
CGPSC घोटाले का क्या राज है? | SA News Chhattisgarh
रायपुर | 11-09-2026: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा खुलासा किया है। ED ने 1 सितंबर 2026 को रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर समेत पांच ठिकानों पर तलाशी लेकर डिजिटल डिवाइस, वित्तीय रिकॉर्ड और अहम दस्तावेज जब्त किए। यह कार्रवाई PMLA, 2002 के तहत की गई।
ED के मुताबिक, जांच EOW-ACB और CBI-ACB रायपुर में दर्ज दो FIR के आधार पर शुरू हुई। मामलों में तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत अन्य लोगों पर 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित हेरफेर और भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
जांच में सामने आया कि परीक्षा के प्रश्नपत्र निजी बिचौलियों के जरिए कुछ रिश्तेदारों और चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए। ED का दावा है कि डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी जैसे पदों पर चयन कराने के नाम पर अवैध रकम ली गई।
एजेंसी के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC-2021 का लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भरोसा देकर अभ्यर्थियों से नकद रकम वसूली। जांच में तीन करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय का पता चला, जिसमें करीब 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को दिए जाने की बात सामने आई है।
ED ने यह भी आरोप लगाया कि उत्कर्ष चंद्राकर ने अभ्यर्थियों को प्रभावित करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सहायक केके चंद्रवंशी और मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ एक OSD के नाम व प्रभाव का इस्तेमाल किया।
ED ने डिजिटल साक्ष्यों, बयानों और बैंक खातों के विश्लेषण के आधार पर उत्कर्ष चंद्राकर को 1 सितंबर को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, वित्तीय एवं संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। मामले में आगे की जांच जारी है।
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