मऊ केसरी जंगपाल सिंह की याद में सजा ऐतिहासिक दंगल!
अखाड़े में गूंजा पहलवानों का दमखम, विजयदशमी पर आदेडीह में दिखा कुश्ती का जुनून!
मऊ | आदेडीह गांव
विजयदशमी के पावन अवसर पर आदेडीह गांव में स्वर्गीय मऊ केसरी जंगपाल सिंह पहलवान की स्मृति में भव्य दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विभिन्न जिलों से पहुंचे पहलवानों ने अपने शानदार दांव-पेच और दमदार प्रदर्शन से दर्शकों का उत्साह बढ़ाया।
1972 में हासिल किया था मऊ केसरी का खिताब!
स्वर्गीय जंगपाल सिंह पहलवान का जन्म 11 अक्टूबर 1952 को हुआ था। उन्होंने वर्ष 1972 में मऊ केसरी का खिताब हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। कुश्ती के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने वर्ष 1980 में भलया गांव में अखाड़े की स्थापना कर नई पीढ़ी के पहलवानों को तैयार करने की पहल की।
उनकी विरासत को जीवंत रखने के लिए उनके पुत्र राज नारायण सिंह, हृदय नारायण सिंह, जय नारायण सिंह और संजय कुमार सिंह हर वर्ष विजयदशमी पर स्मृति दंगल का आयोजन कराते हैं।
खेल में दम है तो रोजगार के अवसर भी हैं!
राष्ट्रीय स्तर के पहलवान और भारतीय रेलवे में कार्यरत मंगल सिंह ने कहा कि खेल केवल शारीरिक ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि रोजगार पाने और जीवन में आगे बढ़ने का भी सशक्त माध्यम है। खेलों से अनुशासन, मेहनत और चरित्र निर्माण होता है।
युवाओं को आधुनिक अखाड़े और बेहतर सुविधाएं देने की जरूरत!
यूपी केसरी रह चुके पहलवान एवं अखाड़ा संचालक तेज बहादुर सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों में कुश्ती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत है उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और उचित मंच उपलब्ध कराने की। अभिभावकों को भी अपने बच्चों को कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
कुश्ती सिर्फ खेल नहीं, संस्कार और आत्मविश्वास की पहचान है!
अनुशासन, संघर्ष, आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का जज्बा पैदा करने वाली कुश्ती की परंपरा को बचाना आज समय की मांग है। ग्रामीण अंचलों में अखाड़ों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि मऊ की मिट्टी से निकलने वाले पहलवान देश-दुनिया में अपनी पहचान बना सकें।
मिट्टी का मान, पहलवानों का सम्मान और गुरुजनों की विरासत को सलाम!
स्वर्गीय मऊ केसरी जंगपाल सिंह पहलवान को विनम्र श्रद्धांजलि!
आपकी राय में क्या गांव-गांव में आधुनिक कुश्ती अखाड़े बनने चाहिए? कमेंट करके जरूर बताएं।
पोस्ट को शेयर करें और मऊ की इस गौरवशाली कुश्ती परंपरा को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें।
सुनिए वीडियो में तेज बहादुर सिंह और मंगल सिंह ने क्या कहा —
#मऊ #आदेडीह #जंगपालसिंहपहलवान #मऊकेसरी #दंगल #कुश्ती #पहलवान #यूपीकेसरी #ग्रामीणखेल #खेलऔररोजगार #विजयदशमी #MauNews #Wrestling