
#तृणमूल_कांग्रेस में बगावत का खुला ऐलान, एक-दो दिन में टूट जाएगी ममता बनर्जी की पार्टी
संगरिया की आवाज़।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी इस समय सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। प्रदेश में अटकलें लगाई जा रही है कि टीएमसी टूट सकती है और ममता बनर्जी के हाथ से पार्टी और सिंबल दोनों जा सकते हैं। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने दावा किया है कि अगले एक-दो दिन में उसके पास इतने विधायक हो जाएंगे कि वह विधानसभा में अलग समूह बनाकर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस घोषित करने का दावा पेश कर सकेगा। साथ ही पार्टी के चुनाव चिन्ह पर भी अधिकार जताने की तैयारी चल रही है।
महाराष्ट्र की तरह बंगाल में होगा राजनीतिक घटनाक्रम
शुभेन्दु सरकार में मंत्री तापस रॉय ने दावा किया कि महाराष्ट्र की तरह बंगाल में भी बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम घटने वाला है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के बागी विधायक विधानसभा अध्यक्ष के संपर्क में हैं।
TMC के बागी गुट के नेताओं का मानना है कि वे महाराष्ट्र में हुई शिवसेना की टूट की तर्ज पर आगे बढ़ सकते हैं। तीन साल पहले शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे ने बड़ी संख्या में विधायकों के समर्थन से अलग गुट बनाया था और बाद में पार्टी का नाम व चुनाव चिन्ह भी हासिल कर लिया था।
TMC ने दो विधायकों को किया निष्कासित
हाल ही में टीएमसी ने अपने दो विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर निष्कासित कर दिया। मीडिया रिपोर्ट् के मुताबिक ऋतब्रत बनर्जी लगातार विधायकों के हस्ताक्षर जुटाने में लगे हैं। दल-बदल कानून से बचने के लिए उन्हें पार्टी के कम से कम दो-तिहाई विधायकों का समर्थन चाहिए।
52 विधायकों की जरूरत
बता दें कि विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने 80 सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन दो विधायकों के निष्कासित करने पर पार्टी के विधायकों की संख्या 78 हो गई है। ऐसे में बागी गुट को कम से कम 52 विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। यदि यह संख्या पूरी हो जाती है तो विधानसभा अध्यक्ष बागी गुट को तृणमूल कांग्रेस विधायक दल का वैध प्रतिनिधि मान सकते हैं।
बुधवार या गुरुवार को बड़ा कदम संभव
बागी गुट के सूत्रों का दावा है कि 50 से अधिक विधायक एक साथ विधानसभा पहुंचकर अध्यक्ष को अपना समर्थन पत्र सौंप सकते हैं। इसके लिए बुधवार या गुरुवार का दिन अहम माना जा रहा है।
ऋतब्रत बनर्जी ने भी अप्रत्यक्ष रूप से संकेत दिए हैं। उन्होंने हावड़ा जिले के सभी तृणमूल विधायकों से बुधवार सुबह मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल होने की अपील की। माना जा रहा है कि बैठक के बाद विधायक सीधे विधानसभा पहुंच सकते हैं।
जावेद अहमद खान के आरोपों से बढ़ा संकट
सोमवार रात तक कई पूर्व मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के भी बागी गुट के समर्थन में आने की खबरें सामने आईं थी। इनमें कसबा विधायक जावेद अहमद खान का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है।
जावेद ने मंगलवार को सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर लोकतंत्र खत्म हो चुका है और महत्वपूर्ण फैसले पहले से तय कर लिए जाते हैं। बैठकों में नेताओं की भूमिका केवल औपचारिक रह गई है।
ममता के लिए बढ़ी चिंता
बता दें कि बागी गुट अपने दावे के मुताबिक संख्या जुटाने में सफल हो जाता है तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने पार्टी और चुनाव चिन्ह दोनों पर नियंत्रण बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो सकती है। बागी विधायक विपक्ष के नेता पद पर भी दावा कर सकते हैं।
बगावत के संकेत रविवार को ही मिल गए थे, जब ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई अहम बैठक में पार्टी के करीब 80 विधायकों में से केवल 20 विधायक ही पहुंचे थे। सूत्रों का दावा है कि उसी रात तक लगभग 30 विधायक बागी गुट के संपर्क में आ चुके थे।
इसके अलावा मंगलवार को पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के विरोध में ममता बनर्जी ने प्रदर्शन किया था। इस धरना प्रदर्शन में टीएमसी के 8 विधायक और 6 सांसद ही शामिल हुए। बाकी विधायकों और सांसदों ने इससे दूरी बनाई रखी।
संगरिया की आवाज़
Indian National Congress
Bharatiya Janata Party (BJP)