स्मार्ट सिटी संगरिया का "महान" सायफन: पांच साल की तपस्या के बाद गंदे पानी को मिली आज़ादी!
संगरिया की आवाज़।
आख़िरकार वह ऐतिहासिक दिन आ ही गया, जिसका इंतज़ार वार्ड नंबर 25 के लोगों ने शायद उतनी बेसब्री से नहीं किया होगा, जितनी किसी सरकार को अपने अधूरे वादे पूरे करने की करनी चाहिए।
वार्ड नंबर 25 में गंदे पानी की निकासी के लिए बना सायफन अब चालू हो गया है। अब यह पानी वार्ड नंबर 23 से होकर धनवंतरी गौशाला के आगे खाली स्थान तक पहुंच सकेगा। सुनने में यह सामान्य प्रशासनिक कार्य लग सकता है, लेकिन इसकी कहानी किसी महाकाव्य से कम नहीं है।
बताया जाता है कि यह कार्य वर्ष 2021 में ही पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी यही है कि यहां विकास से पहले राजनीति और जनता से पहले प्रतिष्ठा का ध्यान रखा जाता है। नतीजा यह हुआ कि एक जनहित का काम वर्षों तक फाइलों, विवादों और राजनीतिक अहंकार की भेंट चढ़ा रहा।
गंदा पानी बेचारा पांच साल तक सोचता रहा होगा कि उसका आखिर कसूर क्या है? वह निकलना चाहता था, लेकिन राजनीति की दीवारें उससे कहीं ज्यादा मजबूत निकलीं। पानी का बहाव तो प्रकृति का नियम है, मगर हमारे यहां राजनीतिक रुकावटें न्यूटन के नियमों से भी ज्यादा प्रभावशाली साबित हो जाती हैं।
अब जब सायफन का शुभारंभ हुआ है तो जनता को यह समझ नहीं आ रहा कि खुशी मनाए या यह पूछे कि जिस काम को कुछ महीनों में पूरा होना था, उसके लिए पांच साल क्यों लग गए? कहीं ऐसा तो नहीं कि गंदे पानी की निकासी से पहले कुछ लोगों के मन का "राजनीतिक जाम" खुलना जरूरी था?
खैर, देर आए दुरुस्त आए। अब कम से कम गंदे पानी को तो आज़ादी मिल गई। उम्मीद की जानी चाहिए कि भविष्य में विकास कार्यों का रास्ता भी इतना ही साफ़ रहे, जितना साफ़ रखने का दावा हर चुनाव में किया जाता है।
सायफन के शुभारंभ अवसर पर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष Pradeep Beniwal , राजेश डोडा , मंगत स्वामी, हाकम छिंपा, विनोद पांडर सहित वार्डवासी उपस्थित रहे।
जनता की ओर से बस एक विनम्र निवेदन है— अगली बार गंदे पानी की निकासी का काम हो तो उसे राजनीति में मत बहाइए, नालियों में ही बहने दीजिए। 😏
Vijay Singh Beniwal ✍️🖋️
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