
• कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने कृषि, सहकारिता, मत्स्य एवं उद्यानिकी विभाग की गतिविधियों की समीक्षा की
• रबी सीजन में किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक और बीज उपलब्ध कराएं, कालाबाजारी पर रखें नजर
• योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाने, फील्ड निरीक्षण बढ़ाने और लक्ष्यों की समय-सीमा में पूर्ति के दिए निर्देश
कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने कृषि, सहकारिता, मत्स्य एवं उद्यानिकी विभाग की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र एवं जरूरतमंद किसानों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें। किसानों की आय में वृद्धि, कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने तथा खेती को लाभकारी बनाने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि जिला स्तर से लेकर विकासखंड स्तर तक के अधिकारी किसानों के निरंतर संपर्क में रहें और उनकी समस्याओं का समय पर निराकरण करें। विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए तथा निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा किया जाए।
रबी सीजन में उर्वरक की उपलब्धता और वितरण पर विशेष ध्यान दें
कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने रबी सीजन को दृष्टिगत रखते हुए जिले में उर्वरक की उपलब्धता, वितरण एवं आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों को आवश्यकता के अनुसार समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाए तथा उर्वरक की कालाबाजारी, अनियमित वितरण और निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने जैसी गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जाए। इसके लिए मैदानी अमला नियमित रूप से उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण करे और अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में अनावश्यक परेशानी न हो और वितरण व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे।
समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने मैदानी स्तर पर उपलब्ध जानकारी की गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कृषि विभाग के उप संचालक से फील्ड की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली और अपेक्षित जानकारी उपलब्ध नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों को अपने क्षेत्र की वास्तविक स्थिति, किसानों की आवश्यकताओं, उर्वरक एवं बीज की उपलब्धता और योजनाओं की प्रगति की अद्यतन जानकारी होना चाहिए। अधिकारी केवल कार्यालयीन रिपोर्ट पर निर्भर न रहें, बल्कि नियमित रूप से खेतों, कृषि केंद्रों और गांवों का भ्रमण कर वस्तुस्थिति का आकलन करें।
गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने और गुणवत्ता नियंत्रण के निर्देश
कलेक्टर ने बीज वितरण, बीज उत्पादन, अनुदान वितरण तथा फसल प्रदर्शन से संबंधित गतिविधियों की समीक्षा करते हुए किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अच्छे बीज से फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार होता है, इसलिए बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ उसके वितरण की प्रभावी निगरानी की जाए। बीज एवं अन्य कृषि आदानों के गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा किसानों को प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने आत्मनिर्भर दलहन मिशन के तहत दलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने, खरीफ फसलों से संबंधित गतिविधियों की समीक्षा तथा फसल प्रदर्शन की जानकारी व्यवस्थित रूप से संधारित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि फसल प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, बेहतर बीजों और उत्पादन बढ़ाने के प्रभावी तरीकों की जानकारी दी जाए। किसानों को उपलब्ध कराए गए बीज, अनुदान और बीज उत्पादन कार्यक्रमों की प्रगति का नियमित आकलन किया जाए, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंच सके।
कृषि योजनाओं का लाभ जरूरतमंद किसानों तक पहुंचाएं
कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मृदा परीक्षण तथा सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन के अंतर्गत संचालित आत्मा कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका लाभ पात्र एवं जरूरतमंद किसानों तक पहुंचना चाहिए। सभी विभागीय अधिकारी योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करें और जिन गतिविधियों में प्रगति अपेक्षाकृत कम है, उनमें तेजी लाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि कृषि विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत प्रशिक्षण, किसान संगोष्ठी, जागरूकता कार्यक्रम और प्रदर्शन गतिविधियां आयोजित की जाएं। इन कार्यक्रमों में अधिक से अधिक किसानों को आमंत्रित कर उन्हें योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, उपलब्ध सहायता तथा आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जाए। योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं, जिससे किसानों को समय पर जानकारी मिल सके और वे उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर
कलेक्टर ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के उद्देश्यों, प्राकृतिक खेती की पद्धतियों और इसके संभावित लाभों से अवगत कराया जाए। किसानों को प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित करें तथा उन्हें आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचारों को प्रोत्साहित करना और किसानों को नई तकनीकों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
उद्यानिकी फसलों और अश्वगंधा की खेती को दें प्रोत्साहन
कलेक्टर ने उद्यानिकी विभाग की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए क्लस्टर आधारित विकास कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि उद्यानिकी क्लस्टरों में किए जा रहे कार्यों की नियमित निगरानी की जाए और किसानों को फल, सब्जी तथा अन्य लाभकारी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए। किसानों को उनकी भूमि, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसल चयन के संबंध में मार्गदर्शन दिया जाए, जिससे खेती की लागत को नियंत्रित करने और आय बढ़ाने में सहायता मिल सके। उन्होंने अश्वगंधा की खेती से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ लाभकारी वैकल्पिक फसलों के बारे में भी जानकारी दी जाए। इसके लिए खेती की तकनीक, उत्पादन की संभावनाओं और बाजार से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि के लिए विभागीय अधिकारी परंपरागत गतिविधियों के साथ नए प्रयोगों और नवाचारों को भी बढ़ावा दें। किसानों को तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण तथा विभागीय योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकें।
पशुपालन योजनाओं के लक्ष्य पूरे करें, चलित पशु चिकित्सा इकाइयों की निगरानी बढ़ाएं
कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने पशुपालन से संबंधित योजनाओं की समीक्षा करते हुए डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने गो-संवर्धन योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए कहा कि पशुपालकों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए विभागीय अधिकारी सक्रियता से कार्य करें। पशुपालन को किसानों की आय का अतिरिक्त एवं स्थायी स्रोत बनाने के लिए हितग्राहियों को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने चलित पशु चिकित्सा इकाइयों की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन वाहनों की क्षेत्रवार आवाजाही, निर्धारित भ्रमण कार्यक्रम और किसानों एवं पशुपालकों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की निगरानी की जाए।
किसानों को ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सरल बनाएं
कलेक्टर ने सहकारिता विभाग की समीक्षा करते हुए फसल ऋण वितरण प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को प्रभावी ढंग से पूरा किया जाए। नवीन किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की ऑनलाइन स्वीकृति की व्यवस्था में तेजी लाई जाए, ताकि किसानों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
मत्स्य उत्पादन बढ़ाने और योजनाओं की प्रभावी निगरानी के निर्देश
कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने मत्स्य विभाग की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए कोलार जलाशय से संबंधित कार्यों, भूमि आवंटन, मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना, स्मार्ट फिश, मत्स्य बीज उत्पादन तथा मत्स्य उत्पादन की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि मत्स्य पालन से जुड़ी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जाए और निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति के लिए कार्ययोजना बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए मत्स्य बीज उत्पादन एवं मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ हितग्राहियों को तकनीकी मार्गदर्शन और विभागीय योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे नियमित मैदानी भ्रमण करें, किसानों एवं हितग्राहियों से सीधा संवाद बनाए रखें और योजनाओं की प्रगति का निरंतर आकलन करें। उन्होंने कहा कि कृषि, सहकारिता, पशुपालन, उद्यानिकी एवं मत्स्य पालन विभाग आपसी समन्वय से कार्य करते हुए किसानों की समस्याओं का समाधान करें। शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के पात्र हितग्राही तक पहुंचाना, कृषि उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में वृद्धि करना सभी विभागों की प्राथमिकता होनी चाहिए। बैठक में जिला पंचायत सीइओ श्रीमती सर्जना यादव, डीडीए श्री एके उपाध्याय, उपसंचालक पशुपालन डॉ आर.पी.गौतम, सहायक आयुक्त सहकारिता श्री सुधीर केथवास, सहायक संचालक मत्स्य श्री प्रशांत हर्ष तथा सहायक संचालक उद्यानिकी श्री जगदीश मुजालदा उपस्थित रहे।
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