अगर कोई नेता कहता है “आरक्षण था, आरक्षण है और आरक्षण रहेगा” तो अगला सवाल स्वाभाविक है, क्या आरक्षण का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुँच रहा है........!
जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है? एक तरफ़ ऐसे परिवार हैं जिनके पास पीढ़ियों से राजनीतिक,आर्थिक और सामाजिक संसाधन मौजूद हैं.......!
दूसरी तरफ़ आज भी लाखों गरीब परिवार खेती,मजदूरी,पशुपालन और छोटे-मोटे कामों के सहारे जीवन चला रहे हैं, इसलिए सवाल किसी एक जाति या नेता के खिलाफ नहीं,......!
व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर होना चाहिए,गरीबी किसी की जाति देखकर नहीं आती,तो सामाजिक न्याय की नीतियों में गरीब और सबसे वंचित व्यक्ति की वास्तविक स्थिति पर भी गंभीर चर्चा क्यों न हो......?
आरक्षण रहे या उसमें सुधार हो, फैसला भावनाओं से नहीं, आंकड़ों संविधान और वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर होना चाहिए........!
#Akhileshyadav #reservation