
प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों नहीं, शरीर के दूसरे अंगों को भी करता है प्रभावित
इंदौर। ICAAI और अमलतास यूनिवर्सिटी के संयुक्त आयोजन में 24 से 27 सितंबर तक चले ICAAICON 2026 का समापन हुआ। सम्मेलन में देशभर से 500 से अधिक विशेषज्ञों ने एलर्जी, अस्थमा, वायु प्रदूषण और आधुनिक उपचार तकनीकों पर मंथन किया।
मेदांता के डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि देश का 58 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र प्रदूषण से प्रभावित है। प्रदूषण केवल दिल्ली या उत्तर भारत की समस्या नहीं है और इसका असर पूरे साल स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। प्रदूषित हवा के कण रक्त के जरिए फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकते हैं। गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशु पर भी इसका असर पड़ सकता है।
ICAAI सचिव डॉ. राज कुमार ने कहा कि सांस की हर बीमारी एलर्जी नहीं होती। विशेषज्ञों ने एलर्जी की समय पर जांच और उपचार पर जोर दिया। जयपुर के डॉ. सुरेश कूलवाल को एलर्जी एवं श्वसन चिकित्सा में योगदान के लिए ICAAI Life Time Achievement Award 2026 से सम्मानित किया गया।
समापन के बाद आमजन के लिए जागरूकता सत्र में विशेषज्ञों ने एलर्जी, अस्थमा, फूड एवं ड्रग एलर्जी और मौसमी एलर्जी से जुड़े सवालों के जवाब दिए।