
8 कमरों में 150 छात्राएं… तीन अधीक्षिकाएं, फिर भी छात्रावास में कोई नहीं!
मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत टोंकखुर्द एसडीएम का औचक निरीक्षण, बालिका छात्रावास की व्यवस्थाओं ने खोली लापरवाही की परतें
दिलीप मिश्रा | एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
देवास। शाम के करीब 6:15 बजे… टोंकखुर्द का अनुसूचित जाति-जनजाति बालिका छात्रावास। छात्राओं की सुरक्षा और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालने वाली तीन अधीक्षिकाएं पदस्थ हैं, लेकिन जब टोंकखुर्द एसडीएम रितु चौरसिया अचानक छात्रावास पहुंचीं तो मौके पर एक भी अधीक्षिका मौजूद नहीं मिली।
औचक निरीक्षण में सामने आई व्यवस्थाओं ने छात्रावास संचालन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
यहां पिपलिया सड़क, टोंकखुर्द सहित तीन छात्रावासों की छात्राएं रह रही हैं। निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने पाया कि तीन छात्रावासों की छात्राओं को एक ही छात्रावास भवन में रखा गया है। मात्र 8 कमरों में करीब 150 छात्राओं के रहने की स्थिति सामने आई।
यानी सवाल सिर्फ कमरों की संख्या का नहीं है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं के बीच रहने, सुरक्षा, निगरानी और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था आखिर किस तरह संचालित हो रही है?
तीन अधीक्षिकाएं… लेकिन निरीक्षण के वक्त एक भी मौजूद नहीं
बालिका छात्रावास की व्यवस्था में अधीक्षिका की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। छात्राओं की उपस्थिति, सुरक्षा, भोजन, अनुशासन और रोजमर्रा की व्यवस्थाओं की निगरानी की जिम्मेदारी भी इसी व्यवस्था से जुड़ी होती है।
लेकिन 18 सितंबर की शाम जब एसडीएम रितु चौरसिया औचक निरीक्षण के लिए पहुंचीं, तब तीनों अधीक्षिकाएं छात्रावास में मौजूद नहीं थीं। औचक निरीक्षण में उनकी अनुपस्थिति ने जिम्मेदारी और निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसडीएम ने निरीक्षण के बाद मामले की जानकारी जिला संयोजक आदिम जाति विकास विभाग को दी और अपना प्रतिवेदन कलेक्टर को भी भेजा।
8 कमरों में 150 छात्राएं… व्यवस्था पर बड़ा सवाल
निरीक्षण में सामने आया कि एक ही छात्रावास में तीन छात्रावासों की छात्राएं रह रही हैं। करीब 150 छात्राओं के लिए सिर्फ 8 कमरे। यह स्थिति छात्राओं के रहने की क्षमता, उपलब्ध स्थान और मूलभूत सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अगर एक भवन में तीन छात्रावासों की छात्राओं को रखा गया है तो क्या अतिरिक्त व्यवस्था की गई? क्या कमरों की क्षमता के अनुरूप छात्राओं की संख्या निर्धारित की गई? क्या छात्राओं की निजता और पर्याप्त रहने की जगह सुनिश्चित है? इन सवालों के जवाब व्यवस्था को देने होंगे।
किचन में बदबू… ड्रेनेज व्यवस्था भी सुचारू नहीं
एसडीएम के निरीक्षण में केवल आवासीय व्यवस्था ही सवालों के घेरे में नहीं आई। छात्रावास के किचन की ड्रेनेज व्यवस्था सुचारू नहीं मिली। किचन में बदबू आने की बात भी निरीक्षण में सामने आई। बालिका छात्रावास में भोजन व्यवस्था सीधे छात्राओं के स्वास्थ्य से जुड़ी है। ऐसे में किचन के आसपास जल निकासी की समस्या और दुर्गंध को महज छोटी अव्यवस्था मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
शाम 6 बजे के बाद पुरुष अधीक्षक की आवाजाही!
निरीक्षण के दौरान छात्रावास में बाहरी व्यक्ति के प्रवेश और आवाजाही का मुद्दा भी सामने आया। एसडीएम के मुताबिक, उन्हें जानकारी मिली कि शाम 6 बजे के बाद भी एक अन्य छात्रावास के पुरुष अधीक्षक धर्मेंद्र पटेल का बालिका छात्रावास में आना-जाना होता है। यह बात छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े करती है। एसडीएम रितु चौरसिया ने इस संबंध में भी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी है।
यहां सवाल किसी व्यक्ति पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि बालिका छात्रावास में प्रवेश और निगरानी की स्पष्ट व्यवस्था का है। कौन प्रवेश कर सकता है? किस समय प्रवेश की अनुमति है? प्रवेश का रिकॉर्ड रखा जाता है या नहीं? और छात्राओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारी मौके पर क्यों नहीं थे?
इन सवालों की जांच अब विभागीय स्तर पर होगी।
एसडीएम की रिपोर्ट के बाद विभाग हरकत में
औचक निरीक्षण के बाद मामला जिला स्तर तक पहुंचा।
टोंकखुर्द एसडीएम रितु चौरसिया ने निरीक्षण की जानकारी जिला संयोजक आदिम जाति विकास विभाग को देने के साथ अपना प्रतिवेदन कलेक्टर को भेजा। एसडीएम ने बताया कि निरीक्षण के दौरान छात्रावास की अधीक्षिकाएं मौजूद नहीं थीं। शाम 6 बजे के बाद पुरुष अधीक्षक के बालिका छात्रावास में आने-जाने की जानकारी भी सामने आई।
वहीं जिला संयोजक आदिम जाति विकास विभाग नीरज अब्राहम के मुताबिक, बालिका छात्रावास की तीनों अधीक्षिकाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। छात्रावास में आने वाले पुरुष अधीक्षक धर्मेंद्र पटेल को भी नोटिस दिया गया है। विभाग का कहना है कि संबंधितों से जवाब प्राप्त होने के बाद कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अब असली सवाल कार्रवाई का
औचक निरीक्षण में सामने आई स्थिति के बाद नोटिस जारी हो गए हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आगे क्या होगा? क्या छात्राओं के लिए पर्याप्त कमरों की व्यवस्था होगी? क्या तीनों छात्रावासों को अलग-अलग व्यवस्थित किया जाएगा? क्या किचन की ड्रेनेज समस्या दूर होगी? क्या अधीक्षिकाओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनेगी? और सबसे अहम—बालिका छात्रावास में प्रवेश एवं सुरक्षा के नियमों का पालन किस तरह सुनिश्चित किया जाएगा?
नोटिस से आगे बढ़कर व्यवस्था में बदलाव ही इस निरीक्षण की वास्तविक सफलता मानी जाएगी।
सामने आए प्रमुख तथ्य
18 सितंबर | शाम 6:15 बजे
टोंकखुर्द एसडीएम का औचक निरीक्षण
3 छात्रावासों की छात्राएं
एक ही परिसर में रहने की स्थिति
करीब 150 छात्राएं
सिर्फ 8 कमरों में रहने की स्थिति
3 अधीक्षिकाएं
निरीक्षण के समय एक भी मौके पर मौजूद नहीं
किचन
ड्रेनेज व्यवस्था सुचारू नहीं, बदबू की शिकायत/स्थिति
पुरुष अधीक्षक की आवाजाही
शाम 6 बजे के बाद बालिका छात्रावास में आने की जानकारी
विभागीय कार्रवाई
तीनों अधीक्षिकाओं और संबंधित पुरुष अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस
व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी?
बालिका छात्रावास केवल रहने की जगह नहीं है। यहां रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा, शिक्षा के अनुकूल वातावरण, भोजन, स्वच्छता और निगरानी व्यवस्था की मूल जिम्मेदारी है।
टोंकखुर्द के इस छात्रावास के औचक निरीक्षण ने कम से कम इतना जरूर सामने ला दिया है कि कागजों पर मौजूद व्यवस्था और मौके की स्थिति के बीच अंतर की जांच जरूरी है।
अब निगाह विभागीय जवाब और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर है।
#DewasNews #Tonkkhurd #HostelNews #MadhyaPradeshNews #TimesMP