मिट्टी के अखाड़ों ने दिए मऊ को नामचीन पहलवान, लेकिन आज भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार
विजयदशमी पर भाजपा नेता विजय प्रताप सिंह ने स्व. राज किशोर सिंह को दी श्रद्धांजलि, पहलवानों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की उठाई मांग
मऊ, विजयदशमी के पावन अवसर पर आदेडीह गांव में भाजपा नेता एवं समाजसेवी विजय प्रताप सिंह ने प्रसिद्ध पहलवान स्वर्गीय राज किशोर सिंह के आवास पर पहुंचकर उनके चित्र पर माल्यार्पण किया और परिजनों से मुलाकात कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में कुश्ती की समृद्ध परंपरा और पहलवानों को तैयार करने में स्व. राज किशोर सिंह के योगदान को याद किया।
विजय प्रताप सिंह ने कहा कि स्व. राज किशोर सिंह अपने समय के प्रसिद्ध पहलवान थे। उन्होंने अनेक युवाओं को कुश्ती की बारीकियां सिखाकर इस विधा में पारंगत बनाया। उनके शिष्य जंगपाल सिंह ने वर्ष 1972 में मऊ केसरी का खिताब हासिल कर जिले का गौरव बढ़ाया। उनके अखाड़े से निकले कई पहलवानों ने प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इतना ही नहीं, अनेक पहलवानों ने खेल के दम पर सरकारी नौकरियां हासिल कर अपना भविष्य भी संवारा।
उन्होंने कहा कि सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है, लेकिन धरातल पर पहलवानों को अब भी आधुनिक सुविधाओं, बेहतर प्रशिक्षण और जरूरी संसाधनों का इंतजार है। जनप्रतिनिधियों को कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों के विकास के लिए ठोस पहल करनी चाहिए, ताकि ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का उचित अवसर मिल सके।
विजय प्रताप सिंह ने कहा कि संसाधनों के अभाव के बावजूद पुराने पहलवानों और उनके परिवारों का हौसला नहीं टूटा है। आज भी पारंपरिक मिट्टी के अखाड़ों में बच्चों को कुश्ती के दांव-पेच सिखाकर नई प्रतिभाएं तैयार की जा रही हैं। इसी परंपरा के दम पर स्थानीय स्तर के अनेक युवा केंद्र और प्रदेश सरकार में नौकरी प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने कुश्ती की इस विरासत को संरक्षित करने और युवा पहलवानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।