
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में शुक्रवार देर रात करीब 2 से 3 बजे शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। हादसे के वक्त NICU में 20 से अधिक नवजात शिशु भर्ती थे। आग एक सॉकेट से शुरू हुई और तेजी से बच्चों की डोलियों के कपड़ों व प्लास्टिक के सामान तक फैल गई। इस घटना में एक ही डोली में रखे तीन नवजात बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए।
आग लगते ही अस्पताल कर्मचारियों ने अग्निशामक यंत्रों से लपटों पर काबू पाने का प्रयास किया और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्राथमिक उपचार के बाद, 6 से 12 दिन के तीनों झुलसे हुए बच्चों को बेहतर इलाज के लिए सुबह करीब 5 बजे जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। हालांकि, जबलपुर ले जाते समय रास्ते में ही आदित्य वर्मा की नवजात बच्ची ने दम तोड़ दिया। बच्ची का जन्म हादसे से कुछ घंटे पहले रात 10:30 बजे हुआ था।
छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक सर्जन की अनुपलब्धता के कारण बच्चों को जबलपुर रेफर किया गया था। वहां अन्य दो बच्चों का इलाज जारी है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से इलाज का पूरा खर्च उठाने की गुहार लगाई है, क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और अस्पताल प्रबंधन ने सुरक्षा मानकों की कमी और हादसे के सटीक कारणों की गहन जांच शुरू कर दी है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला शनिवार शाम 8 बजे जबलपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने आईसीयू में भर्ती बच्चों का हाल जाना और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। डिप्टी सीएम ने सरकार की तरफ से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना को बच्चों की चिकित्सा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने के कड़े निर्देश भी दिए।
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