
*ऑपरेशन मदाविकाढ़त: दिन में बहादुर बनकर बेचता था कंबल, रात को रमेश बनकर घोलता था नशा; ANTF ने 7 साल से फरार 25 हजार के इनामी को दबोचा*
• शक्ल मिलने का फायदा उठा भाई के आधार कार्ड से पुलिस को दो बार दे चुका था गच्चा; ससुराल के मृत्युभोज से लौटते ही मध्य प्रदेश में धरा गया
जयपुर से कमलेश आमेटा
जयपुर 22 जून। राजस्थान को नशामुक्त बनाने की दिशा में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स अपराधियों पर काल बनकर टूट रही है। लगातार बैक-टू-बैक सफल ऑपरेशन्स के जरिए फरार तस्करों को सलाखों के पीछे भेजने के सिलसिले में एएनटीएफ ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने ऑपरेशन मदाविकाढ़त चलाकर पिछले 7 वर्षों से फरार चल रहे और फलोदी पुलिस द्वारा घोषित 25 हजार रुपये के इनामी मादक पदार्थ तस्कर रमेश बंजारा को मध्य प्रदेश के नीमच से गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है।
ए.एन.टी.एफ महानिरीक्षक पुलिस श्री विकास कुमार ने बताया कि महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में टीम जनता के सहयोग से नशे के कारोबारियों पर कड़ा प्रहार कर रही है। आरोपी टीम के शिकंजे में आने वाला फराक तत्वों की लिस्ट में 66वां शिकार है।
*क्या है ऑपरेशन के नाम "मदाविकाढ़त" का अर्थ*
आईजी विकास कुमार ने बताया कि इस अनूठे ऑपरेशन का नाम तीन शब्दों को जोड़कर रखा गया है:
* मद = नशा
* आविक = कंबल
* आढ़त = थोक बिक्री का काम
आरोपी रमेश बंजारा असल में लोगों को नशे का जहर बांटने के लिए कंबल का ही चोला ओढ़े हुए था, इसलिए इस पूरे नेक्सस को 'मदाविकाढ़त' नाम दिया गया।
*डॉ. जैकाल और मिस्टर हाइड जैसा दोहरा किरदार*
आरोपी रमेश पढ़ा-लिखा नहीं है, लेकिन बेहद शातिर है. वह मोटरसाइकिल पर घूम-घूमकर राजस्थान और गुजरात में कंबल बेचने का धंधा करता था। लेकिन मेहनत की कमाई रास न आने के कारण उसने तस्करों से दोस्ती कर ली और कंबल बेचने की आड़ में मादक पदार्थों की तस्करी का काला साम्राज्य खड़ा कर लिया।
उसका किरदार डॉ. जैकाल और मिस्टर हाइड जैसा था। वह दिन में शराफत का चोला ओढ़कर बहादुर नाम का एक सीधा-साधा कंबल विक्रेता बनता, लेकिन रात होते ही वह रमेश बनकर नशे की बड़ी खेप सप्लाई करने लगता था। गांव वालों की नजर में वह एक बेहद मेहनती मजदूर था।
*चार राज्यों में फैलाया नेटवर्क, कंबल की आड़ में बनाए एजेंट*
रमेश बंजारा देखते ही देखते डोडा-चूरा का एक बड़ा आढ़तिया बन गया। उसने राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु जैसे चार राज्यों में अपना जाल फैलाया। वह मोटरसाइकिल पर कंबल बेचने के बहाने इन राज्यों में घूमता, वहां तस्करी के लिए परफेक्ट लोगों को चिन्हित करता और उन्हें मोटे मुनाफे का लालच देकर अपना एजेंट बना लेता था। बाद में वह इन एजेंटों को अपने घर बुलाकर माल की बड़ी खेप सौंपता और नेटवर्क का संचालन घर बैठे ही करने लगा।
*भाई का नकाब और आधार कार्ड दिखाकर पुलिस को दी मात*
रमेश की शक्ल उसके भाई बहादुर से काफी हद तक मिलती-जुलती थी। इसी हमशक्ल होने का फायदा उठाकर उसने पुलिस को छकाने का खतरनाक प्लान बनाया। जब भी पुलिस या एएनटीएफ की टीम उसे पकड़ने उसके घर दबिश देती, वह पूरी ठसक और चतुराई के साथ अपने भाई बहादुर का असली आधार कार्ड दिखाकर खुद को बहादुर सिद्ध कर देता और घर पर ही आराम से बैठा रहता। इस पैंतरे से वह दो बार एएनटीएफ की टीम को भी गच्चा दे चुका था।
*पकड़े जाने की पटकथा: ससुराल के सूत्र और 7 दिन का सस्पेंस*
शातिर तस्कर को दबोचने के लिए एएनटीएफ की टीम ने एक अलग रणनीति बनाई। टीम ने रमेश के ससुराल ग्राम गुंदारेत का पता लगाया और वहां खुफिया नेटवर्क सक्रिय किया। तब जाकर पुख्ता हुआ कि रमेश और बहादुर दो अलग-अलग व्यक्ति हैं। दोनों की पहचान साफ करने के लिए एएनटीएफ को 7 दिन का समय लगा और दो अलग-अलग टीमें दोनों भाइयों की निगरानी के लिए लगाई गईं।
इसी दौरान ससुराल के सूत्र से इनपुट मिला कि रमेश की पत्नी के एक खास रिश्तेदार की मृत्यु हो गई है, जिसके मृत्युभोज कार्यक्रम में रमेश अपनी पत्नी के साथ निश्चित रूप से आएगा. एएनटीएफ ने पीछा करना शुरू किया। रमेश जब तक राजस्थान की सीमा में रहा, तब तक पकड़े जाने के डर से कच्चे-पक्के रास्तों से छुपता-छुपाता रहा। टीम ने सामाजिक कार्यक्रम की गरिमा को देखते हुए उसे मृत्युभोज में पकड़ना उचित नहीं समझा और सही मौके का इंतजार किया।
*एमपी बॉर्डर में घुसते ही बना शेर, पत्नी ने पति को बताया जेठ*
ससुराल से निकलकर जैसे ही रमेश मध्य प्रदेश की सीमा में दाखिल हुआ, उसका डर खत्म हो गया और वह खुद को सुरक्षित समझकर शेर की तरह मुख्य मार्ग पर इत्मीनान से मोटरसाइकिल दौड़ाने लगा। पहले से घात लगाए बैठी एएनटीएफ की टीम ने आगे बढ़कर घेरा डाला और मोटरसाइकिल रुकवा ली।
हमेशा की तरह रमेश खुद को बहादुर बताता रहा। हद तो तब हो गई जब पीछे बैठी उसकी पत्नी भी पुलिस को गुमराह करने के लिए अपने ही पति को जेठ बताने लगी। लेकिन एएनटीएफ के पास सटीक जानकारी थी। टीम ने जब महिला से पूछा, अगर यह तुम्हारा जेठ है, तो तुम्हारा पति तुम्हारे साथ ससुराल क्यों नहीं आया और साथ ही पुलिस ने देखा कि महिला ने उस व्यक्ति के कंधे पर हाथ रख रखा था, जिससे साफ हो गया कि वह जेठ नहीं बल्कि रमेश ही है। पुलिस ने तुरंत उसे धर-दबोचा।
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