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संगरिया की आवाज़

@sangariakiaawaz
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<nis:link nis:type=tag nis:id=सादुलशहर nis:value=सादुलशहर nis:enabled=true nis:link/> नगरपालिका चुनाव 5
<nis:link nis:type=tag nis:id=हनुमानगढ़ nis:value=हनुमानगढ़ nis:enabled=true nis:link/> में ‘वोट पहले ही पड़ चुका था’, नाराज मतदाता ने दर्ज कराई शिकायत, चुनाव अधिकारी ने दी टेंडर वोट की अनुमती 
संगरिया की आवाज़। 
<nis:link nis:type=tag nis:id=गोलूवाला nis:value=गोलूवाला nis:enabled=true nis:link/>  नगर पालिका चुनाव में वार्ड 23 के मतदाता रमेश पुत्र रामस्वरूप मतदान करने पहुंचे तो उनके नाम से पहले ही वोट पड़ चुका था। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए नायब तहसीलदार राजदीप कौर से शिकायत की। नायब तहसीलदार उन्हें चुनाव अधिकारी एवं जनरल मजिस्ट्रेट डॉ. अवि गर्ग के पास ले गईं। मामले की जानकारी लेने के बाद डॉ. अवि गर्ग ने नियमानुसार टेंडर वोट की स्वीकृति दी। इसके बाद कृषि उपज मंडी समिति स्थित मतदान केंद्र पर रमेश ने टेंडर वोट के जरिए मतदान किया। बाद में उन्होंने वीडियो जारी कर प्रशासन की त्वरित कार्रवाई पर आभार जताया।

वहीं दूसरी तरफ ग्राम पंचायत से नगर पालिका का सफर तय करने के बाद गोलूवाला अब अपने पहले निकाय चुनाव के मुहाने पर है। शहर का दर्जा मिलने के बाद पहली बार होने जा रहे पालिका चुनाव को लेकर नागरिकों में खासा उत्साह नजर आ रहा है। गांव से शहर बनने की प्रक्रिया के बाद अब नागरिक अपने पहले नगर पालिका बोर्ड के गठन के लिए मतदान करेंगे। लोकतंत्र के इस पर्व को लेकर लोगों में उत्सुकता के साथ-साथ चुनाव परिणाम को लेकर भी चर्चाओं का दौर तेज है। प्रचार के अंतिम दिन प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी। सुबह से शाम तक प्रत्याशी और उनके समर्थक मतदाताओं के घर-घर पहुंचे और अपने पक्ष में मतदान की अपील की।

88 प्रत्याशियों के चुनावी भाग्य का फैसला आज EVM में हो जाएगा बंद
अब प्रत्याशियों की किस्मत मतदाताओं के हाथ में है। गोलूवाला के 25 वार्डों में कुल 13,200 मतदाता आज 11 सितंबर को मतदान कर 88 प्रत्याशियों के चुनावी भाग्य का फैसला करेंगे। पहली बार नगर पालिका चुनाव होने के कारण यह मतदान केवल पार्षद चुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे गोलूवाला के पहले निर्वाचित पालिका बोर्ड की तस्वीर भी सामने आएगी। कहीं आमने-सामने तो कहीं बहुकोणीय मुकाबला चुनाव में कई वाडों के समीकरण अलग-अलग नजर आ रहे हैं।

वार्ड 23 और 24 में सबसे अधिक सात-सात प्रत्याशी मैदान में हैं, जिससे यहां मुकाबला बहुकोणीय हो गया है। वहीं वार्ड 4, 9, 12, 15 और 16 में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। इसके अलावा कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी भी दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बने हुए हैं। कुछ स्थानों पर बागी और आजाद प्रत्याशियों की मौजूदगी ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है। ऐसे में कई वार्डों में जीत का अंतर कितना रहेगा और कौन सा प्रत्याशी किसका समीकरण बिगाड़ेगा, इसे लेकर मतदाताओं के बीच भी चर्चाएं हैं।

14 सितंबर को आएंगे परिणाम
गोलूवाला में इस बात को लेकर कयास लगने लगे है कि पहला पालिका बोर्ड किस दल का बनेगा। फिलहाल सभी प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। 11 सितंबर को शाम छह बजे मतदान समाप्त होते ही सभी प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएगी और 14 सितंबर को मतगणना के साथ परिणाम सामने आएंगे।

<nis:link nis:type=tag nis:id=क्या_होता_है_टेंडर_वोट? nis:value=क्या_होता_है_टेंडर_वोट? nis:enabled=true nis:link/>
टेंडर वोट भारतीय चुनावों में एक विशेष प्रावधान है। जब कोई असली मतदाता मतदान केंद्र पहुंचता है और पता चलता है कि उसके नाम से पहले ही किसी और ने वोट डाल दिया है, तो उसे सामान्य ईवीएम से वोट नहीं डालने दिया जाता। ऐसी स्थिति में पीठासीन अधिकारी उसकी पहचान सत्यापित करने के बाद एक विशेष बैलेट पेपर देते हैं, जिसे टेंडर वोट कहते हैं। मतदाता उस पर निशान लगाकर अधिकारी को सौंप देता है। यह वोट अलग सीलबंद लिफाफे में रखा जाता है और सामान्य मतगणना में नहीं गिना जाता। केवल अदालत के आदेश पर ही इसकी गिनती हो सकती है, जब परिणाम प्रभावित हो सके। यह मतदाता के अधिकार की रक्षा करता है।
संगरिया की आवाज़
🔥 सादुलशहर की सियासत में एक कहावत फिर सच होती नजर आई—“गुरु गुड़ और चेला चक्कर!” 😏
संगरिया की आवाज़। 
<nis:link nis:type=tag nis:id=सादुलशहर nis:value=सादुलशहर nis:enabled=true nis:link/> नगर पालिका चुनाव में सरदार गुरजंट सिंह के चेले प्रदीप कीचड़ ने जिस अंदाज में अपनी राजनीतिक बढ़त बनाई है, उसने यह साबित कर दिया कि राजनीति में गुरु से मिले अनुभव को अगर चेला अपने धैर्य और रणनीति से इस्तेमाल करे, तो समीकरण बदलते देर नहीं लगती।
चुनावी मैदान में झगड़े-फसाद, आरोप-प्रत्यारोप और गर्म माहौल के बीच प्रदीप कीचड़ ने जिस तरह अपेक्षाकृत शांत रहकर अपनी रणनीति पर ध्यान बनाए रखा, वह अपने आप में चर्चा का विषय है।
सियासत में अक्सर कुछ लोग समझते हैं कि जितना ज्यादा शोर, उतनी ज्यादा ताकत!
लेकिन चुनाव का मैदान कभी-कभी बिल्कुल उल्टा हिसाब लगाता है—
जो ज्यादा बोलता है, जरूरी नहीं वही ज्यादा वोट पाता है…
और जो चुप रहता है, जरूरी नहीं वह कमजोर होता है! 😉
प्रदीप कीचड़ ने फिलहाल अपने विरोधियों को भाषणों से नहीं, बल्कि बढ़त के आंकड़ों से जवाब देना शुरू कर दिया है।
और यही राजनीति का असली व्यंग्य है—
कुछ लोग चुनाव में माहौल गरम करने में लगे रहे,
कुछ लोग एक-दूसरे से उलझने में व्यस्त रहे,
और उधर एक शांत खिलाड़ी धीरे-धीरे वोटों की सीढ़ियां चढ़ता चला गया। 😄
अब सादुलशहर की जनता के बीच चर्चा यही है कि
गुरु ने राजनीति सिखाई थी, लेकिन चेले ने इस बार अपना चक्कर चला दिया!
हालांकि चुनाव का अंतिम फैसला जनता की मुहर से ही होगा, लेकिन मौजूदा बढ़त ने इतना जरूर बता दिया है कि शोर से ज्यादा असर रणनीति का होता है और गुस्से से ज्यादा ताकत धैर्य में होती है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि यह बढ़त आखिरकार जीत की मंजिल तक पहुंचती है या चुनावी गणित कोई नया मोड़ लेता है।
🎯 फिलहाल संदेश साफ है—
सियासत में हर लड़ाई चिल्लाकर नहीं लड़ी जाती…
कुछ लड़ाइयां मुस्कुराकर, चुपचाप और वोटों के आंकड़ों से जीती जाती हैं! 😎
सादुलशहर की सियासत में गुरु गुड़ था…
लेकिन चेला इस बार सच में चक्कर निकला! 🔥
Vijay Singh Beniwal ✍️
संगरिया की आवाज़ 

<nis:link nis:type=tag nis:id=सादुलशहर nis:value=सादुलशहर nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=नगरपालिका_चुनाव nis:value=नगरपालिका_चुनाव nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=प्रदीप_कीचड़ nis:value=प्रदीप_कीचड़ nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=सरदार_गुरजंट_सिंह nis:value=सरदार_गुरजंट_सिंह nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=राजनीति nis:value=राजनीति nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=चुनावी_समीकरण nis:value=चुनावी_समीकरण nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=व्यंग्यबाण nis:value=व्यंग्यबाण nis:enabled=true nis:link/>
🎉 एक वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 🎉
संगरिया की आवाज़। 
<nis:link nis:type=tag nis:id=संगरिया nis:value=संगरिया nis:enabled=true nis:link/> नगर कांग्रेस कमेटी ✋के अध्यक्ष Sanjeev Kumar Soni के अध्यक्ष पद पर सफलतापूर्वक एक वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। 💐
एक वर्ष के इस कार्यकाल में संगठन को मजबूत बनाने, कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने तथा कांग्रेस की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए किए गए प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय हैं।
ईश्वर से कामना है कि आपका नेतृत्व निरंतर मजबूत हो, संगठन नई ऊंचाइयों को प्राप्त करे और आपके नेतृत्व में कांग्रेस परिवार संगरिया में और अधिक सक्रिय एवं सशक्त बने।
🌹 आपको उज्ज्वल भविष्य एवं सफल कार्यकाल की हार्दिक शुभकामनाएं। 🌹
हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं, संजीव सोनी जी! 🎂💐
Vijay Singh Beniwal ✍️ 
संगरिया की आवाज़ 
Abhimanyu Poonia Krishan Nehra Om Jangu 
Jaipal Dharnia 
Ashok Choudhary Sangaria 
K K Jain 
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दिल्ली में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात पर टिकी दुनिया की नजर, रिश्तों में नई गर्माहट के संकेत

नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन सिर्फ वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों का मंच नहीं रहने वाला है। इस बार भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच संभावित आमने-सामने की बातचीत ने सम्मेलन की अहमियत और बढ़ा दी है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की दिल्ली यात्रा को दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बाद सावधानी भरे सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात के एजेंडे और संदेश पर सबकी निगाहें हैं।

BRICS Summit 2026: वैश्विक चुनौतियों के बीच दिग्गजों का जमावड़ा
BRICS Summit 2026 के लिए राजधानी में दुनिया के प्रमुख नेताओं का जमावड़ा शुरू हो चुका है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिल्ली पहुंचने के बाद अब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने सम्मेलन को खास कूटनीतिक महत्व दे दिया है। 11 सदस्यीय BRICS समूह ऐसे दौर में बैठक कर रहा है, जब दुनिया युद्ध, व्यापारिक तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और बदलती वैश्विक शक्ति-समीकरण जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।

मोदी-शी द्विपक्षीय वार्ता की तैयारियां
शी जिनपिंग की भारत यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संभावित द्विपक्षीय बैठक है। चीन के भारत में राजदूत शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि दोनों देशों के बीच राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी की बैठक की तैयारियां चल रही हैं। उनके मुताबिक, यह लगातार तीसरा साल होगा जब दोनों नेता आमने-सामने मिलेंगे। इससे पहले उनकी मुलाकात कज़ान और तियानजिन में हुई थी।

संवाद और सहयोग का सकारात्मक संदेश
चीनी राजदूत के बयान को केवल शिष्टाचार संदेश के तौर पर नहीं देखा जा रहा। उन्होंने भारत और चीन के बीच संवाद बढ़ाने, सहयोग मजबूत करने, मतभेदों को उचित तरीके से संभालने और दोनों देशों के नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन को लागू करने पर जोर दिया। पड़ोसी देशों के बीच बेहतर संबंधों की वकालत भी उनके संदेश का प्रमुख हिस्सा रही।

रिश्तों में सुधार और भरोसे की कसौटी
दरअसल, भारत-चीन संबंध पिछले कुछ वर्षों में सीमा तनाव के कारण बेहद संवेदनशील रहे हैं। ऐसे माहौल में दोनों शीर्ष नेताओं की लगातार बैठकों को संवाद की बहाली के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों की नजर इस बात पर रहेगी कि संभावित वार्ता केवल राजनीतिक संदेश तक सीमित रहती है या सीमा, व्यापार और आपसी भरोसे जैसे कठिन विषयों पर भी आगे बढ़ती है।

BRICS का व्यापक एजेंडा और रणनीतिक संतुलन
BRICS के व्यापक एजेंडे में आर्थिक सहयोग के साथ ऊर्जा और वैश्विक चुनौतियां भी प्रमुख रहने वाली हैं। रूस की सक्रिय मौजूदगी और ईरान समेत अन्य सदस्य देशों की भागीदारी इस मंच को और रणनीतिक बनाती है। भारत के लिए सम्मेलन एक साथ कई मोर्चों पर कूटनीतिक संतुलन साधने का अवसर है।

सख्त सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति पर असर
दिल्ली में विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी की गई है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग की संभावित बातचीत इस पूरे सम्मेलन का ऐसा क्षण बन सकती है, जिसका असर सिर्फ भारत-चीन संबंधों पर नहीं, बल्कि BRICS के भीतर शक्ति-संतुलन और वैश्विक कूटनीति पर भी दिखाई दे सकता है।
BJP Punjab पंजाब भाजपा अध्यक्ष के काफिले पर हमला, आप कार्यकर्ताओं पर घेरकर रोकने का आरोप, लौटते समय भी रास्ता रोका
संगरिया की आवाज़। 
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के काफिले को संगरूर जिले के दिड़बा क्षेत्र में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की ओर से रोककर हमला करने का आरोप लगा है। घटना में ढिल्लों समेत उनके साथ मौजूद भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरक्षित रहे। वापसी के दौरान भी काफिले का रास्ता रोके जाने का आरोप है। ढिल्लों गुरुवार को संगरूर जिले के तूर बंजारा गांव जा रहे थे। उन्हें गुलजार सिंह के परिवार से मिलकर संवेदना जतानी थी।

गुलजार सिंह की संदिग्ध मौत के बाद भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। ढिल्लों के साथ भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनप्रीत सिंह बादल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और अश्वनी शर्मा भी मौजूद थे। ढिल्लों ने घटना पर जारी बयान में कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के शासन में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिड़बा जाते समय आप कार्यकर्ताओं ने उनके वाहन को घेर लिया और उसे आगे नहीं बढ़ने दिया।

पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप
उनका कहना था कि वे गुलजार सिंह के परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाने जा रहे थे, लेकिन रास्ते में उनके काफिले को रोक दिया गया। भाजपा अध्यक्ष ने पुलिस प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि घटनास्थल से करीब 100 मीटर आगे पुलिस मौजूद थी, लेकिन पुलिस ने पूरे घटनाक्रम को रोकने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाया। ढिल्लों ने कहा कि यह केवल उन पर हमला नहीं था, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की आवाज को रोकने का प्रयास था।

विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। ढिल्लों ने कहा कि भाजपा ऐसे किसी दबाव से पीछे नहीं हटेगी और पंजाब सरकार के हर कदम का राजनीतिक और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता इस तरह की घटनाओं का जवाब देगी। ढिल्लों और भाजपा नेताओं के चंडीगढ़ लौटते समय भी आप कार्यकर्ताओं ने उनका रास्ता रोक लिया। बयान के मुताबिक, काफिले को कुछ देर रुकना पड़ा।

विपक्षी नेताओं की सुरक्षा पर सवाल
इसके बाद ढिल्लों और उनके साथ मौजूद भाजपा नेताओं ने वाहनों से उतरकर पैदल रास्ता पार किया और काफिले के साथ आगे बढ़ गए। भाजपा ने घटना को लेकर राज्य की कानून-व्यवस्था और विपक्षी नेताओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी के आने-जाने का रास्ता रोकना उचित नहीं है। वहीं, घटना को लेकर आम आदमी पार्टी की ओर से इस मामले में प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
संगरिया की आवाज़
<nis:link nis:type=tag nis:id=सादुलशहर nis:value=सादुलशहर nis:enabled=true nis:link/> नगरपालिका चुनाव 3
<nis:link nis:type=tag nis:id=सादुलशहर nis:value=सादुलशहर nis:enabled=true nis:link/> नगरपालिका चुनाव 4
<nis:link nis:type=tag nis:id=सादुलशहर nis:value=सादुलशहर nis:enabled=true nis:link/> नगरपालिका चुनाव
<nis:link nis:type=tag nis:id=सादुलशहर nis:value=सादुलशहर nis:enabled=true nis:link/> नगरपालिका चुनाव
संगरिया की आवाज़। के दुसरे खिलाड़ी
 Vipul Beniwal को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 💐
अब भी परिजनों के मोह से आगे नहीं बढ़ पा रहीं मायावती, क्यों नहीं बन पाईं बहुजन की नेता?
संगरिया की आवाज़। 
उत्तर प्रदेश में कुछ ही महीनों में विधान सभा चुनाव होने हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती का कहना है कि वह राज्य में पांचवी बार बसपा की सरकार बनाने के लिए तैयारी में जुटी हैं। लेकिन, चुनाव से पहले उनकी पार्टी में जैसी उथल-पुथल है, उसे देखते हुए लगता है कि मायावती के लिए तैयारी उम्मीद से ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहने वाली है। उनके सामने चुनौती पहले से ही गंभीर है, क्योंकि बसपा के पास उत्तर प्रदेश में एक भी विधायक-सांसद नहीं है। 2007 के बाद हुए सभी विधान सभा चुनावों में पार्टी लगातार नीचे ही गिरती गई है।

मायावती थीं एयरपोर्ट पर सीधे प्लेन तक गाड़ी ले जाने वालीं इकलौती पूर्व सीएम
एक समय ऐसा था जब मायावती देश की इकलौती पूर्व सीएम हुआ करती थीं, जिनकी गाड़ी को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान तक जाने की छूट थी। यह सुविधा उनका रुतबा बयान करने के लिए काफी है। तभी वह भारी बहुमत के साथ एक बार फिर पूर्व से मौजूदा सीएम बन गईं थीं। 2007 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में बसपा के 206 विधायक जीते थे। 30 फीसदी से ज्यादा वोट बसपा को मिले थे। उनके पास लोक सभा के 17 सांसद हुआ करते थे। उनकी हैसियत केंद्र की सरकार हिला देने तक की थी।

मायावती जब भारी बहुमत से जीत कर, अपने दम पर सीएम बनीं तो उनका रुतबा कई गुना बढ़ गया था। तब राजनीतिक पंडितों ने उनके और बसपा के बारे में कई बड़ी-बड़ी भविष्यवाणियां की थीं। किसी ने उन्हें 2009 के लोक सभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताया था तो किसी ने कहा था कि वह कांग्रेस से ज्यादा बड़ा खतरा बीजेपी के लिए बनेंगी। लेकिन ये सब बातें तात्कालिक और काल्पनिक साबित हुईं।

मायावती का वो फॉर्मूला जो पहली और आखिरी बार हुआ था हिट
2007 में मायावती जिस ऊंचाई पर पहुंची थीं, वह चरम साबित हुई और उसके बाद से वह लगातार उतार पर ही हैं। 2007 में मायावती ने नया प्रयोग किया था। अपने कोर वोट बैंक के साथ अगड़ी जातियों को भी साधा था। पहले मनुवादी बता कर ब्राह्मणों/अगड़ी जातियों का विरोध करने वाली मायावती ने 2007 में ब्राह्मणों को चुनाव में टिकट दिया। उनकी सोशल इंजीनियरिंग का असर यह रहा कि सपा से मुस्लिम, आरएलडी से जाट और बीजेपी से अगड़ी जाति के वोटर्स टूट कर बसपा के खेमे में गए। कोर दलित मतदाताओं का साथ तो रहा ही। मायावती ने न किसी पार्टी से गठबंधन किया था और न ही मैनिफेस्टो दिया था। फिर भी लगभग हर तीसरा वोट बसपा को ही मिला था। लेकिन, उनका यह प्रयोग काठ की हांडी साबित हुआ, जो चूल्हे पर एक ही बार चढ़ती है।

बहुजन की नेता क्यों नहीं बन सकीं मायावती
मायावती का राजनीति में उभार हुआ तो दलितों को ऐसा लगा था कि उनके बीच की एक महिला नेता बन कर उभरी है और उन्हें एक आवाज मिली है। इसलिए उन्होंने बसपा को वोट दिया। 2007 में नायाब 'सोशल इंजीनियरिंग' के जरिये मायावती ने वोट तो समाज के दूसरे वर्ग का भी ले लिया। लेकिन सारा आभामंडल अपने इर्द-गिर्द ही बुने रखा। उनका यह स्टाइल नया नहीं था, लेकिन 2007 के बाद यह और मजबूत ही होता गया। इसका उन्हें आगे चल कर खामियाजा भुगतना पड़ा। जहां वह अपने कोर वोट बैंक के अलावा सपा के मुस्लिम और भाजपा के अगड़ी जाति के वोटर्स छीनने में कामयाब रही थीं, वहीं आगे चल कर उनके पारंपरिक वोटर भी साथ नहीं रहे।

बहुजन नहीं, अपने जनों की पार्टी बना दी बसपा को
मायावती जब से सीएम बनीं, तब से बसपा पर अकेले की पकड़ बनाए रखीं। कांशीराम के नहीं रहने के बाद तो पार्टी पर एक तरह से उनका सम्पूर्ण एकाधिकार हो गया। पार्टी के ढलान का दौर शुरू होने के बाद भी उनका यही रवैया रहा। जब सवाल उनकी विरासत को आगे ले जाने का उठा, तब भी उन्हें पार्टी का कोई सिपाही नहीं, बल्कि अपने परिवार के लोग ही नजर आए।

10 सितंबर, 2026 को भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित करने की जानकारी देते हुए मायावती ने जो ट्वीट किया, उसमें उन्होंने लिखा कि आकाश को पार्टी की सफलता से ज्यादा निजी व पारिवारिक स्वार्थ का मोह है। सच यह है कि खुद मायावती ने ऐसा संकेत बहुत ही कम दिया है कि वह पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए व्यक्ति और परिवार से आगे उठ कर काम करने की मिसाल खड़ी कर रही हैं।

अध्यक्ष के तौर पर मायावती खुद पार्टी सुप्रीमो हैं और भाई आनंद कुमार को उपाध्यक्ष बना रखा है। उसी भाई के एक बेटे को संयोजक बना रखा था, जिसे अब पार्टी से हटा दिया है और दूसरे बेटे ईशान आनंद को हाल ही में सेक्टर 1 का इंचार्ज बना कर बड़ी ज़िम्मेदारी दी है। बता दें कि मायावती ने बसपा को दो सेक्टर में बांट रखा है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़ कर बाकी राज्यों के लिए यह व्यवस्था है। एक सेक्टर में 10 राज्यों का क्लस्टर रखा गया है। इस लिहाज से संगठन में ईशान का पद काफी महत्व वाला है।

मायावती ने पहले आकाश को राष्ट्रीय संयोजक बना कर आगे बढ़ाया, फिर ईशान को आगे बढ़ाने लगीं। समझा जाता है कि बसपा का मौजूदा घमासान असल में परिवार की अंदरूनी लड़ाई का नतीजा है।

साधारण परिवार की होकर भी असाधारण जीवनशैली
मायावती का जन्म बड़े साधारण परिवार में हुआ था। उनका जन्म 15 जनवरी, 1956 को गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) जिले के बादलपुर में हुआ था। उनके पिता डाक विभाग में कर्मचारी थे। जब वह दो साल की थीं तो उनके पिता परिवार को लेकर दिल्ली के इंद्रपुरी में रहने के लिए आ गए थे। 1977 में मायावती ने शिक्षक की नौकरी कर ली। लेकिन वह इससे संतुष्ट नहीं थीं। वह काफी आगे जाना चाहती थीं। उन्होंने बीजेपी के केंद्रीय नेताओं से संपर्क बढ़ाना शुरू किया। 1977 के आम चुनाव में उन्होंने जनता पार्टी के लिए काम किया। 1980 में उनकी मुलाक़ात कांशीराम से हुई। वहीं से उनके जीवन की दिशा बदल गई।

1984 में 19 अप्रैल को मायावती बसपा की संस्थापक सदस्य बनीं। उन्होंने कांशीराम पर भी अपना जबरदस्त प्रभाव बना लिया था। ऐसा बहुत कम होता था कि मायावती की बात कांशीराम टाल दें।

1984, 1985 और 1987 में हारने के बाद 1989 में मायावती पहली बार बिजनौर से लोक सभा पहुंचीं। 1991 में वह फिर हार गईं। 1992 में बुलंदशहर से उपचुनाव जीत कर फिर लोक सभा पहुंचने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं रहीं। उल्टा बूथ कैप्चर करने के आरोप में गिरफ्तार कर ली गईं। तब 1993 में वह राज्य सभा गईं। 1995 में वह पहली बार मुख्यमंत्री बनीं।

मायावती जिस तरह एक साधारण पृष्ठभूमि से निकली नेता हैं, सार्वजनिक जीवन में उन्होंने इसके उलट आभामंडल बनाया। आम जनता, नेता, कार्यकर्ता से दूरी बना कर रखना, भारी सुरक्षा के साथ चलना, शाही अंदाज में जीना…ये सब उन्हें बहुजन के दिलों से दूर करता गया। उनकी जीवनशैली आज भी बहुत हद तक उसी तर्ज पर कायम है।
संगरिया की आवाज़
1980 में अपने इलाके में बेल बॉटम वह नूरी सूट का खूब प्रचलन था
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जयपुर सहित 147 शहरी निकायों में वोटिंग जारी, कई जगह EVM में आई खराबी
संगरिया की आवाज़। 
जयपुर। नगरीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण में जयपुर सहित 6 नगर निगमों व 20 नगर परिषदों व 121 नगर पालिकाओं के लिए आज सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो गया है, जो शाम 6 बजे तक चलेगा। आज 4852 वार्डों के लिए 9758 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जा रहे हैं, जहां 87,60,884 मतदाता 18266 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। इन निकायों के 45 वार्डों में निर्विरोध निर्वाचन हो चुका, जबकि टोंक नगर परिषद के एक वार्ड में प्रत्याशियों ने नामांकन वापस लेकर चुनाव का बहिष्कार किया है। बता दें कि वोटिंग का दूसरा चरण खत्म होते ही प्रदेश की सभी 309 नगरीय निकायों के लिए मतदान की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके बाद 14 सितम्बर को सुबह 8 बजे मतगणना शुरू होगी।
संगरिया की आवाज़
<nis:link nis:type=tag nis:id=राजस्थान nis:value=राजस्थान nis:enabled=true nis:link/> में किराये के खातों से बढ़ता साइबर अपराध का जाल
संगरिया की आवाज़। 
डिजिटल भुगतान ने बैंक  को तेज, सुविधाजनक और सर्वसुलभ बनाया है, लेकिन इसके साथ वित्तीय अपराध के तरीके भी बदल गए हैं। साइबर अपराधी ठगी के लिए किराये के खाते का इस्तेमाल करते हैं, ताकि उनकी पहचान छिपी रहे। ऐसे किराये के खातों को '<nis:link nis:type=tag nis:id=म्यूल_खाता' nis:value=म्यूल_खाता' nis:enabled=true nis:link/> कहा जाता है। आज निवेश, डिजिटल गिरफ्तारी, ऑनलाइन नौकरी, पार्सल, ऋण, गेमिंग और फर्जी कारोबारी योजनाओं से जुड़ी ठगी में म्यूल खाते अपराधियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण हथियार होते हैं। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी आइ4सी के अनुसार 30 जून तक 32.08 लाख म्यूल खातों की जानकारी संबंधित संस्थाओं से साझा की गई और कई मामलों में समय पर सूचना मिलने के कारण 25,698 करोड़ रुपए के अवैध लेन-देन पर रोक लगाने में सफलता मिली।

'<nis:link nis:type=tag nis:id=म्यूल' nis:value=म्यूल' nis:enabled=true nis:link/> का सामान्य अर्थ भार उठाने वाले खच्चर से है। इसी से बना 'मनी म्यूल' शब्द उस व्यक्ति के लिए प्रयोग होता है, जो अपने बैंक खाते में जमा अवैध धन को देश और दुनिया के किसी भी कोने में पहुंचाने का माध्यम बनता है। आमतौर पर ऐसे किराये के खाते में जमा अवैध पैसे दूसरे खाते या डिजिटल वॉलेट या आभासी मुद्रा के रूप (डिजिटल या क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित किए जाते हैं। दरअसल, कुछ लोग कमीशन या थोड़े से पैसे के लालच में अपना खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, यूपीआइ पहचान और इंटरनेट बैंकिंग संबंधी विवरण अपराधियों को सौंप देते हैं। वहीं, कुछ बेरोजगार युवाओं, विद्यार्थियों, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और छोटे कारोबारियों को नौकरी, ऋण या निवेश का झांसा देकर फंसाया जाता है, जबकि कुछ व्यक्तियों के दस्तावेज चोरी कर या गलत तरीके से हासिल करके उनके नाम से खाते खोल दिए जाते हैं। यानी कि कोई जानबूझकर अपराध में सहयोग करता है, तो कोई अनजाने में उसका हिस्सा बन जाता है। म्यूल खातों की बढ़ती संख्या का पहला कारण डिजिटल लेनदेन का अभूतपूर्व विस्तार है। तत्काल भुगतान की सुविधा से वैध कारोबार आसान हुआ है, लेकिन अपराधियों को भी कुछ ही मिनटों में रकम कई खातों में हस्तांतरित करने का अवसर मिल गया है। ठगी की रकम अक्सर एक खाते में लंबे समय तक नहीं रखी जाती। कई बार अवैध पैसे को हवाला के माध्यम से वैध बनाने के बाद कोई तीसरा या चौथा व्यक्ति अपने खाते से नकद निकासी भी करता है या फिर ऐसे अवैध पैसे को आभासी मुद्राओं में तब्दील कर दिया जाता है।

दूसरा कारण संगठित साइबर अपराध है। अब बैंक खातों को हड़पने, बेचने और किराए पर देने वाला पूरा अवैध तंत्र सक्रिय है। सोशल मीडिया पर 'घर बैठे कमाई', 'खाता उपलब्ध कराने पर कमीशन' और 'भुगतान संग्रह एजेंट' जैसे प्रस्ताव देकर लोगों को आपराधिक गिरोह में जोड़ा जाता है। तीसरा कारण दूरस्थ और त्वरित खाता खोलने की सुविधा का दुरुपयोग है। डिजिटल केवाइसी ने बैंकिंग पहुंच बढ़ाई है, लेकिन यदि पहचान की जांच केवल औपचारिकता बन जाए, तो जाली दस्तावेज, गलत पता या किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल नंबर के सहारे खाते खोले जा सकते हैं। सबसे बड़ी चुनौती अवैध धन की बढ़ती रफ्तार है। शिकायत दर्ज होने तक रकम कई खातों में पहुंच चुकी होती है। प्रत्येक खाता अलग बैंक, राज्य या क्षेत्राधिकार में हो सकता है। ऐसे में बैंक, पुलिस, भुगतान मंच और दूरसंचार कंपनियों के बीच समन्वय में थोड़ी-सी देरी भी अपराधियों के लिए लाभकारी सिद्ध होती है।

दूसरी चुनौती यह है कि हर असामान्य लेनदेन अपराध नहीं होता। किसी छोटे व्यापारी, विवाह आयोजक या मौसमी कारोबारी के खाते में अचानक अधिक लेनदेन होना स्वाभाविक भी हो सकता है। केवल लेनदेन की संख्या या राशि के आधार पर खाता रोकने से निर्दोष ग्राहक परेशान हो सकते हैं। इसलिए, मामले में तकनीकी संकेतों के साथ मानवीय जांच भी जरूरी है। तीसरी चुनौती गलत तरीके से बंद या फ्रीज किए गए खातों की है। यदि किसी निर्दोष खाताधारक के खाते में अनजाने में संदिग्ध रकम आ जाए और उसका पूरा खाता लंबे समय के लिए फ्रीज दिया जाए, तो उसकी आजीविका प्रभावित हो सकती है। अपराध पर कार्रवाई और ईमानदार ग्राहक के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

रोकथाम के लिए केवल दस्तावेज प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है। मोबाइल नंबर, पता, पेशा, आय के स्रोत और खाते के घोषित उद्देश्य में सामंजस्य भी देखा जाना चाहिए। एक ही पते, उपकरण या मोबाइल नंबर से अखातों के खुलने पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। खाते के व्यवहार की निरंतर निगरानी आवश्यक है। म्यूल खातों की रोकथाम में बैंक पहली रक्षा-पंक्ति हैं। उन्हें केवाईसी को एक बार की प्रक्रिया मानने के बजाय ग्राहक की जोखिम-स्थिति के अनुरूप समय-समय पर अद्यतन करना चाहिए। रिजर्व बैंक के नवोन्मेष केंद्र द्वारा विकसित 'म्यूलहंटर डॉट एआइ' संदिग्ध खातों की पहचान में उपयोगी पहल है। म्यूल खाता साइबर अपराध की कोई मामूली तकनीकी कड़ी नहीं, बल्कि वह सुरंग है जिसके माध्यम से अवैध धन अपराधियों और आतंकवादियों तक पहुंचता है और दोषियों के पहचान के बारे में पता नहीं चलता है। इस समस्या को सिर्फ खाता बंद करके समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए मजबूत केवाइसी, रियल टाइम निगरानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विवेकपूर्ण उपयोग, त्वरित शिकायत निवारण प्रणाली और बैंक-पुलिस-सरकारी एजेंसियों के बीच निर्बाध व लगातार समन्वय आवश्यक है। साथ ही, आम लोगों को समझना होगा कि बैंक खाता निजी वित्तीय पहचान है, किराये पर देने वाली वस्तु नहीं। सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग का उत्तरदायित्व बैंक, सरकार और ग्राहक- तीनों की साझा जिम्मेदारी है।
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संगरिया पुलिस Rajasthan Police Bikaner Police 🚨🚓
<nis:link nis:type=tag nis:id=श्रीगंगानगर_घड़साना: nis:value=श्रीगंगानगर_घड़साना: nis:enabled=true nis:link/> खेत में काम कर रहे राहुल बिश्नोई को उतारा मौत के घाट, सोशल मीडिया कमेंट को लेकर था विवाद; 3 लोगों पर FIR
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<nis:link nis:type=tag nis:id=श्रीगंगानगर nis:value=श्रीगंगानगर nis:enabled=true nis:link/> घड़साना में सोशल मीडिया पर परिवारजन को लेकर किए गए एक कमेंट के बाद शुरू हुआ विवाद सोमवार रात गंभीर वारदात में बदल गया। घड़साना क्षेत्र के लूणिया इलाके के गांव 4 एनएम में राहुल बिश्नोई की हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि राहुल और दूसरे पक्ष के बीच पिछले कई दिनों से रंजिश चल रही थी। इसी दौरान राहुल को जान से मारने की धमकियां भी मिलने की बात सामने आई है। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने केस दर्ज कर वारदात में शामिल आरोपियों की तलाश तेज कर दी है।

आरोपी राहुल को तलाशते हुए घर से खेत तक पहुंचा
परिजनों के अनुसार चक 4 एनएम निवासी राहुल बिश्नोई सोमवार शाम खेत में मूंग की कटाई का काम कर रहा था। इसी दौरान गांव का सचिन पुत्र गोपीराम भांभू जाट एक अन्य युवक के साथ राहुल के घर पहुंचा और उसके बारे में जानकारी ली। परिवारजनों ने बताया कि राहुल खेत में मौजूद है। इसके बाद सचिन अपने साथी के साथ सीधे खेत पहुंच गया। वहां उसने राहुल से बातचीत की और कुछ देर बाद कपड़ों में छिपाया चाकू निकालकर उस पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से राहुल गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और शोर सुनकर आसपास के लोग भी वहां पहुंचने लगे। इसी दौरान आरोपी और उसके साथ आया युवक मौके से फरार हो गए।

अस्पताल ले जाते समय राहुल ने तोड़ा दम
राहुल पर हमला होने के बाद शोर सुनकर उसका भाई वकील कुमार तुरंत मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक आरोपी वहां से फरार हो चुका था। इसके बाद परिजन गंभीर रूप से घायल राहुल को उपचार के लिए तत्काल घड़साना के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उसे आगे के इलाज के लिए बीकानेर रेफर कर दिया गया। हालांकि, बीकानेर ले जाते समय रास्ते में ही राहुल ने दम तोड़ दिया। मंगलवार को पुलिस ने तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया।
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<nis:link nis:type=tag nis:id=संगरिया nis:value=संगरिया nis:enabled=true nis:link/> में नगर पालिका छत्तीपुर होने वाले के लिए दो वीडियो शाम के समय हुए वायरल 
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<nis:link nis:type=tag nis:id=संगरिया nis:value=संगरिया nis:enabled=true nis:link/> धान मंडी में शाम को होगी सत्यनारायण की कथा सभी व्यापारी चुपचाप लेंगे मीठी गोली
<nis:link nis:type=tag nis:id=संगरिया nis:value=संगरिया nis:enabled=true nis:link/> में नगर पालिका छत्तीपुर होने वाले के लिए दो वीडियो शाम के समय हुए वायरल 
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<nis:link nis:type=tag nis:id=राजस्थान nis:value=राजस्थान nis:enabled=true nis:link/> के नगर पालिका चुनाव के पहले फेज के चुनाव हमारे क्षेत्र में हो गये है  आओ अब पंचायत समिति और जिला परिषद की कबड्डी खेले आज से ठीक 6 साल पहले हनुमानगढ़ में लॉटरी निकाली थी और संगरिया क्षेत्र के गांवों की पंचायती रिजर्व हुई थी नीचे दिया गया आंकड़े वही है 
अब जल्दी निकलेगी हमारे क्षेत्र की पंचायत की नई लॉटरी 
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<nis:link nis:type=tag nis:id=संगरिया nis:value=संगरिया nis:enabled=true nis:link/> शहर की नगर पालिका चुनाव के आज की मतदान के आंकड़े 
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🚨 स्मार्ट सिटी संगरिया में चुनावी माहौल के बीच 7:20 का सनसनीखेज ट्विस्ट! 🗳️
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<nis:link nis:type=tag nis:id=भगोड़ों_के_साथ nis:value=भगोड़ों_के_साथ nis:enabled=true nis:link/> 😜 🐍

संगरिया की आवाज़। 
जिन व्यापारियों के बारे में शहर में चर्चा है कि वे करीब 50 करोड़ रुपये का चूना लगाकर शहर छोड़कर चले गए थे, उनकी 7:20 बजे संगरिया में मौजूदगी और तस्वीरें सामने आने के बाद अब शहर में एक नया सवाल खड़ा हो गया है। 🤔
सवाल सिर्फ इतना नहीं कि वे आए क्यों?
सवाल यह भी है कि—
👉 वे शहर छोड़कर किस-किस शहर में गए थे?
👉 अब किस शहर से वोट डालने संगरिया पहुंचे हैं?
👉 इतने बड़े आर्थिक विवाद के बाद भी चुनाव के समय उनकी अचानक मौजूदगी का क्या मतलब निकाला जाए?
👉 और सबसे महत्वपूर्ण—संगरिया के व्यापारी समाज को इस पूरे घटनाक्रम से क्या सीख लेनी चाहिए?
चुनाव लोकतंत्र का उत्सव है, लेकिन लोकतंत्र के साथ व्यापार, भरोसे और जवाबदेही का भी रिश्ता होता है।
आज जरूरत किसी व्यक्ति विशेष पर फैसला सुनाने की नहीं, बल्कि पूरे मामले पर तथ्यों के साथ गंभीरता से मंथन करने की है।
क्योंकि…
जिस शहर में करोड़ों का हिसाब बाकी हो,
वहां 7:20 की दस्तक सिर्फ एक दस्तक नहीं होती…
वह कई सवाल छोड़ जाती है! 🧐
अब फैसला जनता करे—
संगरिया को सिर्फ वोट चाहिए या वोट के साथ जवाब भी?
📸 तस्वीरें सामने हैं… अब शहर को तस्वीर से आगे बढ़कर पूरी कहानी समझने की जरूरत है।
Vijay Singh Beniwal ✍️
संगरिया की आवाज़ 
Rajasthan Police Hanumangarh Police संगरिया पुलिस 

K K Jain Om Jangu Ashok Choudhary Sangaria 

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प्रथम चरण में 162 निकायों में सुबह 7 बजे से शुरू होगा मतदान, 105 दिग्गजों के लिए बड़ा इम्तिहान
संगरिया की आवाज़। 
प्रदेश के नगरीय निकायों में पहली बार ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की तर्ज पर दो चरणों में एकसाथ हो रहे चुनाव के पहले चरण का मतदान बुधवार को सुबह 7 बजे से 4 नगर निगमों सहित 162 निकायों में होगा। इस चुनावी रण में स्थानीय बोर्डों के गठन से कहीं आगे भाजपा-कांग्रेस के 105 दिग्गज नेताओं की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। सत्ताधारी भाजपा जहां चुनाव में बाजी मारकर अपने पौने तीन साल के कार्यकाल पर बेहतर कामकाज की जनता से मुहर लगवाना चाहती है, वहीं विपक्षी कांग्रेस के लिए यह संगठन की सक्रियता और चुनावी तैयारियों की परीक्षा है।

प्रदेश स्तर पर भाजपा की ओर से टिकट वितरण से लेकर प्रचार तक मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ जोर-शोर से जुटे रहे। कांग्रेस में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली चुनावी रणनीति के केंद्र में रहे। हालांकि टिकट वितरण के बाद दोनों ही अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों तक प्रचार में सीमित रहे।

जमीन पर पकड़ किसकी कितनी, चुनाव परिणाम से होगी तय
पहले चरण में प्रदेश की 309 नगरीय निकायों में से 162 के लिए वोट पड़ेंगे। इन क्षेत्रों से भाजपा के सभी 14 लोकसभा सांसद जुड़े हैं, जिनमें 4 केंद्र सरकार में मंत्री हैं। राज्य सरकार के 11 मंत्री और 55 से अधिक विधायक भी इन चुनावों से सीधे जुड़े हुए हैं। कई पूर्व मंत्री-विधायक भी चुनावी मैदान में सक्रिय हैं। कांग्रेस की ओर से 8 सांसद, 27 विधायक और कई पूर्व मंत्री टिकट वितरण से लेकर प्रचार तक मुख्यधारा में रहते हुए चुनाव में शामिल हैं। दोनों दलों में इन नेताओं की प्रतिष्ठा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि उन्हें टिकट वितरण, चुनाव प्रचार और परिणाम के बाद बोर्ड बनाने की रणनीति तक की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में पहले चरण के नतीजे कई दिग्गजों की राजनीतिक पकड़ और संगठन में प्रभाव का भी संकेत देंगे।

भाजपा के केन्द्रीय मंत्री, मंत्री, सांसद-विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर
भाजपा के लिए यह चुनाव सरकार के कामकाज के साथ संगठन की चुनावी पकड़ की परीक्षा भी है। पहले चरण में पार्टी से जुड़े सभी 14 लोकसभा सांसदों के क्षेत्रों में चुनाव हो रहे हैं। इनमें चार केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं। इनके अलावा राज्य सरकार के मंत्री और 53 विधायक सीधे चुनावी समीकरणों से जुड़े हैं। पूर्व मंत्री-विधायकों की सक्रियता भी पार्टी के लिए अहम है।

केन्द्र में मंत्रीः गजेंद्र सिंह शेखावत, भूपेंद्र यादव, अर्जुन राम मेघवाल, भागीरथ चौधरी।

भाजपा सांसदः रावराजेंद्र सिंह, मंजू शर्मा, लुंबाराम चौधरी, दुष्यंत सिंह, सीपी जोशी, दामोदर अग्रवाल, पीपी चौधरी, दुष्यंत सिंह, मन्नालाल रावत, महिमा कुमारी।

उप मुख्यमंत्री-मंत्रीः प्रेमचंद बैरवा, किरोड़ी लाल मीणा, संजय शर्मा, मदन दिलावर, जवाहर सिंह बेढम, झाबर सिंह खर्रा, हेमंत मीणा, हीरालाल नागर, मंजू बाघमार, विजय सिंह व के.के. विश्नोई।

भाजपा विधायकः वसुंधरा राजे (झालावाड़), शंकर सिंह रावत (ब्यावर), हंसराज पटेल (कोटपूतली), हरलाल सहारण (चूरू), जोगेश्वर गर्ग (जालोर), राधेश्याम बैरवा (बारां), दर्शन सिंह (करौली), महंत बालकनाथ (तिजारा), छोटूसिंह भाटी (जैसलमेर), राजेंद्र भांबू (झुंझुनूं), शत्रुघ्न गौतम (केकड़ी), रामस्वरूप लांबा (नसीराबाद), रामसहाय वर्मा (निवाई), राजेंद्र गुर्जर (देवली-उनियारा), वीरेंद्र सिंह (मसूदा), गोपाल लाल शर्मा (मांडलगढ़), कुलदीप (विराटनगर), देवी सिंह शेखावत (बानसूर), संजीव कुमार (भादरा), बहादुर सिंह (वैर), जितेंद्र गोठवाल (खंडार), कैलाश वर्मा (बगरू), रामअवतार बैरवा (चाकसू), विद्याधर सिंह (फुलेरा), लक्ष्मण मीणा (बस्सी), महेंद्र पाल मीणा (जमवारामगढ़), सुखवंत सिंह (रामगढ़), सुभाष मील (खंडेला), विक्रम सिंह जाखल (नवलगढ़), धर्मपाल (खेतड़ी), बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़), अर्जुनलाल (बिलाड़ा), देवेंद्र जोशी (सूरसागर), अतुल भंसाली (जोधपुर), छगन सिंह राजपुरोहित (आहोर), शोभा चौहान (सोजत), पुष्पेंद्र सिंह (बाली), केसाराम चौधरी (मारवाड़ जंक्शन), ओटाराम देवासी (सिरोही), समाराम गरासिया (पिंडवाड़ा-आबू), मदन दिलावर (रामगंजमंडी), कालूराम (डग), उदयलाल डांगी (वल्लभनगर), विश्वराज सिंह मेवाड़ (नाथद्वारा), सुरेंद्र सिंह राठौड़ (कुंभलगढ़), सुरेश धाकड़ (बेगूं), हंसराज मीणा (सपोटरा), भागचंद टांकड़ा (बांदीकुई), राजेंद्र मीणा (महवा), विक्रम बंशीवाल (सिकराय), नौक्षम चौधरी (कामां), अरुण चौधरी (पचपदरा), हमीर सिंह भायल (सिवाना)।

भाजपा के पूर्व मंत्री-विधायकः राजेन्द्र राठौड़, प्रभुलाल सैनी, अशोक परनामी।

कांग्रेस के सांसद-विधायकों और पूर्व मंत्रियों की साख की परीक्षा
कांग्रेस के लिए पहले चरण का चुनाव खास तौर पर महत्वपूर्ण है। पार्टी हाल के संगठनात्मक बदलावों के बाद जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ दिखाने की कोशिश में है। प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के साथ 8 सांसद, 27 विधायक और कई पूर्व मंत्री-विधायक चुनावी गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। इनके लिए परिणाम संगठन की चुनावी क्षमता और स्थानीय राजनीतिक प्रभाव का आकलन भी होंगे।

कांग्रेस सांसदः राहुल कस्वां, हरीश चंद्र मीणा, उम्मेदाराम बेनीवाल, बृजेंद्र सिंह ओला, संजना जाटव, भजन लाल जाटव, मुरारीलाल मीणा, कुलदीप इंदौरा।

कांग्रेस विधायकः गोविंद सिंह डोटासरा (लक्ष्मणगढ़), टीकाराम जूली (अलवर ग्रामीण), हरेंद्र मिर्धा (नागौर), शोभारानी कुशवाह (धौलपुर), मनीष यादव (शाहपुरा), शिखा मील बराला (चौमूं), हरिमोहन शर्मा (बूंदी), अर्जुन सिंह बामनिया (बांसवाड़ा), गणेश घोघरा (डूंगरपुर), डूंगरराम गेदर (सूरतगढ़), सोहनलाल नायक (रायसिंहनगर), शिमला देवी (अनूपगढ़), अमित चाचन (नोहर), <nis:link nis:type=tag nis:id=अभिमन्यु nis:value=अभिमन्यु nis:enabled=true nis:link/> (संगरिया), रोहित बोहरा (राजाखेड़ा), वीरेंद्र सिंह (दांतारामगढ़), भगवानाराम सैनी (उदयपुरवाटी), गीता बरवाड़ (भोपालगढ़), प्रमोद जैन भाया (अंता), अशोक (हिंडोली), सीएल प्रेमी बैरवा (केशवरायपाटन), पुष्कर लाल डांगी (मावली), मुकेश भाकर (लाडनूं), जाकिर हुसैन गेसावत (मकराना), दीनदयाल (दौसा), हाकम अली खान (फतेहपुर), दीपचंद खैरिया (किशनगढ़बास)।

कांग्रेस के पूर्व मंत्री-विधायकः ममता भूपेश, रमेश मीणा, बाबूलाल नागर, दीपेंद्र सिंह शेखावत, सीपी जोशी, जाहिदा खान, शकुंतला रावत, रघु शर्मा, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, विश्वेंद्र सिंह।

चार निगमों के 73 वार्डों में सीधी टक्कर
पहले चरण में भरतपुर, अलवर, बीकानेर और भीलवाड़ा नगर निगमों के 279 वार्डों में मतदान होगा। इनमें 73 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। 76 वार्डों में त्रिकोणीय और 130 वार्डों में बहुकोणीय संघर्ष की स्थिति है।

भरतपुर (65 वार्ड): 23 में सीधी, 28 में त्रिकोणीय, 14 में बहुकोणीय टक्कर।

अलवर (65 वार्ड): 4 में सीधी, 9 में त्रिकोणीय, 52 में बहुकोणीय मुकाबला।

बीकानेर (79 वार्ड): 9 में सीधी, 15 में त्रिकोणीय, 55 में बहुकोणीय संघर्ष।

भीलवाड़ा (70 वार्ड): 37 में सीधी, 24 में त्रिकोणीय और 9 में बहुकोणीय मुकाबला।

संगरिया की आवाज़
Sangaria Matdaan Maha Abhiyaan 
<nis:link nis:type=tag nis:id=संगरिया nis:value=संगरिया nis:enabled=true nis:link/> नगर पालिका क्षेत्र में 1:00 तक मतदान 59.80% पोलिंग हुई
संगरिया की आवाज़।
Sangaria Matdaan Maha Abhiyaan 
<nis:link nis:type=tag nis:id=संगरिया nis:value=संगरिया nis:enabled=true nis:link/> नगर पालिका क्षेत्र में 3:00 तक मतदान 74.53 % पोलिंग हुई
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