सीलोन पंचायत उपचुनाव में सियासी दबंगई?
पुलिस की मौजूदगी में जसोदा यादव का फॉर्म छीने जाने का आरोप, अधिकारी पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश का भी दावा
राजनगर। राजनगर विधानसभा क्षेत्र की सीलोन पंचायत में उपचुनाव के दौरान नामांकन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि जसोदा यादव का चुनावी फॉर्म चुनाव आयोग के समक्ष जमा किए जाने के बाद कुछ दबंग लोग वहां पहुंचे और पुलिस की मौजूदगी में कथित तौर पर फॉर्म छीनकर ले गए।
सबसे गंभीर आरोप तो यह है कि फॉर्म छीनने के दौरान संबंधित अधिकारी को गाड़ी से कुचलने की कोशिश की गई। यदि यह आरोप सही है तो मामला सिर्फ चुनावी विवाद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह चुनावी प्रक्रिया और सरकारी अधिकारी की सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर मामला बन जाता है।
पुलिस की मौजूदगी में सब होता रहा और पुलिस देखती रही?
अब सबसे बड़ा सवाल पुलिस की भूमिका को लेकर उठ रहा है।
अगर मौके पर पुलिस बल मौजूद था, तो कथित तौर पर फॉर्म छीनकर ले जाने वालों को रोकने की कोशिश क्यों नहीं की गई?
अगर अधिकारी पर गाड़ी चढ़ाने का प्रयास हुआ, तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या पुलिस को चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं दी गई थी?
आखिर पुलिस वहां सुरक्षा देने गई थी या पूरा घटनाक्रम देखने?
लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ एक फॉर्म भरने की प्रक्रिया नहीं है। यह जनता के अधिकार और निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद है। अगर नामांकन फॉर्म ही दबंगई के दम पर छीना जाने लगे तो फिर सवाल उठना स्वाभाविक है कि आम उम्मीदवार चुनाव कैसे लड़ेगा?
फॉर्म छीनने के पीछे क्या था मकसद?
यह भी जांच का विषय है कि आखिर फॉर्म छीनकर ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या किसी उम्मीदवार को चुनावी मैदान से बाहर करने की कोशिश थी? क्या इसके पीछे कोई पूर्व नियोजित साजिश थी?
हालांकि पुलिस और चुनाव आयोग की मिलीभगत का कोई निष्कर्ष बिना जांच के निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।
यदि CCTV फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग या मौके पर मौजूद लोगों के बयान उपलब्ध हैं, तो उन्हें सामने लाकर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वहां वास्तव में क्या हुआ।
अब चुनाव आयोग से जनता के सवाल
1. जसोदा यादव का फॉर्म वास्तव में कब और किस अधिकारी के समक्ष जमा हुआ?
2. फॉर्म जमा होने के बाद उसे किसने और कैसे छीना?
3. मौके पर मौजूद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की?
4. क्या अधिकारी को वाहन से कुचलने का प्रयास हुआ?
5. इस पूरे मामले में अब तक कौन-कौन सी धाराओं में कार्रवाई की गई?
6. क्या घटनास्थल के CCTV और वीडियो फुटेज सुरक्षित किए गए हैं?
7. क्या किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी की भूमिका की जांच होगी?
चुनाव लोकतंत्र का पर्व है, दबंगई का अखाड़ा नहीं।
अगर फॉर्म छीनने और अधिकारी को कुचलने की कोशिश के आरोप सच साबित होते हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला है और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
और अगर आरोप गलत हैं, तो प्रशासन को सामने आकर पूरी सच्चाई जनता के सामने रखनी चाहिए।
क्योंकि सवाल सिर्फ जसोदा यादव के फॉर्म का नहीं है—सवाल यह है कि सीलोन पंचायत में चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से होगा या दबंगई के दम पर?
अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच सामने लाता है या फिर मामला भी बाकी शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।
Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Sep 15, 2026