
देवास का जय, एशिया के मंच पर छा गया
कभी कोर्ट पर गेंद उठाता था… आज उसी कोर्ट के खेल में भारत का इतिहास बन गया
देवास के 14 वर्षीय जय मीना ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, सॉफ्ट टेनिस में भारत को दिलाया पहला पदक
दिलीप मिश्रा
देवास। देवास से नागोया तक का सफर सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उस सपने की कहानी है जो एक छोटे से स्कूल के कोर्ट से शुरू हुआ और एशिया के सबसे बड़े खेल मंच तक पहुंच गया।
जिस खेल को भारत में बहुत कम लोग जानते हैं, उसी सॉफ्ट टेनिस में देवास के जय मीना ने ऐसा इतिहास रच दिया, जिसे आने वाले वर्षों तक याद किया जाएगा।
जापान के आइची-नागोया में चल रहे 20वें एशियन गेम्स में जय मीना ने पुरुष एकल सॉफ्ट टेनिस में कांस्य पदक जीतकर भारत को इस खेल में एशियन गेम्स का पहला पदक दिलाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जय की उपलब्धि को भारतीय सॉफ्ट टेनिस के लिए ऐतिहासिक बताया।
लेकिन जय की कहानी की असली खूबसूरती पदक जीतने से पहले की कहानी में छिपी है।
क्रिकेटर बनने का सपना था… सॉफ्ट टेनिस ने बदल दी जिंदगी
देवास में पढ़ाई के दौरान जय की पहली पसंद क्रिकेट थी। लेकिन पायनियर पब्लिक स्कूल के परिसर में मौजूद सॉफ्ट टेनिस कोर्ट ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। शुरुआत खिलाड़ी के रूप में नहीं हुई। जय पहले कोर्ट के किनारे खड़े होकर खिलाड़ियों को देखते थे। फिर गेंद उठाने में मदद करने लगे। यानी जिस कोर्ट पर कभी वे बॉल बॉय की भूमिका में थे, कुछ साल बाद उसी खेल के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने लगे।
रिपोर्टों के मुताबिक, इसी दौरान खेल के प्रति उनकी रुचि बढ़ती गई और उन्होंने रैकेट अपने हाथ में थाम लिया।
गेंद उठाने वाले हाथों में रैकेट आया… और वही रैकेट इतिहास लिख गया।
कांस्य तक पहुंचने की कहानी
एशियन गेम्स में जय का सफर आसान नहीं था। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने फिलीपींस के शेरविन नुगुइट को बेहद करीबी मुकाबले में 4-3 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। इस जीत के साथ ही भारत का सॉफ्ट टेनिस में पहला एशियन गेम्स पदक सुनिश्चित हो गया था।
सेमीफाइनल में जय का सामना जापान के ताकुया कुरोसाका से हुआ। जय ने मुकाबले में वापसी की कोशिश की, लेकिन अंततः जापानी खिलाड़ी से हार गए और उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। लेकिन इस हार में भी एक बड़ी जीत छिपी थी।
क्योंकि जय से पहले एशियन गेम्स में सॉफ्ट टेनिस में भारत के नाम कोई पदक नहीं था। अब उस इतिहास के पहले पन्ने पर नाम है— जय मीना, देवास।
सिर्फ एशियन गेम्स नहीं, पहले भी रचा इतिहास
जय की यह उपलब्धि अचानक नहीं आई। 2022 के गुजरात नेशनल गेम्स में उन्होंने पुरुष एकल में स्वर्ण पदक जीता था। 2024 में वर्ल्ड सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में आध्या तिवारी के साथ मिश्रित युगल में कांस्य पदक जीतकर वे भारत की पहली पदक जीतने वाली जोड़ी का हिस्सा बने। 2025 की एशियन सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में भी उन्होंने पदक हासिल किया।
यानी देवास से निकला यह खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी पहचान बना रहा था। एशियन गेम्स का कांस्य उस सफर का सबसे बड़ा अध्याय बन गया।
देवास के लिए क्यों खास है यह पदक?
किसी बड़े शहर की चमकदार खेल अकादमी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पदक जीतना एक उपलब्धि है।
लेकिन देवास जैसे शहर से निकलकर उस खेल में देश का पहला एशियन गेम्स पदक जीतना, जिसे अभी भी भारत में बहुत कम लोग जानते हैं—यह कहानी को और खास बना देता है। जय ने साबित किया कि प्रतिभा सिर्फ बड़े शहरों की मोहताज नहीं होती। जरूरत होती है—मौके की। मेहनत की। लगातार अभ्यास की... और उस खेल को गंभीरता से लेने की, जिसे दुनिया शायद अभी पहचानना शुरू ही कर रही हो।
एक पदक, कई सवाल
जय का कांस्य सिर्फ जश्न का मौका नहीं, खेल व्यवस्था के लिए एक सवाल भी है। सॉफ्ट टेनिस भारत में अभी भी क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन या टेनिस जैसी लोकप्रियता नहीं रखता। जय की सफलता ने इस खेल को अचानक राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है।
अब सवाल यह है कि क्या इस पदक के बाद देवास और मध्यप्रदेश में सॉफ्ट टेनिस के लिए बेहतर सुविधाएं बढ़ेंगी?
क्या स्कूल स्तर पर बच्चों को इस खेल से जोड़ा जाएगा?
क्या छोटे शहरों की प्रतिभाओं को नियमित प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और आर्थिक सहयोग का मजबूत सिस्टम मिलेगा? जय का पदक इन सवालों को सामने लाने का अवसर भी है।
देवास की मिट्टी से निकला नया खेल चेहरा
जय मीना की कहानी की सबसे बड़ी ताकत शायद यही है कि इसमें शुरुआत बहुत साधारण है। एक बच्चा। एक स्कूल। एक खेल का कोर्ट। गेंद उठाने से शुरुआत। रैकेट हाथ में आया। फिर अभ्यास। फिर राष्ट्रीय मंच। फिर अंतरराष्ट्रीय मुकाबले। और आखिरकार—एशियन गेम्स का कांस्य।
भारत के लिए सॉफ्ट टेनिस का पहला एशियन गेम्स पदक।
और इस इतिहास के साथ देवास का नाम भी हमेशा के लिए जुड़ गया।
आज देवास सिर्फ जय पर गर्व नहीं कर रहा…
आज देवास यह भी देख रहा है कि उसके ही बीच से निकला एक युवा खिलाड़ी उस खेल में भारत का पहला एशियन गेम्स पदक विजेता बन गया, जिसे कभी उसने सिर्फ स्कूल के एक कोर्ट पर खेलते हुए देखा था। जिस कोर्ट पर जय कभी गेंद उठाता था, उसी खेल ने उसे इतिहास के पन्नों पर पहुंचा दिया।
जय मीना — उपलब्धियां एक नजर में
• एशियन गेम्स 2026 — पुरुष एकल सॉफ्ट टेनिस में कांस्य
• एशियन गेम्स में सॉफ्ट टेनिस में भारत का पहला पदक
• 2022 नेशनल गेम्स — पुरुष एकल स्वर्ण
• 2024 वर्ल्ड सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप — मिश्रित युगल कांस्य
• 2025 एशियन सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में पदक
• देवास के पायनियर पब्लिक स्कूल से सॉफ्ट टेनिस की शुरुआत
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