1-2 दिसंबर को दिल्ली में मजदूरों का ऐतिहासिक प्रतिरोध, हिमाचल से हजारों मजदूर होंगे लामबंद
सीटू राज्य कमेटी की बैठक में व्यापक तैयारी का निर्णय, “मजदूरों! घेरो दिल्ली” के आह्वान को सफल बनाने का संकल्प
शिमला। सीटू हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी की शिमला में आयोजित बैठक में 1 दिसंबर 2026 को दिल्ली में होने वाले विशाल मजदूर प्रतिरोध कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश से व्यापक मजदूर लामबंदी करने का निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने की, जबकि महासचिव प्रेम गौतम ने आंदोलन को लेकर संगठनात्मक तैयारियों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। बैठक में हिमाचल के विभिन्न जिलों और संबंधित यूनियनों से अधिक से अधिक मजदूरों को दिल्ली पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा की गई।
सीटू राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर, प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि 1 दिसंबर को कम से कम एक लाख वॉलंटियर्स को दिल्ली में लामबंद करने का लक्ष्य रखा गया है। देश के विभिन्न राज्यों से मजदूर लाल झंडों के साथ दिल्ली पहुंचेंगे और रामलीला मैदान से संसद एवं इंडिया गेट की ओर मार्च करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम महज एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि मजदूर वर्ग के “अवज्ञा और प्रतिरोध” के संघर्ष के नए चरण की शुरुआत है।
सीटू नेताओं ने कहा कि केंद्र की वर्तमान सरकार की मजदूर, किसान और आम जनता विरोधी नीतियों के कारण देश में बेरोजगारी, महंगाई, असमानता और रोजगार की असुरक्षा लगातार बढ़ रही है। वहीं, श्रमिकों के दशकों के संघर्षों से हासिल अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है और श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में बदलकर श्रमिकों को अधिक असुरक्षित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की आवाज दबाने, ट्रेड यूनियन गतिविधियों को सीमित करने और हड़ताल जैसे लोकतांत्रिक संघर्षों को अपराध की तरह पेश करने की कोशिशों का डटकर प्रतिरोध किया जाएगा।
सीटू नेताओं ने कहा कि देशभर में लगातार आयोजित हो रहे सम्मेलनों और मजदूर संगठनों की बैठकों में जिस संघर्ष के रास्ते को निर्धारित किया गया है, आगे की सभी कार्रवाइयां उसी अवज्ञा और प्रतिरोध की दिशा में आगे बढ़ाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि मजदूर वर्ग अपने अधिकारों और मांगों को लेकर एकजुट होकर संघर्ष करेगा।
30 नवंबर तक दिल्ली पहुंचने का आह्वान
सीटू राज्य कमेटी ने हिमाचल प्रदेश के सभी जिला एवं संबंधित यूनियनों को व्यापक तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के मजदूरों से आह्वान किया गया है कि वे 30 नवंबर 2026 की रात तक दिल्ली पहुंचें, ताकि 1 दिसंबर की सुबह 10 बजे शुरू होने वाले मार्च में समय पर शामिल हो सकें। सीटू नेताओं ने कहा कि संघर्ष की परिस्थितियों को देखते हुए सभी प्रतिभागी पर्याप्त तैयारी के साथ दिल्ली पहुंचें और आवश्यकता पड़ने पर रात में भी सड़कों पर डटे रहने के लिए तैयार रहें। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मजदूरों को 3 दिसंबर की शाम से पहले वापसी की योजना न बनाने का भी आह्वान किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा आंदोलन को रोकने अथवा बाधाएं खड़ी करने की किसी भी कोशिश के बावजूद मजदूर शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ संघर्ष के माध्यम से अपनी मांगों को बुलंद करेंगे। जहां भी प्रशासन आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास करेगा, वहां मजदूर अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत सड़क पर बैठकर अपनी मांगों के समाधान की मांग करेंगे।
छह प्रमुख मांगों को लेकर होगा संघर्ष
सीटू राज्य कमेटी ने कहा कि यह संघर्ष किसी एक वर्ग या क्षेत्र की मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों मजदूरों और मेहनतकशों के अधिकारों से जुड़ा है। आंदोलन की प्रमुख मांगों में चार श्रम संहिताओं को वापस लेना, 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) की सर्वसम्मत सिफारिशों को लागू करना और स्कीम वर्कर्स को मजदूर का दर्जा देना शामिल है। सीटू ने स्कीम वर्कर्स को न्यूनतम वेतन, EPF, ESI, ग्रेच्युटी तथा अन्य सभी कानूनी लाभ सुनिश्चित करने और जब तक यह लागू नहीं होता, तब तक उनके मानदेय में तत्काल वृद्धि करने की मांग की है।
इसके अलावा सभी भारतीय मजदूरों के लिए ₹42,000 न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने, सभी स्व-रोजगार वाले वर्कर्स के लिए ₹42,000 की न्यूनतम मासिक आय तथा सभी के लिए ₹21,000 की सार्वभौमिक न्यूनतम पेंशन लागू करने की मांग की गई है। सरकारी, अर्ध-सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सभी रिक्त पदों को भरने तथा स्थायी एवं लगातार चलने वाले काम में लगे सभी ठेका और गैर-नियमित मजदूरों को नियमित करने की मांग भी आंदोलन में उठाई जाएगी। नियमितीकरण होने तक समान काम करने वाले स्थायी कर्मचारियों के बराबर ठेका मजदूरों को वेतन देने की मांग की गई है।
सीटू ने श्रमिक सुरक्षा के नियमों का जानबूझकर उल्लंघन बंद करने, दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और श्रमिकों के कानूनी अधिकारों एवं वैधानिक लाभों का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही ट्रेड यूनियन गतिविधियों और हड़ताल जैसे लोकतांत्रिक संघर्षों का अपराधीकरण बंद करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जाएगी।
आंदोलन में जल, जमीन और जंगल पर जनता के अधिकारों की रक्षा की मांग भी शामिल है। सीटू ने देश की प्राकृतिक एवं राष्ट्रीय संपत्तियों की रक्षा करने तथा अंधाधुंध जमीन हड़पना बंद करने की मांग की है। विकास परियोजनाओं से विस्थापित लोगों के लिए पुनर्वास, पुनर्स्थापन और रोजगार सुनिश्चित करने की मांग भी की जाएगी।
हिमाचल से होगी व्यापक मजदूर लामबंदी
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सरकारी, अर्ध-सरकारी, सार्वजनिक क्षेत्र, उद्योग, निर्माण, परिवहन, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, आंगनवाड़ी, मिड-डे मील, आशा, आउटसोर्स, ठेका, स्कीम वर्कर्स तथा असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के बीच इस अभियान को व्यापक रूप से ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल में भी मजदूरों को न्यूनतम वेतन, नियमितीकरण, समान काम का समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा, EPF, ESI, ग्रेच्युटी, पेंशन तथा रोजगार की सुरक्षा के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र की नीतियों का असर प्रदेश के मजदूरों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में दिल्ली का यह संघर्ष हिमाचल के मजदूरों के स्थानीय संघर्षों से सीधे जुड़ा हुआ है। सभी जिला कमेटियों, यूनियनों, इकाइयों और कार्यकर्ताओं से आह्वान किया गया है कि 1 दिसंबर के दिल्ली कार्यक्रम को सीटू के संगठनात्मक अभियान की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए गांव, पंचायत, औद्योगिक क्षेत्रों, सरकारी संस्थानों और कार्यस्थलों तक मजदूरों को लामबंद किया जाए।
सीटू नेताओं ने कहा कि आज आवश्यकता है कि देश का मजदूर वर्ग अपनी ताकत को पहचानते हुए एकजुट हो और सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष खड़ा करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि लाल झंडे के नीचे संगठित मजदूर वर्ग अपनी पूरी ताकत और दृढ़ संकल्प के साथ दिल्ली पहुंचेगा और अपने अधिकारों की आवाज बुलंद करेगा।
Dharmpur, Mandi | Sep 11, 2026