
आजीविका मिशन से आत्मनिर्भरता की ओर: ₹10 हजार के पहले लोन से 'लखपति दीदी' बनने तक किन्ता शाक्य का प्रेरणादायक सफर
स्वावलंबन की मिसाल बनीं किन्ता शाक्य, आजीविका मिशन से बदली परिवार की तकदीर
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रमुख आधार बन चुका है। शिवपुरी जिले के कोलारस जनपद अंतर्गत ग्राम खराई की रहने वाली श्रीमती किन्ता शाक्य इस सकारात्मक बदलाव की एक प्रत्यक्ष मिसाल हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों से जूझते हुए उन्होंने आजीविका मिशन के सहयोग से आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नई पहचान बनाई है।
*संघर्ष से शुरुआत: बड़ा परिवार और सीमित साधन*
किन्ता शाक्य बताती हैं कि आजीविका मिशन से जुड़ने से पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कठिन थी। परिवार बड़ा था और जीवनयापन का मुख्य जरिया मात्र 5 बीघा कृषि भूमि थी। इस सीमित जमीन से पूरे परिवार का पालन-पोषण करना एक बड़ी चुनौती था।
*आजीविका मिशन से जुड़ाव और स्वावलंबन का पहला कदम*
विकट परिस्थितियों के बीच किन्ता शाक्य ने संघर्षों के आगे घुटने टेकने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 'राम जानकी स्व सहायता समूह' की सदस्यता ली। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें ₹10,000 का पहला ऋण मिला, जिसे उन्होंने एक छोटे स्तर पर किराना दुकान खोली। इस छोटी सी पहल ने उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता का पहला आधार तैयार किया।
*व्यावसायिक दक्षता और लगातार विस्तार*
पहला लोन समय पर चुकाने से समूह में उनकी क्रेडिट पात्रता में वृद्धि हुई। इसके बाद व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने समूह के माध्यम से ₹30,000 का दूसरा लोन लिया। इस राशि से उन्होंने एक फेरी लगाने वा वाहन (गाड़ी) खरीदा।
अब उनके पति इस गाड़ी से आसपास के गांवों में घूम-घूमकर दैनिक जरूरत का सामान बेचने लगे। दुकान के साथ-साथ फेरी का काम शुरू होने से ग्राहकों की संख्या बढ़ी और आय में गुणात्मक वृद्धि हुई।
समय पर ऋण चुकाने के बाद उन्होंने अपनी बचत और समूह के सहयोग से खेती और व्यावसायिक उपयोग के लिए एक ट्रैक्टर खरीदा। आगे चलकर उन्होंने थ्रेशर मशीन भी ली, जिसका संचालन उनके बेटे के द्वारा किया जाता है। आज इस कृषि यंत्र और ट्रैक्टर के माध्यम से वह सालाना लगभग ₹2,00,000 की आय अर्जित कर रही है।
सशक्तिकरण और प्रेरणा की नई मिसाल
एक समय संसाधनों के अभाव से जूझने वाली किन्ता शाक्य आज न केवल अपने पूरे परिवार को एक सशक्त और समृद्ध आर्थिक आधार दे चुकी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। अपनी इस अभूतपूर्व सफलता का श्रेय वह मध्यप्रदेश सरकार के आजीविका मिशन और प्रशासन के सहयोग को देती हैं, जिसने उनके संघर्ष को सफलता में बदलकर आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार किया है।
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