
चाँद पर इंसान का वजन तो करीब 6 गुना कम हो जाएगा, लेकिन शरीर की परेशानी इतनी आसान नहीं होगी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इंसानी हड्डियां और मांसपेशियां कम गुरुत्व में लंबे समय तक मजबूत रह पाएंगी?
चाँद की सतह पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी का करीब एक-छठा यानी लगभग 16.5% है। इसलिए पृथ्वी पर अगर आपका वजन 60 किलो है, तो चाँद पर वही शरीर करीब 10 किलो के वजन जैसा महसूस होगा।
लेकिन यहां एक बड़ा फर्क है—वजन कम होना और शरीर का हल्का हो जाना एक ही बात नहीं है। शरीर का द्रव्यमान वही रहता है, बस उसे नीचे खींचने वाला गुरुत्व कम हो जाता है।
पृथ्वी पर आपकी हड्डियों और मांसपेशियों को हर दिन शरीर का भार संभालना पड़ता है। यही लगातार मैकेनिकल लोड उन्हें मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। कम गुरुत्व में यह दबाव बहुत कम हो जाएगा।
अंतरिक्ष में लंबे समय तक माइक्रोग्रैविटी में रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों में हड्डियों की खनिज घनता औसतन करीब 1 से 1.5 प्रतिशत प्रति महीने तक घट सकती है। मांसपेशियां भी कमजोर और छोटी होने लगती हैं, जिसे मसल एट्रॉफी कहा जाता है।
हालांकि चाँद की स्थिति अंतरिक्ष स्टेशन जैसी लगभग शून्य गुरुत्व वाली नहीं है। वहां कुछ गुरुत्व मौजूद है, इसलिए शरीर पर असर माइक्रोग्रैविटी की तुलना में कम हो सकता है। लेकिन वैज्ञानिकों के पास अभी लंबे समय तक चाँद के गुरुत्व में रहने वाले इंसानों का पर्याप्त सीधा डेटा नहीं है।
कुछ शोधों के मुताबिक 0.4 गुना पृथ्वी के गुरुत्व से कम वातावरण लंबे समय में हड्डियों, मांसपेशियों और कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस को पृथ्वी जैसी स्थिति में बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता। चाँद का गुरुत्व इससे भी काफी कम है।
इसी वजह से भविष्य के चंद्र मिशनों में रोजाना रेजिस्टेंस ट्रेनिंग, कार्डियो एक्सरसाइज और सही डाइट बहुत जरूरी होगी। नासा पहले से ही ऐसे एक्सरसाइज सिस्टम पर काम कर रहा है, ताकि अंतरिक्ष यात्रियों की हड्डियों और मांसपेशियों को ज्यादा से ज्यादा मजबूत रखा जा सके।
और एक बात साफ है—हड्डियां वहां “गलेंगी” नहीं, बल्कि लंबे समय तक कम भार मिलने से उनकी मजबूती और खनिज घनता घट सकती है।
अगर आपको चाँद पर रहने का मौका मिले, तो क्या आप कम गुरुत्व में महीनों बिताने का जोखिम उठाएंगे?
ओरिजन सोर्स: नासा मानव अंतरिक्ष शोध
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Bihar, India | Sep 12, 2026