
अपने निरंकार के प्रति जागे हुए ज़िन्दगी को जियो : समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया
समर्थगुरु धारा संघ हिमाचल प्रदेश के स्टेट कोऑर्डिनेटर और समर्थगुरु धारा हिमाचल प्रदेश के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि समर्थगुरु धारा के अनुभवी आचार्य मां शशि खुल्लर जी ने बहुत ही प्रभावशाली एवं मनमोहक ढंग से सभी साधकों को नवरात्रि की
महिमा के गहरे सूत्र बताते हुए ऊर्जा ध्यान का प्रयोग करवाया।
हिमाचल एवं देश की सभी जगहों से, मित्रों ने ध्यान एवं सत्संग का आनंद लिया।
आज ट्विटर के माध्यम से समर्थगुरु धाम, मुरथल के संस्थापक समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी ने बताया कि
तुम भी किसी कामिल मुर्शिद को खोजो, उससे जागने की कला जानो और अपने स्वरूप के प्रति, अपनी आत्मीयता
के प्रति, अपने निराकार के प्रति, अपने निरंकार के प्रति जागे हुए ज़िन्दगी को जियो। हमारी आत्मा में ज्ञाता भी है और ज्ञेय भी है। ज्ञाता बनकर के आत्मा के खजाने को हम देख पाते हैं और ज्ञेय बन करके ज्ञाता के द्वारा देखे जा रहे हैं। जिस दिन यह जान लोगे उस दिन तुम आत्मज्ञानी हो गए।
आचार्य कुंजबिहारी जी ने समर्थगुरु धाम के अगामी प्रोग्रामों के लिए मित्रों को निमंत्रण दिया। समर्थगुरु संघ हिमाचल की ओर से हर सप्ताह बुधवार को निशुल्क ध्यान व सत्संग का आयोजन होता हैं। सभी साधकों का, स्वामी केतन जी, स्वामी ऋषभ जी, मां प्रार्थना जी और टीम हिमाचल का बहुत-बहुत धन्यवाद किया।