
10 साल से अधूरा पड़ा राजकीय उच्च विद्यालय शौर का अतिरिक्त भवन, 77.51 लाख में से 46.72 लाख अभी भी शेष
SMC ने पिछले वर्ष भी आरसी पांगी को भेजा था रिमाइंडर, लेकिन कार्रवाई का इंतजार; चार कमरों के निर्माण में एक दशक लगने पर उठे सवाल
पांगी, 8 सितंबर।
राजकीय उच्च विद्यालय शौर में निर्माणाधीन अतिरिक्त भवन पिछले करीब एक दशक से अधूरा पड़ा है। विद्यालय परिसर में खड़ा यह अधूरा भवन अब अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। स्थानीय लोगों और विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) की ओर से बार-बार इस मामले को उठाए जाने के बावजूद निर्माण कार्य को पूरा करवाने की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाई है।
विद्यालय से संबंधित उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार अतिरिक्त कमरों के निर्माण के लिए वर्ष 2016-17 से वर्ष 2024-25 तक कुल 77.51 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करवाई गई। दस्तावेज में दर्ज विवरण के मुताबिक वर्ष 2016-17 में 0.50 लाख, 2017-18 में 7 लाख, 2018-19 में 10 लाख, 2019-20 में 60 लाख तथा वर्ष 2024-25 में 0.01 लाख रुपये की राशि दर्शाई गई है।
दस्तावेज में यह भी उल्लेखित है कि कुल 77.51 लाख रुपये के बजट में से 30.79 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि 46.72 लाख रुपये की राशि अभी विभाग के पास शेष है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब निर्माण के लिए बजट उपलब्ध करवाया गया है और राशि का एक बड़ा हिस्सा अभी भी शेष है, तो आखिर भवन का निर्माण वर्षों से अधूरा क्यों पड़ा है?
SMC ने भी उठाई आवाज, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) की ओर से पिछले वर्ष भी आवासीय आयुक्त एवं एसडीएम पांगी को रिमाइंडर भेजकर अधूरे भवन की स्थिति से अवगत करवाया गया था। बावजूद इसके अभी तक निर्माण कार्य को पूरा करवाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाने की बात सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय में अतिरिक्त कमरों की आवश्यकता विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा रहने के कारण सरकारी धन का उपयोग भी सवालों के घेरे में आ रहा है और विद्यालय को मिलने वाली अतिरिक्त आधारभूत सुविधा का लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहा है।
‘10 साल में चार कमरे नहीं बन पाए तो आगे क्या होगा?’
ग्राम पंचायत शौर के लोगों के बीच अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि यदि एक विद्यालय के अतिरिक्त भवन के कुछ कमरों के निर्माण में लगभग दस वर्ष लग सकते हैं, तो क्षेत्र में अन्य विकास कार्यों की रफ्तार का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
अधूरा भवन लगातार मौसम की मार झेल रहा है। यदि समय रहते इसकी सुध नहीं ली गई तो स्थानीय लोगों को आशंका है कि यह निर्माणाधीन भवन धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो सकता है, जिससे अब तक खर्च की गई सरकारी राशि का उद्देश्य भी अधूरा रह जाएगा।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन तथा संबंधित विभाग से मांग की है कि राजकीय उच्च विद्यालय शौर के अधूरे अतिरिक्त भवन का मौके पर निरीक्षण करवाकर निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए, शेष 46.72 लाख रुपये की राशि का उपयोग सुनिश्चित किया जाए और भवन का निर्माण निर्धारित समयसीमा में पूरा करवाया जाए।
लोगों का कहना है कि शिक्षा से जुड़े भवनों को वर्षों तक अधूरा छोड़ना विद्यार्थियों के हित में नहीं है। अब जरूरत केवल आश्वासन की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू करवाकर उसे पूरा करने की है।
सवाल अब भी वही है—जब बजट उपलब्ध है, राशि शेष है और SMC लगातार मामला उठा रही है, तो राजकीय उच्च विद्यालय शौर का भवन आखिर कब पूरा होगा?
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Saach, Chamba | Sep 8, 2026