
#टिकट_कटा_तो_निर्दलीय_बनकर_मैदान_में_उतरे_दीनदयाल खवास
भाजपा प्रत्याशी जितेंद्र शर्मा को दी सीधी चुनौती
कांग्रेस के संजय पोद्दार और निर्दलीय आनंद सिंह ने मुकाबले को बनाया बेहद रोचक
“टूटेगा 74 साल का इतिहास?” “वार्ड 18 में किसका राज?”
पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष दीनदयाल खवास बचा पाएंगे अपनी साख?
वार्ड 18 में मुकाबला हुआ रोचक—भाजपा के जितेंद्र शर्मा के सामने पूर्व मंडल अध्यक्ष व पूर्व पालिका उपाध्यक्ष दीनदयाल खवास निर्दलीय मैदान में
बिसाऊ। नगरपालिका चुनाव के नामांकन पत्र उठने और तस्वीर साफ होने के साथ ही बिसाऊ के वार्डों में चुनावी मुकाबलों का रोमांच बढ़ गया है। कहीं आमने-सामने की टक्कर है तो कहीं त्रिकोणीय और चौकोणीय मुकाबले ने चुनावी गणित उलझा दिया है। इन्हीं में वार्ड नंबर 18 का मुकाबला इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है।
इस वार्ड में चुनाव सिर्फ प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा, राजनीतिक वजूद और इतिहास बदलने की चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है।
1952 से अब तक नहीं टूटा सिलसिला
बिसाऊ नगरपालिका बनने के बाद से अब तक 11 उपाध्यक्ष बन चुके हैं। लेकिन राजनीतिक चर्चा के अनुसार उपाध्यक्ष बनने के बाद दोबारा पार्षद का चुनाव जीतकर सदन में वापसी करने का इतिहास अब तक नहीं बन पाया है। ऐसे में वर्ष 2026 का चुनाव इस पुराने रिकॉर्ड को बदलने की बड़ी परीक्षा बन गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या दीनदयाल खवास इस बार इतिहास बदल पाएंगे?
भाजपा के टिकट के सामने भाजपा का ही पुराना चेहरा
वार्ड 18 में भाजपा ने युवा चेहरे जितेंद्र शर्मा को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं पार्टी से टिकट की दावेदारी कर रहे पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष, पूर्व पालिका उपाध्यक्ष और तीन बार पार्षद रह चुके दीनदयाल खवास ने टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
दीनदयाल खवास इससे पहले 1994, 2004 और 2014 में पार्षद का चुनाव जीत चुके हैं। खास बात यह है कि वर्ष 2004 और 2014 में उन्होंने मंडल अध्यक्ष रहते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। बाद में पार्टी में शामिल होकर उन्होंने नगरपालिका में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली।
इस बार भाजपा ने उनका टिकट काटकर युवा चेहरे जितेंद्र शर्मा पर भरोसा जताया। इसके बाद खवास ने निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल कर अपनी ही पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के सामने चुनावी ताल ठोक दी।
चौकोणीय मुकाबले ने बढ़ाई धड़कन
वार्ड 18 में मुकाबला अब केवल भाजपा बनाम भाजपा तक सीमित नहीं है। भाजपा के जितेंद्र शर्मा और निर्दलीय दीनदयाल खवास के साथ कांग्रेस के संजय पोद्दार तथा निर्दलीय आनंद सिंह भी मैदान में हैं।
चार प्रत्याशियों की मौजूदगी ने वार्ड का चुनावी गणित पूरी तरह बदल दिया है। हर प्रत्याशी अपने-अपने समीकरण और मतदाताओं के बीच पकड़ के आधार पर जीत का दावा कर रहा है।
किसके खाते में जाएगा नाराजगी का वोट?
सबसे बड़ा चुनावी सवाल यही है कि भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी जितेंद्र शर्मा के सामने निर्दलीय मैदान में उतरे दीनदयाल खवास अपनी पुरानी राजनीतिक पकड़ और तीन बार की जीत का फायदा उठा पाएंगे या नहीं।
दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी संजय पोद्दार भी भाजपा के भीतर टिकट को लेकर पैदा हुई नाराजगी और असंतुष्ट मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटे हैं। वहीं निर्दलीय आनंद सिंह भी अपनी मौजूदगी से मुकाबले को और पेचीदा बना रहे हैं।
अब फैसला मतदाताओं के हाथ
एक तरफ भाजपा का अधिकृत टिकट और नया युवा चेहरा है, तो दूसरी तरफ पार्टी के पुराने और अनुभवी चेहरे दीनदयाल खवास निर्दलीय के रूप में मैदान में हैं। साथ में कांग्रेस और एक अन्य निर्दलीय प्रत्याशी ने मुकाबले को चौकोणीय बना दिया है।
अब देखना होगा कि वार्ड 18 के मतदाता अनुभव पर भरोसा जताते हैं, युवा चेहरे को मौका देते हैं या कांग्रेस/निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में नया समीकरण तैयार करते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या दीनदयाल खवास एक बार फिर निर्दलीय जीत दर्ज कर पुराने इतिहास को बदल पाएंगे?
या भाजपा का नया चेहरा जितेंद्र शर्मा पार्टी का गढ़ बचाने में कामयाब होगा?
फैसला मतदाताओं के हाथ में है और वार्ड 18 का चुनाव परिणाम बिसाऊ की राजनीति में एक नया अध्याय लिख सकता है।
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