बिलासपुर पिस्टल मामले में फिर नया मोड़: युवक का दावा—पुलिस के दबाव में बनवाया गया वीडियो, आखिर सच्चाई क्या? Himachal Pradesh Police SP Bilaspur HP Sukhvinder Singh Sukhu Jairam Thakur DC Bilaspur
पहले मारपीट और पिस्टल दिखाने का लगाया था आरोप, फिर सोशल मीडिया वीडियो में कहा कुछ नहीं हुआ; अब दोबारा बदला बयान, मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में जिला न्यायालय परिसर, डीसी ऑफिस और एसपी ऑफिस के समीप स्थित राणा पार्किंग में कथित मारपीट और पिस्टल दिखाने के मामले में लगातार नए मोड़ सामने आ रहे हैं। पहले युवक ने अपने साथ मारपीट होने, पिस्टल दिखाने और जबरन गाड़ी में डालने की कोशिश का दावा किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि उसने गुस्से में ऐसी बातें कह दी थीं और वास्तव में ऐसा कुछ नहीं हुआ था। अब युवक एक बार फिर अपने बयान से पलट गया है। उसका दावा है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया वीडियो पुलिस के दबाव में बनवाया गया था।
पहले लगाए गंभीर आरोप, फिर वीडियो में दी सफाई
UT Himachal की टीम ने इस मामले को लेकर फेसबुक लाइव किया था। उस दौरान युवक ने दावा किया था कि उसके साथ मारपीट की गई, उसे जबरन गाड़ी में डालने की कोशिश हुई और दो लोगों के पास पिस्तौल थी। युवक ने दावा किया था कि संबंधित लोग पंजेहरा-नालागढ़ की तरफ से आए थे और घटनाक्रम करीब 15 मिनट तक चला था।
युवक ने यह भी बताया था कि उसने मामले को लेकर 1100 नंबर पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करवाई है। लाइव के दौरान उसके साथ मौजूद बताए जा रहे कुछ लोगों ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे।
हालांकि, इसके बाद युवक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उसने कहा कि उसने गुस्से में आकर पहले ऐसी बातें कह दी थीं और वास्तव में ऐसा कुछ नहीं हुआ था।
अब कहा—पुलिस के दबाव में बनवाया वीडियो
अब युवक का कहना है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया वीडियो पुलिस के दबाव में बनवाया गया था। इस नए दावे के बाद मामला और गंभीर हो गया है। एक तरफ युवक के शुरुआती आरोप हैं, दूसरी तरफ उसका आरोपों से पीछे हटना और अब वीडियो दबाव में बनवाए जाने का दावा है।
हालांकि, युवक के इस नए दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि वीडियो किन परिस्थितियों में बनाया गया और क्या वास्तव में किसी तरह का दबाव बनाया गया था।
आखिर सच क्या है? निष्पक्ष जांच जरूरी
पूरे घटनाक्रम ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या राणा पार्किंग में वास्तव में कोई विवाद हुआ था? क्या युवक को पिस्टल दिखाई गई थी? यदि शुरुआती आरोप सही थे, तो बाद में उसने उन्हें क्यों वापस लिया? और यदि वीडियो दबाव में बनवाया गया था, तो इसके पीछे क्या परिस्थितियां थीं?
इन सवालों का जवाब केवल बयानों के आधार पर देना उचित नहीं होगा। मामले में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, संबंधित शिकायत, घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान और वीडियो बनाए जाने की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
यह मामला अब केवल कथित मारपीट या पिस्टल दिखाने के आरोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवक के लगातार बदलते बयानों और पुलिस पर लगाए गए नए आरोपों के कारण भी गंभीर हो गया है।
निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में घटनास्थल पर क्या हुआ, युवक के शुरुआती आरोपों में कितनी सच्चाई थी और बाद में सामने आए दोनों बयानों के पीछे क्या परिस्थितियां थीं। पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
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