Public App Logo
Jansamasya
News
Bjp
National
Police
Bihar
बिहार
India
कांग्रेस
बीजेपी
भाजपा
Congress
Modi
Delhi
Viral
Jharkhand
Up
Rajasthan
Bollywood
Patna
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
Cm
Pmmodi
Rahulgandhi
यूपी
कानपुर
Uttarpradesh
Haryana

मौत के दो साल बाद जमीन की रजिस्ट्री! गया के अधिवक्ता ने खोला कथित फर्जीवाड़े का राज, एसएसपी-डीएम से लगाई न्याय की गुहार गया: दूसरों को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ने वाले गया जिला न्यायालय के अधिवक्ता इन दिनों अपनी ही पुश्तैनी जमीन बचाने के लिए प्रशासन के दरवाजे खटखटा रहे हैं। बोधगया थाना क्षेत्र के अमर बिगहा गांव निवासी अधिवक्ता मुकेश कुमार राय ने गुरुवार को जिले के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और जिलाधिकारी को आवेदन देकर अपनी जमीन पर अवैध कब्जे, फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। गया सिविल कोर्ट के अधिवक्ता मुकेश कुमार राय ने अपने आवेदन में बोधगया थाना कांड संख्या 230/2026 एवं 536/2025 के पर्यवेक्षण की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि कुछ कथित भू-माफिया उनकी बहुमूल्य जमीन पर कब्जा करने की साजिश रच रहे हैं। उनका कहना है कि मौजा अमर बिगहा, खाता संख्या 67, प्लॉट संख्या 263 एवं 315 की जमीन उनके परिवार द्वारा वर्ष 2000 और 2013 में वैध रूप से खरीदी गई थी। तब से लेकर अब तक भूमि पर उनका शांतिपूर्ण दखल-कब्जा कायम है और नियमित रूप से सरकारी लगान भी जमा किया जाता रहा है। मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू उस कथित बिक्री दस्तावेज को लेकर सामने आया है, जिसे विपक्षी पक्ष वर्ष 1985 का बता रहा है। अधिवक्ता का दावा है कि जिस स्वर्गीय मोहन पांडे के नाम से 9 सितंबर 1985 का सादा केवाला प्रस्तुत किया जा रहा है, उनका निधन 16 मई 1983 को ही हो चुका था। ऐसे में उन्होंने बड़ा सवाल उठाया है कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु दो वर्ष पहले हो चुकी थी, तो वह वर्ष 1985 में जमीन की बिक्री कैसे कर सकता है? मुकेश कुमार राय का कहना है कि यह दस्तावेज प्रथम दृष्टया पूरी तरह संदिग्ध और फर्जी प्रतीत होता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि दस्तावेज की वैज्ञानिक एवं विधिक जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उनका आरोप है कि यदि दस्तावेज की गहन जांच की जाती है तो बड़े स्तर के फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है। आवेदन में अधिवक्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-83 के अमर बिगहा क्षेत्र से गुजरने के बाद इलाके की जमीनों की कीमतों में कई गुना वृद्धि हुई है। इसके बाद से उनकी जमीन पर कुछ लोगों की नजर पड़ गई। उन्होंने आरोप लगाया कि भारी रकम और जमीन की मांग पूरी नहीं करने पर उन्हें और उनके परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाने का प्रयास किया गया। यहां तक कि उनके बच्चों के खिलाफ भी कार्रवाई कर उनके शैक्षणिक जीवन को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। अधिवक्ता ने प्रशासन से अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन आवेदन के बाद मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं। यदि अधिवक्ता के आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के बड़े खुलासे के रूप में सामने आ सकता है। #गयाजी #GayaPolice #gayabihar #बिहारसरकार #ACrime #LatestNews #jaminmamla #jammin