क्यूआर कोड स्कैन करने से पहले सोचें, कहीं भुगतान तो नहीं कर रहे : पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल
रिफंड, कैशबैक और इनाम का झांसा देकर क्यूआर कोड के माध्यम से ठगी करते हैं साइबर ठग
यमुनानगर (राष्ट्रीय कदम) ब्यूरो: पुलिस प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल आईपीएस के निर्देशानुसार जिला पुलिस द्वारा अक्टूबर माह को राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के रूप में मनाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत जिला पुलिस की ओर से स्कूल-कॉलेजों, बाजारों और विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर आमजन को साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अभियान की थीम "रुकें सोचें कार्रवाई करें" रखी गई है। अभियान के तहत निर्धारित विषय "क्यूआर कोड ठगी" के संबंध में थाना साइबर अपराध प्रभारी निरीक्षक रविंद्र कुमार ने अपनी टीम के साथ रेलवे स्टेशन यमुनानगर तथा अग्रसेन चौक जगाधरी में सेवा संकल्प अभियान के दौरान पहुंचे आम नागरिकों को साइबर ठगी के इस तरीके के बारे में विस्तार से जानकारी देकर जागरूक किया।
पुलिस टीम ने आमजन को बताया कि क्यूआर कोड ठगी में साइबर ठग क्यूआर कोड भेजकर या दिखाकर लोगों को यह विश्वास दिलाते हैं कि इसे स्कैन करने से उनके बैंक खाते में धनवापसी, नकद वापसी, इनाम या अन्य राशि प्राप्त होगी। जबकि वास्तव में ठग द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन करने पर राशि प्राप्त होने के बजाय पीड़ित के बैंक खाते से भुगतान हो सकता है। पुलिस के अनुसार साइबर ठग अक्सर ऑनलाइन खरीद-बिक्री, धनवापसी, नकद वापसी, नौकरी, इनाम अथवा किसी सामान का भुगतान प्राप्त करने के नाम पर क्यूआर कोड भेजते हैं। इसके बाद व्यक्ति से क्यूआर कोड स्कैन करने और गुप्त भुगतान संख्या दर्ज करने के लिए कहा जाता है। जैसे ही व्यक्ति क्यूआर कोड स्कैन कर गुप्त भुगतान संख्या दर्ज करता है, उसके बैंक खाते से राशि कट सकती है।
पुलिस टीम ने विशेष रूप से समझाया कि पैसे प्राप्त करने के लिए कभी भी गुप्त भुगतान संख्या दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती। गुप्त भुगतान संख्या का उपयोग भुगतान को अधिकृत करने के लिए किया जाता है। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति द्वारा धनवापसी या पैसे भेजने के नाम पर क्यूआर कोड स्कैन करने अथवा गुप्त भुगतान संख्या डालने के लिए कहा जाए तो तुरंत सतर्क हो जाएं। आमजन को सलाह दी गई कि अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन न करें। क्यूआर कोड स्कैन करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि उसका उद्देश्य क्या है और भुगतान किस व्यक्ति को किया जा रहा है। क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद स्क्रीन पर दिखाई देने वाले नाम और राशि की ध्यानपूर्वक जांच करें। पुलिस ने यह भी अपील की कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर दूरस्थ पहुंच अथवा मोबाइल नियंत्रण वाले किसी भी संदिग्ध अनुप्रयोग को अपने मोबाइल में स्थापित न करें और न ही मोबाइल की स्क्रीन साझा करें। ऑनलाइन खरीद-बिक्री अथवा धनवापसी के नाम पर प्राप्त संदिग्ध कड़ियों और क्यूआर कोड पर विश्वास न करें।
पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने आमजन से साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार के ऑनलाइन भुगतान से पहले पूरी जानकारी की जांच करें और जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं। उन्होंने नागरिकों से "रुकें सोचें-कार्रवाई करें" के सिद्धांत को अपनाने का आह्वान किया। जिला पुलिस ने आमजन को संदेश दिया कि "क्यूआर कोड स्कैन करने से पहले सोचें-कहीं आप पैसे प्राप्त करने के बजाय भुगतान तो नहीं कर रहे।" किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर बिना देरी किए साइबर अपराध सहायता केंद्र के 1930 दूरभाष नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।