#बालाघाट
बलराम तालाब से बदली किसान की तस्वीर, मत्स्य पालन से हर साल एक लाख रुपये की अतिरिक्त आय
जल संरक्षण के साथ खेती को मिला सहारा, किसान विनोद मरावी के लिए आजीविका का बना नया साधन
जल संरक्षण के प्रयास जब आजीविका के नए अवसरों से जुड़ते हैं, तो किसानों के लिए समृद्धि के रास्ते खुलने लगते हैं। बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड के ग्राम बलगांव के कृषक श्री विनोद उर्फ परसराम मरावी ने बलराम तालाब के माध्यम से इस बात को साबित किया है। कृषि विभाग के सहयोग से वर्ष 2023-24 में उनके खेत में निर्मित बलराम तालाब ने न केवल वर्षा जल के संरक्षण और सिंचाई की सुविधा बढ़ाने में मदद की, बल्कि मत्स्य पालन के जरिए अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर भी प्रदान किया। इस पहल से किसान को प्रतिवर्ष लगभग एक लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
वर्षा पर निर्भरता बनी थी चुनौती
कृषक श्री मरावी परंपरागत रूप से कृषि कार्य करते आ रहे थे। उनके पास 6.478 हेक्टेयर कृषि भूमि है। खेती में वर्षा पर निर्भरता, अनियमित बारिश और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें कृषि कार्यों के संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। जल संकट का असर कृषि उत्पादन और आय बढ़ाने के प्रयासों पर भी पड़ता था। ऐसे में उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और खेती के साथ आय का अतिरिक्त साधन विकसित करना उनके लिए आवश्यक था।
बलराम तालाब बना बदलाव का आधार
कृषक की समस्या को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग द्वारा उन्हें जल संरक्षण और कृषि विकास के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया गया। विभाग के सहयोग से वर्ष 2023-24 में उनके खेत में बलराम तालाब का निर्माण कराया गया। तालाब का उद्देश्य वर्षा जल का संग्रहण कर सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाना तथा कृषि गतिविधियों को बेहतर बनाना था। तालाब के निर्माण से खेत में वर्षा जल का संग्रहण संभव हुआ। इससे उपलब्ध जल संसाधनों का उपयोग करने और कृषि कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने में सहायता मिली। इसके साथ ही तालाब का उपयोग मत्स्य पालन के लिए भी किया जाने लगा, जिससे खेती के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने का एक नया अवसर मिला।
मत्स्य पालन से प्रतिवर्ष लगभग एक लाख रुपये की आय
बलराम तालाब ने श्री मरावी के लिए जल संरक्षण के साथ-साथ आजीविका का एक अतिरिक्त साधन विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तालाब में मत्स्य पालन के माध्यम से वे प्रतिवर्ष लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। इससे उन्हें परंपरागत खेती के अतिरिक्त कमाई का अवसर मिला है। यह पहल दर्शाती है कि खेतों में जल संरक्षण के लिए निर्मित तालाबों का उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से मत्स्य पालन जैसी सहायक गतिविधियों को अपनाकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं।
जल संरक्षण से आर्थिक मजबूती की ओर
कृषि विभाग के सहयोग से निर्मित बलराम तालाब श्री विनोद उर्फ परसराम मरावी के लिए कृषि विकास और आर्थिक सुदृढ़ीकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बना है। इससे वर्षा जल के संरक्षण, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता में सुधार और मत्स्य पालन के जरिए अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिला है।
कृषक श्री मरावी की यह सफलता की कहानी बताती है कि जल संरक्षण के प्रभावी उपायों और कृषि के साथ सहायक गतिविधियों को अपनाकर किसान अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकते हैं। बलराम तालाब जैसी पहल खेती को संबल देने के साथ किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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