
सोचो साथ क्या जायेगा? - पं० भरत उपाध्याय
रामायण के अंत में सीता माता धरती में समा गईं ।भगवान श्री राम ने जल समाधि ले ली। महाभारत का अंत भगवान श्री कृष्ण का निधन और पांडवों की मृत्यु हो गई। जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु ही है। और दुनिया चलती रहती है कोई किसी के लिए नहीं रुकता ।कंचन जैसी काया भी एक दिन भद्दी दिखाई देने लगेगी ।झुर्रियां पड़ जाएगी। खुद का शरीर ही हमेशा साथ नहीं देता तब दूसरा कौन साथ देगा। यहां हमेशा के लिए कुछ भी नहीं है ।इसलिए सात पीढ़ियों के लिए इकट्ठा करना बंद करो। उतना ही कमाओ जीतने में किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े। यहां जीने आए हो। शौक पूरे करो। उम्र भाग रही है ।इकट्ठा किया हुआ कुछ भी साथ नहीं जाएगा। सब यहीं रह जाएगा। एक भक्त ने किसी संत से पूछा मुझे भगवान नहीं मिले, कैसे मिलेंगे बताएं? संत बोले भगवान तो हर जगह हैं सर्वव्यापी हैं !पर तुमने एस एम एस नहीं किया होगा। एक बार एसएमएस करना शुरू करो स्वयं मिल जाएंगे। पर एसएमएस कहां से करूं ,नंबर तो है ही नहीं भगवान का! अच्छा! एकबार एसएमएस का अर्थ समझ लो। एस- सच्चे, एम- मन से , एस-स्मरण अर्थात सच्चे मन से सुमिरन करो तुरंत मिल जाएंगे।