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#तृणमूल_कांग्रेस में बगावत का खुला ऐलान, एक-दो दिन में टूट जाएगी ममता बनर्जी की पार्टी संगरिया की आवाज़। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी इस समय सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। प्रदेश में अटकलें लगाई जा रही है कि टीएमसी टूट सकती है और ममता बनर्जी के हाथ से पार्टी और सिंबल दोनों जा सकते हैं। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने दावा किया है कि अगले एक-दो दिन में उसके पास इतने विधायक हो जाएंगे कि वह विधानसभा में अलग समूह बनाकर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस घोषित करने का दावा पेश कर सकेगा। साथ ही पार्टी के चुनाव चिन्ह पर भी अधिकार जताने की तैयारी चल रही है। महाराष्ट्र की तरह बंगाल में होगा राजनीतिक घटनाक्रम शुभेन्दु सरकार में मंत्री तापस रॉय ने दावा किया कि महाराष्ट्र की तरह बंगाल में भी बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम घटने वाला है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के बागी विधायक विधानसभा अध्यक्ष के संपर्क में हैं। TMC के बागी गुट के नेताओं का मानना है कि वे महाराष्ट्र में हुई शिवसेना की टूट की तर्ज पर आगे बढ़ सकते हैं। तीन साल पहले शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे ने बड़ी संख्या में विधायकों के समर्थन से अलग गुट बनाया था और बाद में पार्टी का नाम व चुनाव चिन्ह भी हासिल कर लिया था। TMC ने दो विधायकों को किया निष्कासित हाल ही में टीएमसी ने अपने दो विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर निष्कासित कर दिया। मीडिया रिपोर्ट् के मुताबिक ऋतब्रत बनर्जी लगातार विधायकों के हस्ताक्षर जुटाने में लगे हैं। दल-बदल कानून से बचने के लिए उन्हें पार्टी के कम से कम दो-तिहाई विधायकों का समर्थन चाहिए। 52 विधायकों की जरूरत बता दें कि विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने 80 सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन दो विधायकों के निष्कासित करने पर पार्टी के विधायकों की संख्या 78 हो गई है। ऐसे में बागी गुट को कम से कम 52 विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। यदि यह संख्या पूरी हो जाती है तो विधानसभा अध्यक्ष बागी गुट को तृणमूल कांग्रेस विधायक दल का वैध प्रतिनिधि मान सकते हैं। बुधवार या गुरुवार को बड़ा कदम संभव बागी गुट के सूत्रों का दावा है कि 50 से अधिक विधायक एक साथ विधानसभा पहुंचकर अध्यक्ष को अपना समर्थन पत्र सौंप सकते हैं। इसके लिए बुधवार या गुरुवार का दिन अहम माना जा रहा है। ऋतब्रत बनर्जी ने भी अप्रत्यक्ष रूप से संकेत दिए हैं। उन्होंने हावड़ा जिले के सभी तृणमूल विधायकों से बुधवार सुबह मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल होने की अपील की। माना जा रहा है कि बैठक के बाद विधायक सीधे विधानसभा पहुंच सकते हैं। जावेद अहमद खान के आरोपों से बढ़ा संकट सोमवार रात तक कई पूर्व मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के भी बागी गुट के समर्थन में आने की खबरें सामने आईं थी। इनमें कसबा विधायक जावेद अहमद खान का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। जावेद ने मंगलवार को सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर लोकतंत्र खत्म हो चुका है और महत्वपूर्ण फैसले पहले से तय कर लिए जाते हैं। बैठकों में नेताओं की भूमिका केवल औपचारिक रह गई है। ममता के लिए बढ़ी चिंता बता दें कि बागी गुट अपने दावे के मुताबिक संख्या जुटाने में सफल हो जाता है तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने पार्टी और चुनाव चिन्ह दोनों पर नियंत्रण बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो सकती है। बागी विधायक विपक्ष के नेता पद पर भी दावा कर सकते हैं। बगावत के संकेत रविवार को ही मिल गए थे, जब ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई अहम बैठक में पार्टी के करीब 80 विधायकों में से केवल 20 विधायक ही पहुंचे थे। सूत्रों का दावा है कि उसी रात तक लगभग 30 विधायक बागी गुट के संपर्क में आ चुके थे। इसके अलावा मंगलवार को पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के विरोध में ममता बनर्जी ने प्रदर्शन किया था। इस धरना प्रदर्शन में टीएमसी के 8 विधायक और 6 सांसद ही शामिल हुए। बाकी विधायकों और सांसदों ने इससे दूरी बनाई रखी। संगरिया की आवाज़ Indian National Congress Bharatiya Janata Party (BJP)

Sangaria, Hanumangarh | Jun 3, 2026

MORE NEWS

Rajasthan Police 
Bikaner Police 
#श्रीगंगानगर ACB की कार्रवाई #ट्रैप
पटवारी अंकुश कुमार 50 हजार की रिश्वत लेते किया गिरफ्तार, खाता विभाजन की एवज में मांगी थी 1 लाख की रिश्वत,
संगरिया की आवाज़। 
पहली किस्त के रूप में 50 हजार रु. लेते रंगेहाथ किया गिरफ्तार, #रिडमलसर क्षेत्र में ACB स्पेशल यूनिट बीकानेर की कार्रवाई, पुलिस निरीक्षक #इन्द्रकुमार के नेतृत्व में हुई ट्रैप कार्रवाई, हलका 68 एलएनपी, तहसील पदमपुर में तैनात था पटवारी, परिवादी से संयुक्त खाते के विभाजन के बदले मांगी थी रिश्वत, ACB टीम आरोपी से पूछताछ में जुटी, आगे की कार्रवाई जारी, ASP आशीष कुमार के निर्देशन में की गई कार्रवाई।
संगरिया की आवाज़ 
Government of Rajasthan Hanumangarh Police संगरिया पुलिस Ganganagar Police

Rajasthan Police Bikaner Police #श्रीगंगानगर ACB की कार्रवाई #ट्रैप पटवारी अंकुश कुमार 50 हजार की रिश्वत लेते किया गिरफ्तार, खाता विभाजन की एवज में मांगी थी 1 लाख की रिश्वत, संगरिया की आवाज़। पहली किस्त के रूप में 50 हजार रु. लेते रंगेहाथ किया गिरफ्तार, #रिडमलसर क्षेत्र में ACB स्पेशल यूनिट बीकानेर की कार्रवाई, पुलिस निरीक्षक #इन्द्रकुमार के नेतृत्व में हुई ट्रैप कार्रवाई, हलका 68 एलएनपी, तहसील पदमपुर में तैनात था पटवारी, परिवादी से संयुक्त खाते के विभाजन के बदले मांगी थी रिश्वत, ACB टीम आरोपी से पूछताछ में जुटी, आगे की कार्रवाई जारी, ASP आशीष कुमार के निर्देशन में की गई कार्रवाई। संगरिया की आवाज़ Government of Rajasthan Hanumangarh Police संगरिया पुलिस Ganganagar Police

Sangaria, Hanumangarh | Jun 3, 2026

#संगरिया का #अंडरपास: अदालत के आदेशों से निकला रास्ता, अब श्रेय लेने वालों की भी लगने वाली  है कतार
संगरिया की आवाज़। 
संगरिया शहर में वर्षों से जिस #अंडरब्रिज (#आरयूबी) का इंतजार किया जा रहा था, वह अब लगभग तैयार है। कुछ ही दिनों में यह मार्ग शहर और गुरु नानक बस्ती के बीच आवागमन का नया विकल्प बन जाएगा। इसे शहर का "इमरजेंसी डोर" भी कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि रेलवे फाटक बंद होने की स्थिति में यह मार्ग हजारों लोगों को राहत प्रदान करेगा।
लेकिन इस उपलब्धि की सबसे दिलचस्प बात अंडरपास का निर्माण नहीं, बल्कि उसके श्रेय को लेकर शुरू हुई प्रतिस्पर्धा है। शहर में ऐसा माहौल बन गया है मानो यह #अंडरपास किसी एक नेता, किसी एक संगठन या किसी एक व्यक्ति के प्रयासों से बनकर तैयार हुआ हो।
सच्चाई यह है कि वर्षों तक यह परियोजना फाइलों, बैठकों, आश्वासनों और घोषणाओं के बीच उलझी रही। लोगों ने मांग उठाई, ज्ञापन दिए, धरने हुए, नेताओं ने मंचों से वादे किए, लेकिन जमीन पर काम की रफ्तार वैसी नहीं दिखी जैसी जनता अपेक्षा कर रही थी।
ऐसे समय में उपभोक्ता संरक्षण समिति संगरिया ने इस मुद्दे को केवल मांग तक सीमित नहीं रखा बल्कि कानूनी लड़ाई का रास्ता चुना। बताया जाता है कि समिति के प्रतिनिधियों ने लगभग 115 बार अदालतों और विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाए। लगातार पैरवी, दस्तावेजी संघर्ष और न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह मामला उस मुकाम तक पहुंचा जहां संबंधित विभागों को काम आगे बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
आज जब अंडरपास की दीवारों पर अंतिम रंग-रोगन चल रहा है और निर्माण कार्य लगभग पूरा होने की ओर है, तब शहर में एक नया दृश्य देखने को मिल रहा है। जो लोग वर्षों तक इस विषय पर मौन थे, वे भी अब सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर रहे हैं। कुछ लोग ऐसे अंदाज में बधाई स्वीकार कर रहे हैं मानो खुद उन्होंने फावड़ा उठाकर खुदाई की हो।
राजनीति का अपना स्वभाव है। जहां जनता को सुविधा मिलती है, वहां श्रेय लेने वालों की संख्या स्वतः बढ़ जाती है। चुनावी मौसम हो या न हो, उपलब्धियों के साथ तस्वीर खिंचवाने का अवसर कोई नहीं छोड़ना चाहता। संगरिया भी इससे अलग नहीं है।
कई सज्जन अब यह साबित करने में लगे हैं कि यदि उन्होंने एक बार किसी बैठक में अंडरपास का उल्लेख किया था, तो निर्माण का वास्तविक श्रेय उन्हीं को मिलना चाहिए। कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें निर्माण कार्य लगभग पूरा होने के बाद अचानक याद आया कि उन्होंने भी कभी इस विषय पर चिंता व्यक्त की थी।
हालांकि जनता सब देखती है। लोगों को यह भी याद रहता है कि कठिन समय में कौन मैदान में था और कौन केवल मंचों पर भाषण दे रहा था। अदालतों के चक्कर लगाने वाले, दस्तावेज जुटाने वाले और वर्षों तक संघर्ष करने वाले लोगों का योगदान जनता की स्मृति में दर्ज रहता है।
इस अंडरपास का सबसे बड़ा महत्व केवल एक सड़क मार्ग होना नहीं है। यह इस बात का प्रतीक है कि यदि कोई संगठन लगातार और व्यवस्थित तरीके से संघर्ष करे तो वर्षों से अटकी परियोजनाएं भी आगे बढ़ सकती हैं। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनहित याचिकाओं और न्यायिक हस्तक्षेप की शक्ति का भी उदाहरण है।
अब जब संगरिया को यह महत्वपूर्ण सुविधा मिलने जा रही है, तो आवश्यकता इस बात की है कि इसे राजनीतिक श्रेय की होड़ से ऊपर उठकर देखा जाए। यह पूरे शहर की उपलब्धि है। इसमें प्रशासन, न्यायपालिका, तकनीकी एजेंसियों और संघर्षरत नागरिकों का योगदान है।
फिर भी यदि श्रेय की होड़ जारी रहती है तो जनता मुस्कुराकर यही कहेगी—"जब गड्ढा खोदा जा रहा था तब कुछ लोग दिखाई नहीं दिए, लेकिन अब जब फीता कटने वाला है तो सबके हाथ में कैंची तैयार है।"

Vijay Singh Beniwal 
संगरिया की आवाज़ 
Government of Rajasthan
Adv Ashish Nehra Jaskaran Singh Gill Premsukh Godara  DhruvRaj Godara Jai Kaushik Sanjay Arya 
Vinod Bishnoi  हनुमानगढ़ रेल विकास संघ जिला रेल यात्री वेलफेयर एसोसिएशन, हनुमानगढ़

#संगरिया का #अंडरपास: अदालत के आदेशों से निकला रास्ता, अब श्रेय लेने वालों की भी लगने वाली है कतार संगरिया की आवाज़। संगरिया शहर में वर्षों से जिस #अंडरब्रिज (#आरयूबी) का इंतजार किया जा रहा था, वह अब लगभग तैयार है। कुछ ही दिनों में यह मार्ग शहर और गुरु नानक बस्ती के बीच आवागमन का नया विकल्प बन जाएगा। इसे शहर का "इमरजेंसी डोर" भी कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि रेलवे फाटक बंद होने की स्थिति में यह मार्ग हजारों लोगों को राहत प्रदान करेगा। लेकिन इस उपलब्धि की सबसे दिलचस्प बात अंडरपास का निर्माण नहीं, बल्कि उसके श्रेय को लेकर शुरू हुई प्रतिस्पर्धा है। शहर में ऐसा माहौल बन गया है मानो यह #अंडरपास किसी एक नेता, किसी एक संगठन या किसी एक व्यक्ति के प्रयासों से बनकर तैयार हुआ हो। सच्चाई यह है कि वर्षों तक यह परियोजना फाइलों, बैठकों, आश्वासनों और घोषणाओं के बीच उलझी रही। लोगों ने मांग उठाई, ज्ञापन दिए, धरने हुए, नेताओं ने मंचों से वादे किए, लेकिन जमीन पर काम की रफ्तार वैसी नहीं दिखी जैसी जनता अपेक्षा कर रही थी। ऐसे समय में उपभोक्ता संरक्षण समिति संगरिया ने इस मुद्दे को केवल मांग तक सीमित नहीं रखा बल्कि कानूनी लड़ाई का रास्ता चुना। बताया जाता है कि समिति के प्रतिनिधियों ने लगभग 115 बार अदालतों और विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाए। लगातार पैरवी, दस्तावेजी संघर्ष और न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह मामला उस मुकाम तक पहुंचा जहां संबंधित विभागों को काम आगे बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा। आज जब अंडरपास की दीवारों पर अंतिम रंग-रोगन चल रहा है और निर्माण कार्य लगभग पूरा होने की ओर है, तब शहर में एक नया दृश्य देखने को मिल रहा है। जो लोग वर्षों तक इस विषय पर मौन थे, वे भी अब सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर रहे हैं। कुछ लोग ऐसे अंदाज में बधाई स्वीकार कर रहे हैं मानो खुद उन्होंने फावड़ा उठाकर खुदाई की हो। राजनीति का अपना स्वभाव है। जहां जनता को सुविधा मिलती है, वहां श्रेय लेने वालों की संख्या स्वतः बढ़ जाती है। चुनावी मौसम हो या न हो, उपलब्धियों के साथ तस्वीर खिंचवाने का अवसर कोई नहीं छोड़ना चाहता। संगरिया भी इससे अलग नहीं है। कई सज्जन अब यह साबित करने में लगे हैं कि यदि उन्होंने एक बार किसी बैठक में अंडरपास का उल्लेख किया था, तो निर्माण का वास्तविक श्रेय उन्हीं को मिलना चाहिए। कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें निर्माण कार्य लगभग पूरा होने के बाद अचानक याद आया कि उन्होंने भी कभी इस विषय पर चिंता व्यक्त की थी। हालांकि जनता सब देखती है। लोगों को यह भी याद रहता है कि कठिन समय में कौन मैदान में था और कौन केवल मंचों पर भाषण दे रहा था। अदालतों के चक्कर लगाने वाले, दस्तावेज जुटाने वाले और वर्षों तक संघर्ष करने वाले लोगों का योगदान जनता की स्मृति में दर्ज रहता है। इस अंडरपास का सबसे बड़ा महत्व केवल एक सड़क मार्ग होना नहीं है। यह इस बात का प्रतीक है कि यदि कोई संगठन लगातार और व्यवस्थित तरीके से संघर्ष करे तो वर्षों से अटकी परियोजनाएं भी आगे बढ़ सकती हैं। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनहित याचिकाओं और न्यायिक हस्तक्षेप की शक्ति का भी उदाहरण है। अब जब संगरिया को यह महत्वपूर्ण सुविधा मिलने जा रही है, तो आवश्यकता इस बात की है कि इसे राजनीतिक श्रेय की होड़ से ऊपर उठकर देखा जाए। यह पूरे शहर की उपलब्धि है। इसमें प्रशासन, न्यायपालिका, तकनीकी एजेंसियों और संघर्षरत नागरिकों का योगदान है। फिर भी यदि श्रेय की होड़ जारी रहती है तो जनता मुस्कुराकर यही कहेगी—"जब गड्ढा खोदा जा रहा था तब कुछ लोग दिखाई नहीं दिए, लेकिन अब जब फीता कटने वाला है तो सबके हाथ में कैंची तैयार है।" Vijay Singh Beniwal संगरिया की आवाज़ Government of Rajasthan Adv Ashish Nehra Jaskaran Singh Gill Premsukh Godara DhruvRaj Godara Jai Kaushik Sanjay Arya Vinod Bishnoi हनुमानगढ़ रेल विकास संघ जिला रेल यात्री वेलफेयर एसोसिएशन, हनुमानगढ़

Sangaria, Hanumangarh | Jun 2, 2026

#संगरिया में वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान 
शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि एवं स्वच्छता अभियान
संगरिया की आवाज़। 
संगरिया। वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत मंगलवार को उपखंड अधिकारी Jai Kaushik  के निर्देशन में अधिकारियों व कर्मचारियों ने स्मारक क्षेत्र की साफ-सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया तथा भगत सिंह चौक एवं शहीद स्मारक पर स्थापित प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। 
विकास अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि पंचायत समिति परिसर में सभी अधिकारियों कर्मचारियों ने मिलकर शौचालयों और पार्क की सफाई की तथा पार्क में पक्षियों के लिए परिंडे बांधकर पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता जताई गई। ग्राम पंचायत स्तर पर भी इसी तरह के आयोजन कर ग्रामीणों को स्वच्छता और जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
राजीविका ब्लाक प्रबंधक रोशनी चौधरी ने बताया कि महिला समूहों ने "एक पेड़ मां के नाम " थीम पर रंगोली बनाकर और हाथों पर मेहंदी रचाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। कार्यक्रम में नागरिको को  जल संरक्षण का संकल्प दिलाया।
उपखंड अधिकारी जय कौशिक ने कहा कि इस तरह के सामुदायिक कार्यक्रमों से स्वच्छता और हरियालो राजस्थान के प्रति लोग जागरूक होंगे।
संगरिया की आवाज़ 
Government of Rajasthan Sangaria Matdaan Maha Abhiyaan

#संगरिया में वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि एवं स्वच्छता अभियान संगरिया की आवाज़। संगरिया। वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत मंगलवार को उपखंड अधिकारी Jai Kaushik के निर्देशन में अधिकारियों व कर्मचारियों ने स्मारक क्षेत्र की साफ-सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया तथा भगत सिंह चौक एवं शहीद स्मारक पर स्थापित प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। विकास अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि पंचायत समिति परिसर में सभी अधिकारियों कर्मचारियों ने मिलकर शौचालयों और पार्क की सफाई की तथा पार्क में पक्षियों के लिए परिंडे बांधकर पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता जताई गई। ग्राम पंचायत स्तर पर भी इसी तरह के आयोजन कर ग्रामीणों को स्वच्छता और जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। राजीविका ब्लाक प्रबंधक रोशनी चौधरी ने बताया कि महिला समूहों ने "एक पेड़ मां के नाम " थीम पर रंगोली बनाकर और हाथों पर मेहंदी रचाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। कार्यक्रम में नागरिको को जल संरक्षण का संकल्प दिलाया। उपखंड अधिकारी जय कौशिक ने कहा कि इस तरह के सामुदायिक कार्यक्रमों से स्वच्छता और हरियालो राजस्थान के प्रति लोग जागरूक होंगे। संगरिया की आवाज़ Government of Rajasthan Sangaria Matdaan Maha Abhiyaan

Sangaria, Hanumangarh | Jun 2, 2026

#तृणमूल_कांग्रेस में बगावत का खुला ऐलान, एक-दो दिन में टूट जाएगी ममता बनर्जी की पार्टी संगरिया की आवाज़। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी इस समय सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। प्रदेश में अटकलें लगाई जा रही है कि टीएमसी टूट सकती है और ममता बनर्जी के हाथ से पार्टी और सिंबल दोनों जा सकते हैं। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने दावा किया है कि अगले एक-दो दिन में उसके पास इतने विधायक हो जाएंगे कि वह विधानसभा में अलग समूह बनाकर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस घोषित करने का दावा पेश कर सकेगा। साथ ही पार्टी के चुनाव चिन्ह पर भी अधिकार जताने की तैयारी चल रही है। महाराष्ट्र की तरह बंगाल में होगा राजनीतिक घटनाक्रम शुभेन्दु सरकार में मंत्री तापस रॉय ने दावा किया कि महाराष्ट्र की तरह बंगाल में भी बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम घटने वाला है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के बागी विधायक विधानसभा अध्यक्ष के संपर्क में हैं। TMC के बागी गुट के नेताओं का मानना है कि वे महाराष्ट्र में हुई शिवसेना की टूट की तर्ज पर आगे बढ़ सकते हैं। तीन साल पहले शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे ने बड़ी संख्या में विधायकों के समर्थन से अलग गुट बनाया था और बाद में पार्टी का नाम व चुनाव चिन्ह भी हासिल कर लिया था। TMC ने दो विधायकों को किया निष्कासित हाल ही में टीएमसी ने अपने दो विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर निष्कासित कर दिया। मीडिया रिपोर्ट् के मुताबिक ऋतब्रत बनर्जी लगातार विधायकों के हस्ताक्षर जुटाने में लगे हैं। दल-बदल कानून से बचने के लिए उन्हें पार्टी के कम से कम दो-तिहाई विधायकों का समर्थन चाहिए। 52 विधायकों की जरूरत बता दें कि विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने 80 सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन दो विधायकों के निष्कासित करने पर पार्टी के विधायकों की संख्या 78 हो गई है। ऐसे में बागी गुट को कम से कम 52 विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। यदि यह संख्या पूरी हो जाती है तो विधानसभा अध्यक्ष बागी गुट को तृणमूल कांग्रेस विधायक दल का वैध प्रतिनिधि मान सकते हैं। बुधवार या गुरुवार को बड़ा कदम संभव बागी गुट के सूत्रों का दावा है कि 50 से अधिक विधायक एक साथ विधानसभा पहुंचकर अध्यक्ष को अपना समर्थन पत्र सौंप सकते हैं। इसके लिए बुधवार या गुरुवार का दिन अहम माना जा रहा है। ऋतब्रत बनर्जी ने भी अप्रत्यक्ष रूप से संकेत दिए हैं। उन्होंने हावड़ा जिले के सभी तृणमूल विधायकों से बुधवार सुबह मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल होने की अपील की। माना जा रहा है कि बैठक के बाद विधायक सीधे विधानसभा पहुंच सकते हैं। जावेद अहमद खान के आरोपों से बढ़ा संकट सोमवार रात तक कई पूर्व मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के भी बागी गुट के समर्थन में आने की खबरें सामने आईं थी। इनमें कसबा विधायक जावेद अहमद खान का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। जावेद ने मंगलवार को सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर लोकतंत्र खत्म हो चुका है और महत्वपूर्ण फैसले पहले से तय कर लिए जाते हैं। बैठकों में नेताओं की भूमिका केवल औपचारिक रह गई है। ममता के लिए बढ़ी चिंता बता दें कि बागी गुट अपने दावे के मुताबिक संख्या जुटाने में सफल हो जाता है तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने पार्टी और चुनाव चिन्ह दोनों पर नियंत्रण बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो सकती है। बागी विधायक विपक्ष के नेता पद पर भी दावा कर सकते हैं। बगावत के संकेत रविवार को ही मिल गए थे, जब ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई अहम बैठक में पार्टी के करीब 80 विधायकों में से केवल 20 विधायक ही पहुंचे थे। सूत्रों का दावा है कि उसी रात तक लगभग 30 विधायक बागी गुट के संपर्क में आ चुके थे। इसके अलावा मंगलवार को पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के विरोध में ममता बनर्जी ने प्रदर्शन किया था। इस धरना प्रदर्शन में टीएमसी के 8 विधायक और 6 सांसद ही शामिल हुए। बाकी विधायकों और सांसदों ने इससे दूरी बनाई रखी। संगरिया की आवाज़ Indian National Congress Bharatiya Janata Party (BJP) - Sangaria News