकी मां, दो बहनें और दादी भी थीं। परिवार तीनपहाड़ बस स्टैंड से स्टेशन परिसर पहुंचा और फरक्का एक्सप्रेस पकड़ने की तैयारी कर रहा था। स्टेशन पहुंचने के बाद जब ट्रेन परिचालन की जानकारी ली गई तो पता चला कि परिचालन प्रभावित है। इसी दौरान बुजुर्ग दादी को शौचालय की जरूरत पड़ी। एक नंबर प्लेटफार्म वेटिंग हॉल में शौचालय तलाशने पर वहां ताला लगा मिला। तीनपहाड़ में सार्वजनिक शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण परिवार के सामने परेशानी और बढ़ गई। अंततः परिवार ऑटो से राजमहल गया और वहां से एलसीटी के माध्यम से मालदा के लिए रवाना हुआ। जाते समय आकाश कुमार ने स्टेशन की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब यात्री घंटों स्टेशन पर रुकने को मजबूर हैं, तो यहां शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। परिवार को ट्रेन के बजाय सड़क और जलमार्ग का सहारा लेकर आगे बढ़ना पड़ा।
ट्रेन का इंतजार लंबा, शौचालय बंद होने से परेशानी दोगुनी
रेल परिचालन प्रभावित होने के कारण यात्रियों को काफी देर तक स्टेशन पर रुकना पड़ा। ऐसे समय में शौचालय बंद रहने से परेशानी और बढ़ गई। महिला, बुजुर्ग और बच्चों के साथ यात्रा कर रहे यात्रियों ने इसे गंभीर समस्या बताया।
यात्रियों का कहना था कि प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से ट्रेन परिचालन प्रभावित हो सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में स्टेशन पर उपलब्ध मूलभूत सुविधाएं चालू रहनी चाहिए। यात्रियों ने बंद शौचालय को तत्काल चालू कराने की मांग की।
समस्या बताने पर स्टेशन मास्टर के व्यवहार पर सवाल
शौचालय बंद रहने की जानकारी जब तीनपहाड़ रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर रजनीश कुमार को दी गई, तो बातचीत के दौरान उनके द्वारा गाली-गलौज किए जाने की बात सामने आई। समस्या बताने के दौरान उनके व्यवहार को लेकर नाराजगी भी जताई गई। यात्रियों की सुविधा से जुड़ी समस्या पर समाधान की जानकारी देने के बजाय बातचीत का इस तरह का रुख चर्चा का विषय बना। लोगों का कहना है कि जब ट्रेन परिचालन बाधित होने के कारण यात्री पहले से परेशान हैं, तब जिम्मेदार अधिकारी से समस्या सुनने और समाधान बताने की उम्मीद रहती है।
सवाल यह है कि जब यात्री अपनी मूलभूत समस्या लेकर स्टेशन प्रबंधन तक पहुंचे और जवाब में गाली-गलौज सुनने को मिले, तो अपनी शिकायत लेकर वह आखिर जाए कहां? रेलवे स्टेशन यात्रियों की सुविधा के लिए होता है और ऐसे में समस्या सुनना तथा सम्मानजनक तरीके से जवाब देना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी का हिस्सा है। कई यात्रियों ने बताया कि ट्रेनों के रद्द होने और परिचालन में बदलाव की जानकारी उन्हें पहले से स्पष्ट रूप से नहीं मिल सकी। इसी वजह से वे दूर-दराज से तीनपहाड़ स्टेशन पहुंच गए। यात्रियों ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में स्टेशन पर नियमित उद्घोषणा और स्पष्ट सूचना व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि लोगों को अनावश्यक रूप से स्टेशन तक नहीं आना पड़े।
मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना की बसों में बढ़ी भीड़
रेल परिचालन प्रभावित होने के बाद सड़क मार्ग पर यात्रियों का दबाव बढ़ गया। मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना की बसों में भी सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ देखने को मिली। साहिबगंज से तीनपहाड़, बरहरवा, हिरणपुर, लिट्टीपाड़ा और पाकुड़ की ओर जाने वाले यात्रियों ने बड़ी संख्या में बसों का सहारा लिया। बस संचालकों के अनुसार, रेल परिचालन प्रभावित होने के कारण यात्रियों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ गई है। ट्रेन नहीं मिलने के कारण कई यात्रियों को सड़क मार्ग से अपने गंतव्य तक जाने के लिए वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ा। ट्रेन नहीं मिलने के कारण यात्रियों को टोटो और टेंपो का भी सहारा लेना पड़ा। इस दौरान कुछ यात्रियों ने अधिक किराया लिए जाने की शिकायत की। यात्रियों का कहना था कि रेल सेवा प्रभावित होने की मजबूरी में उन्हें वैकल्पिक वाहनों का इस्तेमाल करना पड़ा और इसके लिए अतिरिक्त किराया देना पड़ा। यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि तीनपहाड़ स्टेशन का बंद शौचालय को 24 घंटा चालू रखा जाए , ट्रेनों के परिचालन की स्थिति की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए तथा परिचालन प्रभावित रहने तक यात्रियों के लिए पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। रेल लाइन पर आई समस्या का समाधान रेलवे अपने स्तर पर कर रहा है, लेकिन यात्रियों की बुनियादी सुविधाओं और उनके साथ व्यवहार को लेकर भी जवाबदेही तय होना जरूरी है। ट्रेन कब सामान्य होगी, यह परिस्थितियां तय करेंगी, लेकिन यात्री की समस्या सुनना, उचित जानकारी देना और सम्मानजनक व्यवहार करना स्टेशन प्रबंधन के स्तर पर सुनिश्चित किया जा सकता है।