पड़ोसी देशों में पोलियो वायरस की मौजूदगी के बीच बढ़ी सतर्कता, जिले में टीकाकर्मियों का प्रशिक्षण तेज
प्रेस विज्ञप्ति 468, दिनांक 15.06.2026
किशनगंज जिला में भारत को वर्ष 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया जा चुका है, लेकिन दुनिया के कुछ देशों में आज भी पोलियो वायरस का संक्रमण पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। विशेष रूप से भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान और पाकिस्तान में समय-समय पर पोलियो के नए मामले सामने आने से वायरस के सीमा पार फैलने की आशंका बनी रहती है। यही कारण है कि पोलियो मुक्त दर्जा बनाए रखने के लिए प्रत्येक राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कड़ी में 28 जून से 2 जुलाई 2026 तक चलने वाले राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत किशनगंज जिले के 0 से 5 वर्ष आयुवर्ग के कुल 3 लाख 22 हजार 826 बच्चों को पोलियो रोधी दवा की दो बूंद पिलाई जाएगी। अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए जिले में टीकाकर्मियों एवं पर्यवेक्षकों का व्यापक प्रशिक्षण जारी है, ताकि कोई भी बच्चा इस सुरक्षा कवच से वंचित न रह जाए।
सभी टीकाकर्मियों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण, गुणवत्ता पर रहेगा पूरा फोकस
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि पोलियो के खिलाफ लड़ाई में सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। यदि एक भी बच्चा टीकाकरण से छूट जाता है तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए जिले में सभी स्वास्थ्यकर्मियों, आशा, एएनएम एवं पर्यवेक्षकों को अभियान के प्रत्येक चरण की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं।
927 हाउस-टू-हाउस टीमें और 315 सुपरवाइजर संभालेंगे जिम्मेदारी
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि अभियान के सफल संचालन के लिए जिले में 927 हाउस-टू-हाउस टीमें, 90 ट्रांजिट टीमें, 25 मोबाइल टीमें, 8 ओवरसीज ट्रांजिट टीमें, 315 सुपरवाइजर तथा 56 सब-डिपो बनाए गए हैं। सभी टीमों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि घर-घर जाकर प्रत्येक पात्र बच्चे को पोलियो की खुराक पिलाई जा सके और किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता न हो।
प्रखंडवार माइक्रोप्लान के अनुसार चलेगा अभियान
डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि जिले में बहादुरगंज के 47,293, दिघलबैंक के 43,556, किशनगंज ग्रामीण के 30,609, किशनगंज शहरी के 17,950, कोचाधामन के 58,997, पोठिया के 42,561, टेढ़ागाछ के 29,868 तथा ठाकुरगंज के 51,992 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए प्रत्येक प्रखंड में माइक्रोप्लान तैयार कर टीमों की जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं।
इंडेलिबल इंक से होगी पहचान, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी रहेगी विशेष निगरानी
अभियान की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पोलियो की खुराक पी चुके बच्चों की उंगली पर इंडेलिबल इंक का निशान लगाया जाएगा। साथ ही बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, चौक-चौराहों और अन्य प्रमुख ट्रांजिट प्वाइंट पर विशेष टीमें तैनात रहेंगी, ताकि यात्रा के दौरान भी कोई बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रह जाए। नवजात शिशुओं को भी विशेष प्राथमिकता के साथ अभियान में शामिल किया जाएगा।
वैक्सीन वेस्टेज रोकने और हर बच्चे तक पहुंचने पर रहेगा विशेष जोर
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान टीकाकर्मियों को वैक्सीन के समुचित उपयोग, कोल्ड चेन के पालन और वैक्सीन वेस्टेज को न्यूनतम रखने के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी जा रही है। घर-घर भ्रमण के बाद यदि खुले वायल में वैक्सीन बचती है तो निर्धारित मानकों के अनुसार उसका सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य केवल अभियान चलाना नहीं, बल्कि जिले के प्रत्येक बच्चे को पोलियो जैसी आजीवन विकलांगता से सुरक्षित रखना है।
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